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एक ऐसा घोड़ा जिसने अपनी जान की कीमत पर मालिक को उसकी प्रेमिका से मिला दिया

Thu, 11 Feb 2021 02:32 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 11 Feb 2021 02:32 AM IST
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bundelkhand love stories
bundelkhand love stories - फोटो : DEHAT
झांसी। आज हम बुंदेलखंड की एक ऐसी प्रेम कहानी से रु-ब-रु कराएंगे जिसमें एक घोड़े ने अपने मालिक को उसकी प्रेमिका से मिलवाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। ओरछा में स्थित घोड़े का अनूठा मंदिर और पिसनारी (आटा पीसने वाली) का पुल इस प्रेम कहानी के गवाह हैं।
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एमपी टूरिज्म के पर्यटन अधिकारी संजय मल्होत्रा बताते हैं कि ओरछा पर प्रकाशित पुस्तक डिस्कवरी ऑफ ओरछा में उन्हें यह कहानी पढ़ने को मिली थी, इसके अलावा यहां बुजुर्ग भी इस कहानी को सुनाते हैं। मल्होत्रा ने बताया कि बात है सत्रहवीं सदी की महानगर के ग्वाला जाति के घुड़सवार राम सिंह और लुहार जाति की प्रेमवती की प्रेमकहानी काफी चर्चा में थी। राम सिंह अपने घोड़े से ही रोजी रोटी चलाता था तथा प्रेमवती जो कि पास के ही फुटेरा गांव की थी वह ओरछा में धनाढ्य बस्ती व्यासपुरा और किले के परिसर में रहने वाले राजघराने के कर्मचारियों के घरों पर जाकर हाथ चक्की से आटा पीसक र गुजारा करती थी। रामसिंह का घोड़ा हवा से बातें करता था, राजघराने के अस्तबल में भी ऐसा कोई घोड़ा नहीं था। कई बार इस घोड़े को अस्तबल में लाने का प्रयास किया गया पर विफल रहे ,राम सिंह अपने घोड़े को जान से ज्यादा प्यार करता था। प्रेमवती और रामसिंह विवाह करना चाहते थे, मामला राज दरबार तक पहुंचा, उस दौर में अंतरजातीय विवाह किसी जघन्य अपराध से कम नहीं था। दोनों को राजा के सामने पेश किया गया। राजा ने मामला मंत्रियों को सौंपकर निपटारे के निर्देश दिए। मंत्रियों ने शर्त रखी कि प्रेमवती को एक टोकरे में अनाज दिया जाएगा, इस अनाज को हाथ चक्की से सिर्फ डेढ़ में घंटे में पीसना होगा, शर्त यह होगी, कि इधर चक्की रुकेगी और उधर राम सिंह के घोड़े को पूरे नगर (बारह कोस) की परिक्रमा करके नियत स्थान पर पहुंचना होगा। इनमें से एक भी शर्त टूटती है तो शादी नहीं होने दी जाएगी। राजा ने कहा कि यदि शर्तें पूरी होती हैं तो शादी करने की इजाजत तो होगी ही साथ में दोनों को इनाम भी दिया जाएगा। राम सिंह ने कहा हुजूर अगर उसके घोड़े ने शर्त पूरी कर दी तो उसका एक मंदिर बनवाया जाए जो जानवरों की वफादारी की मिसाल होगा। प्रेमवती ने कहा कि हुजूर घुरारी नदी पर एक पुल का निर्माण कर दिया जाए जिससे लोगों को आने जाने में सुविधा होगी। दूसरे दिन शर्त के अनुसार राम सिंह घोड़े पर सवार हुआ और प्रेमवती ने चक्की पर गेहूं पीसना शुरू किया। तय समय में राम सिंह का घोड़ा बेतवा किनारे निर्धारित स्थान पर पहुंच तो गया, पर उसने कुछ ही देर में प्राण त्याग दिए। राम सिंह व्यथित हो गया। प्रेमी युगल की शादी तो करवा दी गई पर राम सिंह ने अपने जान से प्यारे घोड़े की मौत के गम में दूसरे दिन ही दम तोड़, और राम सिंह की मौत होने पर प्रेमवती भी जीवित नहीं रह सकी। प्रेमकथा के इस तरह के दुखद अंत के बंद ओरछा के महाराजा ने बेतवा किनारे घोड़े का मंदिर बनवाया तथा घुरारी नदी पर पिसनारी के नाम से पुल का निर्माण कराया। स्थानीय निवासी रजनीश दुबे बताते हैं कि चार साल पहले घोड़े की प्रतिमा को संग्रहालय में रखवा दिया गया है, जबकि मंदिर और पिसनारी का पुल अभी भी मौजूद है।
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