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वाणिज्य करः कागजों में बेच दिया तीन करोड़ का सीमेंट
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झांसी। मऊरानीपुर के एक व्यापारी ने वाणिज्य कर पंजीयन का दुरुपयोग करते हुए तीन करोड़ का सीमेंट आपूर्ति किए बिना ही बिलों में बेच दिया। बाद में व्यापारी ने इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने के लिए विभाग में दावा कर दिया। शक होने पर विशेष अनुसंधान शाखा ने फर्म की जांच की। जांच में पता लगा कि संबंधित व्यक्ति ने सिर्फ नाम के लिए पंजीयन ले रखा है। वह सीमेंट का धंधा ही नहीं करता है। विभाग ने शमन भेजकर जवाब मांगा है।
वाणिज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा ने पिछले दिनों मऊरानीपुर में एक व्यापारी की फर्म का सर्वे किया था। दरअसल, व्यापारी ने एक महीने पहले तीन करोड़ का सीमेंट बिलों में बेचना दिखाकर विभाग में इनपुट टैक्स क्रेडिट के लिए दावा किया था। व्यापारी का इरादा था कि सीमेंट पर 28 प्रतिशत टैक्स है। कंपनी पहले ही टैक्स काट लेती है। ऐसे में वह जीएसटी रिटर्न भरकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ ले लेगा। ऐसे में उसके खाते में सीमेंट बिना बेचे ही लाखों रुपये में आ जाएंगे। मगर वह ऐसा करने में कामयाब होता, इसके पहले ही उसके पास एसआईबी टीम पहुंच गई। हालांकि, जांच के दौरान व्यापारी का कहना है कि उसकी फर्म के पंजीयन का किसी ने दुरुपयोग किया है। वह सीमेंट का धंधा ही नहीं करता है। टीम में डिप्टी कमिश्नर संजय शर्मा, सहायक कमिश्नर संतोष शामिल रहे। इस मामले में ज्वाइंट कमिश्नर (एसआईबी) एके सिंह ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। विभाग ने शमन भेजकर व्यापारी से जवाब मांगा है।
यह होता इनपुट टैक्स क्रेडिट
पक्के बिल से जो माल खरीदा जाता है। उस पर लगा जो टैक्स होता है। उसी पर आपको जीएसटी रिटर्न भरने से इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलता है। यानी एक वस्तु पर सरकार को जितना टैक्स मिलना है, उसका पूरा का पूरा बोझ अंतिम खरीदार पर पड़े। माल खरीद की श्रृंखला में बीच में पड़ने वाले कारोबारियों पर उसका बोझ न पड़े।
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वाणिज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा ने पिछले दिनों मऊरानीपुर में एक व्यापारी की फर्म का सर्वे किया था। दरअसल, व्यापारी ने एक महीने पहले तीन करोड़ का सीमेंट बिलों में बेचना दिखाकर विभाग में इनपुट टैक्स क्रेडिट के लिए दावा किया था। व्यापारी का इरादा था कि सीमेंट पर 28 प्रतिशत टैक्स है। कंपनी पहले ही टैक्स काट लेती है। ऐसे में वह जीएसटी रिटर्न भरकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ ले लेगा। ऐसे में उसके खाते में सीमेंट बिना बेचे ही लाखों रुपये में आ जाएंगे। मगर वह ऐसा करने में कामयाब होता, इसके पहले ही उसके पास एसआईबी टीम पहुंच गई। हालांकि, जांच के दौरान व्यापारी का कहना है कि उसकी फर्म के पंजीयन का किसी ने दुरुपयोग किया है। वह सीमेंट का धंधा ही नहीं करता है। टीम में डिप्टी कमिश्नर संजय शर्मा, सहायक कमिश्नर संतोष शामिल रहे। इस मामले में ज्वाइंट कमिश्नर (एसआईबी) एके सिंह ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। विभाग ने शमन भेजकर व्यापारी से जवाब मांगा है।
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यह होता इनपुट टैक्स क्रेडिट
पक्के बिल से जो माल खरीदा जाता है। उस पर लगा जो टैक्स होता है। उसी पर आपको जीएसटी रिटर्न भरने से इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलता है। यानी एक वस्तु पर सरकार को जितना टैक्स मिलना है, उसका पूरा का पूरा बोझ अंतिम खरीदार पर पड़े। माल खरीद की श्रृंखला में बीच में पड़ने वाले कारोबारियों पर उसका बोझ न पड़े।
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