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बुंदेलखंड में ना चारा, ना पानी और ना अन्न
ब्यूरो
Updated Fri, 26 Feb 2016 12:30 AM IST
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झांसी। मैग्सेसे अवार्ड प्राप्त राजेंद्र सिंह का कहना है कि बुंदेलखंड में सूखे की स्थिति गंभीर है। ना चारा है, ना पानी है और ना अन्न। ऐसे हालातों में केंद्र एवं प्रदेश सरकार यहां के लोगों के लिए अन्न की पर्याप्त व्यवस्था कराए।
बुंदेलखंड की हरियाली, पानी व जवानी को रोकने के लिए जल्द ही जन जागरण अभियान चलाया जाएगा। ग्रास लैंड में सूखे की स्थिति एवं उसके समाधान पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में प्रतिभाग करने आए जल पुरुष के नाम से प्रसिद्ध राजेंद्र सिंह अमर उजाला से बात कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि हकीकत में बुंदेलखंड को मिले पैकेज का दुरुपयोग हुआ है। पैकेज मंडियां बनाने में खर्च हो गया है। बावड़ियों, कुओं, तालाबों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में पानी का संरक्षण जनता के अलावा सरकार भी करे। आज बुंदेलखंड में जंगल संरक्षित नहीं हैं।
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चारा व पानी की कमी है। महोबा के कई गांवों में पानी की बेहद कमी है। यह बुंदेलखंड का सबसे प्रभावित जिला है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में प्राकृतिक आपदा का एक कारण कई लोगों द्वारा यहां की खनिज संपदा, जंगल को खत्म करना है। यह लोग प्रकृति से खिलवाड़ कर रहे हैं।
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बुंदेलखंड की हरियाली, पानी व जवानी को रोकने के लिए जल्द ही जन जागरण अभियान चलाया जाएगा। ग्रास लैंड में सूखे की स्थिति एवं उसके समाधान पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में प्रतिभाग करने आए जल पुरुष के नाम से प्रसिद्ध राजेंद्र सिंह अमर उजाला से बात कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि हकीकत में बुंदेलखंड को मिले पैकेज का दुरुपयोग हुआ है। पैकेज मंडियां बनाने में खर्च हो गया है। बावड़ियों, कुओं, तालाबों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में पानी का संरक्षण जनता के अलावा सरकार भी करे। आज बुंदेलखंड में जंगल संरक्षित नहीं हैं।
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चारा व पानी की कमी है। महोबा के कई गांवों में पानी की बेहद कमी है। यह बुंदेलखंड का सबसे प्रभावित जिला है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में प्राकृतिक आपदा का एक कारण कई लोगों द्वारा यहां की खनिज संपदा, जंगल को खत्म करना है। यह लोग प्रकृति से खिलवाड़ कर रहे हैं।