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स्वच्छता सर्वेक्षण को झांसी पहुंची केंद्रीय टीम
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central team reach jhansi to servey
झांसी। शहर में सफाई व्यवस्था की जमीनी हकीकत परखने क्यूसीआई की तीन सदस्यीय केंद्रीय टीम शुक्रवार को झांसी पहुंच गई। टीम स्वच्छता सर्वेक्षण-2020 को लेकर तमाम मोहल्लों में जाएगी और लोगों से बातचीत करके सफाई का आकलन करेगी। पहले दिन टीम सदस्यों ने कई मोहल्लों में पहुंचकर सर्वे का काम शुरू कर दिया।
क्यूसीआई टीम में शामिल तीन सदस्यों की टीम शाम करीब पांच बजे वार्ड संख्या-36 प्रेमगंज द्वितीय पहुंची। यहां सफाई व्यवस्था को लेकर लोगोें से सवाल-जवाब किए। इसी बीच पार्षद उमेश जोशी भी मौके पर पहुंच गए। स्थानीय लोगों ने टीम सदस्यों को मोहल्ले में जगह-जगह पड़ा कूड़ा दिखाया। डोर-टू-डोर कूड़ा न उठने की शिकायत भी की। पार्षद के मुताबिक मोहल्ले की आबादी करीब 15 हजार है लेकिन, महज 17 सफाई कर्मी लगाए गए हैं। सदस्यों ने यहां फोटो लेकर इसको पोर्टल पर अपलोड किए।
यहां से टीम मिशन कंपाउंड समेत आसपास के मोहल्लों में भी पहुंची। लोगों से ओडीएफ स्टेटस, शहर के कचरा मुक्त स्थिति, शहर की साफ-सफाई, व्यवसायिक एवं सार्वजनिक स्थानों की सफाई, सूखा एवं गीला कचरा, सार्वजनिक एवं सामुदायिक शौचालयों की सफाई की स्थिति आदि को लेकर सवाल पूछे। टीम करीब एक सप्ताह यहां रहकर नगर निगम के सफाई संबंधी दावों की पड़ताल करेगी। अपर नगर आयुक्त अरुण गुप्ता ने टीम के दौरे को गोपनीय बताया है।
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68वें स्थान से उछाल की चुनौती
पांचवें चरण के स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए 6000 अंक तय किए गए हैं। अप्रैल-जून-जुलाई एवं सितंबर-अक्तूबर-दिसंबर की दो तिमाही का परिणाम जारी हो चुका। पहली तिमाही में झांसी के खाते में 1249.84 अंक आए जबकि दूसरी तिमाही में 998 अंक मिले। इनके आधार पर झांसी को देशभर में (पांच लाख तक की आबादी वाले शहरों में) 68वां स्थान हासिल हुआ हालांकि इसी श्रेणी में वह यूपी का दूसरा साफ सुथरा शहर माना गया। पिछले वर्ष 2019 में भी झांसी 68वें स्थान पर रही जबकि 2018 में वह 60वें पायदान पर रही थी। उधर, निगम प्रशासन पिछले साल भर से रैकिंग सुधार में जुटा रहा लेकिन, कचरा निस्तारण न कर सकने का खामियाजा भुगतना पड़ा। आखिरी तिमाही 2000 अंकों की है, जिसमें सबसे अधिक अंक पब्लिक फीडबैक पर ही दिए जाने हैं।
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क्यूसीआई टीम में शामिल तीन सदस्यों की टीम शाम करीब पांच बजे वार्ड संख्या-36 प्रेमगंज द्वितीय पहुंची। यहां सफाई व्यवस्था को लेकर लोगोें से सवाल-जवाब किए। इसी बीच पार्षद उमेश जोशी भी मौके पर पहुंच गए। स्थानीय लोगों ने टीम सदस्यों को मोहल्ले में जगह-जगह पड़ा कूड़ा दिखाया। डोर-टू-डोर कूड़ा न उठने की शिकायत भी की। पार्षद के मुताबिक मोहल्ले की आबादी करीब 15 हजार है लेकिन, महज 17 सफाई कर्मी लगाए गए हैं। सदस्यों ने यहां फोटो लेकर इसको पोर्टल पर अपलोड किए।
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यहां से टीम मिशन कंपाउंड समेत आसपास के मोहल्लों में भी पहुंची। लोगों से ओडीएफ स्टेटस, शहर के कचरा मुक्त स्थिति, शहर की साफ-सफाई, व्यवसायिक एवं सार्वजनिक स्थानों की सफाई, सूखा एवं गीला कचरा, सार्वजनिक एवं सामुदायिक शौचालयों की सफाई की स्थिति आदि को लेकर सवाल पूछे। टीम करीब एक सप्ताह यहां रहकर नगर निगम के सफाई संबंधी दावों की पड़ताल करेगी। अपर नगर आयुक्त अरुण गुप्ता ने टीम के दौरे को गोपनीय बताया है।
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68वें स्थान से उछाल की चुनौती
पांचवें चरण के स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए 6000 अंक तय किए गए हैं। अप्रैल-जून-जुलाई एवं सितंबर-अक्तूबर-दिसंबर की दो तिमाही का परिणाम जारी हो चुका। पहली तिमाही में झांसी के खाते में 1249.84 अंक आए जबकि दूसरी तिमाही में 998 अंक मिले। इनके आधार पर झांसी को देशभर में (पांच लाख तक की आबादी वाले शहरों में) 68वां स्थान हासिल हुआ हालांकि इसी श्रेणी में वह यूपी का दूसरा साफ सुथरा शहर माना गया। पिछले वर्ष 2019 में भी झांसी 68वें स्थान पर रही जबकि 2018 में वह 60वें पायदान पर रही थी। उधर, निगम प्रशासन पिछले साल भर से रैकिंग सुधार में जुटा रहा लेकिन, कचरा निस्तारण न कर सकने का खामियाजा भुगतना पड़ा। आखिरी तिमाही 2000 अंकों की है, जिसमें सबसे अधिक अंक पब्लिक फीडबैक पर ही दिए जाने हैं।