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सीबीआई करेगी पुष्पेंद्र हत्याकांड की जांच
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Thu, 01 Oct 2015 01:35 AM IST
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झांसी। उच्च न्यायालय ने पुष्पेंद्र हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में पुलिस के विवेचना अधिकारियों को मामले से जुड़े सभी अभिलेख सीबीआई को दो सप्ताह में हस्तगत करने के निर्देश दिए हैं। बुधवार को पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता राधे कृष्ण बाथम ने उच्च न्यायालय के इस निर्णय की जानकारी पत्रकारों को दी।
उन्होंने बताया कि विगत 22 फरवरी 2015 को पुष्पेंद्र सिंह कुशवाहा को साजिश के तहत घर से अपहरण करने के बाद हत्या कर शव को भगवंतपुरा रोड साइड पर मोटर साइकिल सहित फेंका गया था। इस प्रकरण में सदर बाजार थाने में सुरेश चंद्र गुप्ता, गब्बर, विक्की, सुरेंद्र साहू व अनिल कुशवाहा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। मगर स्थानीय पुलिस द्वारा हत्या को दुर्घटना में परिवर्तित करने के लिए विवेचना में लीपापोती की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उक्त घटना की एफआईआर तथा मृतक पुष्पेंद्र सिंह के शव का पोस्टमार्टम हुए बिना पुलिस के एक अधिकारी ने आरोपियों के साथ सांठगांठ कर हत्या को हादसा बता दिया था। विगत 22 अप्रैल को उच्च न्यायालय ने डीजीपी को आदेश जारी कर विवेचना को अपने निकट पर्यवेक्षण में कराने तथा अनियमित विवेचना कार्यवाही के विषय में जांच कराकर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई को कहा था।
इस आदेश के क्रियान्वयन हेतु उच्च न्यायालय ने चार सप्ताह का समय दिया था, परंतु किसी भी अधिकारी व विवेचना अधिकारी ने उच्च न्यायालय के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया।
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एक जून 2015 को उच्च न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक को 22 अप्रैल के आदेशों को पारित कराने के निर्देश दिए थे। पूर्व घटनाओं से संबंधित अभिलेखों एवं दिए गए तर्कों एवं प्रतिपक्षियों के तर्कों पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने पाया कि क्राइम ब्रांच झांसी द्वारा की जा रही विवेचना सही नहीं है। क्राइम ब्रांच के अधिकारी मूल तथ्यों पर विवेचना नहीं कर रहे हैं। इस कारण उच्च न्यायालय ने उक्त प्रकरण की विवेचना सीबीआई को स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं। इस मौके पर एडवोकेट मदन लाल बबेले, जय शंकर कुशवाहा, एसएन मिश्रा, एनएस मिश्रा, वीर सिंह परिहार, सैमुअल मसीह, रिंकू कुशवाहा, सत्येंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया कि विगत 22 फरवरी 2015 को पुष्पेंद्र सिंह कुशवाहा को साजिश के तहत घर से अपहरण करने के बाद हत्या कर शव को भगवंतपुरा रोड साइड पर मोटर साइकिल सहित फेंका गया था। इस प्रकरण में सदर बाजार थाने में सुरेश चंद्र गुप्ता, गब्बर, विक्की, सुरेंद्र साहू व अनिल कुशवाहा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। मगर स्थानीय पुलिस द्वारा हत्या को दुर्घटना में परिवर्तित करने के लिए विवेचना में लीपापोती की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उक्त घटना की एफआईआर तथा मृतक पुष्पेंद्र सिंह के शव का पोस्टमार्टम हुए बिना पुलिस के एक अधिकारी ने आरोपियों के साथ सांठगांठ कर हत्या को हादसा बता दिया था। विगत 22 अप्रैल को उच्च न्यायालय ने डीजीपी को आदेश जारी कर विवेचना को अपने निकट पर्यवेक्षण में कराने तथा अनियमित विवेचना कार्यवाही के विषय में जांच कराकर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई को कहा था।
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इस आदेश के क्रियान्वयन हेतु उच्च न्यायालय ने चार सप्ताह का समय दिया था, परंतु किसी भी अधिकारी व विवेचना अधिकारी ने उच्च न्यायालय के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया।
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एक जून 2015 को उच्च न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक को 22 अप्रैल के आदेशों को पारित कराने के निर्देश दिए थे। पूर्व घटनाओं से संबंधित अभिलेखों एवं दिए गए तर्कों एवं प्रतिपक्षियों के तर्कों पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने पाया कि क्राइम ब्रांच झांसी द्वारा की जा रही विवेचना सही नहीं है। क्राइम ब्रांच के अधिकारी मूल तथ्यों पर विवेचना नहीं कर रहे हैं। इस कारण उच्च न्यायालय ने उक्त प्रकरण की विवेचना सीबीआई को स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं। इस मौके पर एडवोकेट मदन लाल बबेले, जय शंकर कुशवाहा, एसएन मिश्रा, एनएस मिश्रा, वीर सिंह परिहार, सैमुअल मसीह, रिंकू कुशवाहा, सत्येंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।