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बीयू: सिक्योरिटी एजेंसी का टेंडर विवादों में
ब्यूरो
Updated Tue, 02 Feb 2016 12:57 AM IST
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में इस बार भी सिक्योरिटी एजेंसी को लेकर हुआ टेंडर विवादों में आ गया है। कमेटी द्वारा एक एजेंसी को टेक्निकली फेल घोषित करने के बाद बिड में शामिल कर लिया गया। बाद में न्यूनतम दर निकलने पर एजेंसी को टेंडर नहीं दिया गया।
बीयू में सिक्योरिटी एजेंसी के टेंडर में ग्यारह संस्थाओं ने आवेदन किया था, जिसमें कृष्णा सिक्योरिटी सर्विस भी शामिल है। टेंडर से पूर्व समस्त एजेंसियों से दस्तावेज मांगे गए थे, जिसमें उक्त एजेंसी के कुछ कागजात जमा नहीं हो सके। बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पत्राचार के जरिए कागजात मांगे गए।
एजेंसी के सदस्यों के मुताबिक एक बार नहीं बल्कि दो बार उन्होंने कुलसचिव को संबंधित कागजात उपलब्ध कराए। मगर परचेज कमेटी ने कागजात पूर्ण न होने की बात को आधार बनाकर एजेंसी को टेक्निकली फेल घोषित कर दिया। यही नहीं, फेल घोषित करने के बावजूद फाइनल बिड में भी एजेंसी को शामिल कर लिया।
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वहीं, जब उनकी दर अन्य फर्मों की सापेक्ष सबसे न्यूनतम निकल आई तो उन्हें टेक्निकल फेल होने का हवाला देते हुए टेंडर देने से इंकार कर दिया गया। अब यह मामला पेंचीदा हो गया है।
सोमवार को मामले में एजेंसी के मालिकों ने वित्त अधिकारी से मिलकर अपना पक्ष रखा। एजेंसी ने कहा कि उसकी तरफ से सभी कागजी कार्रवाई पूरी की गई है। कागजात विश्वविद्यालय से ही गायब हो गए हैं। वहीं, वित्त अधिकारी धर्मपाल ने बताया कि अभी किसी भी एजेंसी के नाम टेंडर नहीं किया गया है। मंगलवार को इस मामले में अधिकारी बैठकर कर निर्णय लेंगे।
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बीयू में सिक्योरिटी एजेंसी के टेंडर में ग्यारह संस्थाओं ने आवेदन किया था, जिसमें कृष्णा सिक्योरिटी सर्विस भी शामिल है। टेंडर से पूर्व समस्त एजेंसियों से दस्तावेज मांगे गए थे, जिसमें उक्त एजेंसी के कुछ कागजात जमा नहीं हो सके। बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पत्राचार के जरिए कागजात मांगे गए।
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एजेंसी के सदस्यों के मुताबिक एक बार नहीं बल्कि दो बार उन्होंने कुलसचिव को संबंधित कागजात उपलब्ध कराए। मगर परचेज कमेटी ने कागजात पूर्ण न होने की बात को आधार बनाकर एजेंसी को टेक्निकली फेल घोषित कर दिया। यही नहीं, फेल घोषित करने के बावजूद फाइनल बिड में भी एजेंसी को शामिल कर लिया।
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वहीं, जब उनकी दर अन्य फर्मों की सापेक्ष सबसे न्यूनतम निकल आई तो उन्हें टेक्निकल फेल होने का हवाला देते हुए टेंडर देने से इंकार कर दिया गया। अब यह मामला पेंचीदा हो गया है।
सोमवार को मामले में एजेंसी के मालिकों ने वित्त अधिकारी से मिलकर अपना पक्ष रखा। एजेंसी ने कहा कि उसकी तरफ से सभी कागजी कार्रवाई पूरी की गई है। कागजात विश्वविद्यालय से ही गायब हो गए हैं। वहीं, वित्त अधिकारी धर्मपाल ने बताया कि अभी किसी भी एजेंसी के नाम टेंडर नहीं किया गया है। मंगलवार को इस मामले में अधिकारी बैठकर कर निर्णय लेंगे।