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UP: 'बुंदेलखंड फिर बनेगा दलहन का हब', सूर्य प्रताप शाही बोले, किसान मिट्टी की जांच तो कराते हैं मगर उपचार नहीं

Wed, 11 Jun 2025 10:23 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी Published by: अनुज कुमार Updated Wed, 11 Jun 2025 10:23 PM IST
सार

प्रदेश के कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि सरकार कोशिश कर रही है कि सभी किसानों से वैज्ञानिक सीधा संवाद करें। न सिर्फ अच्छी पैदावार के बारे में बल्कि योजनाओं के बारे में भी बताया जा रहा है। 225 कृषि वैज्ञानिकों की टीम रोजाना 675 स्थानों पर संवाद करती है। 

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Bundelkhand has to be made a hub of pulses again said Surya Pratap Shahi
प्रदेश के कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही - फोटो : X/@spshahibjp

विस्तार

बुंदेलखंड को फिर दलहन फसल का हब बनाना है। कानपुर की पहचान दाल से थी, जो बुंदेलखंड से ही जाती थी। किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच तो कराते हैं मगर उपचार नहीं करते हैं। इससे पैदावार में सुधार नहीं होता है। ये बातें बुधवार को रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विवि में प्रदेश के कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कही।
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विवि में बुधवार को दूरदराज से आए किसानों को संबोधित करते हुए मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत फसल की कटाई, जमीन की गुणवत्ता बनाए रखने, ज्यादा पैदावार की तकनीक के बारे में कृषि वैज्ञानिक गांव-गांव जाकर किसानों को बता रहे हैं। किसान अपने क्षेत्र की जलवायु, जमीन की गुणवत्ता को नजरअंदाज कर पैदावार करते हैं, जिससे फसलों का उत्पादन खराब होता है।
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आगे कहा कि सरकार कोशिश कर रही है कि सभी किसानों से वैज्ञानिक सीधा संवाद करें। न सिर्फ अच्छी पैदावार के बारे में बल्कि योजनाओं के बारे में भी बताया जा रहा है। 225 कृषि वैज्ञानिकों की टीम रोजाना 675 स्थानों पर संवाद करती है। मंगलवार तक 8258 स्थान पर संवाद कार्यक्रम हो चुके हैं। इसमें 1466208 किसानों से संवाद हो चुका है। इनमें 320646 किसान बहनों ने भागीदारी की। 
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उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के किसान दलहन की खेती करें। दलहन की खेती से नाइट्रोजन (यूरिया) का स्तर बढ़ता है, जिसे यूरिया डालने की जरूरत नहीं पड़ती है। पांच-छह साल पहले बुंदेलखंड में पहाड़ व पत्थर की जमीन थी। अब तालाब भी है, जिससे जमीन उपजाऊ बनी है। बुंदेलखंड में दाल की काफी पैदावार होती थी। अब किसान धान आदि उगा रहे हैं। कानपुर की दाल की पूरे देश में पहचान थी, जो खत्म हो गई है।

इसकी वजह बुंदेलखंड में दाल की कम पैदावार होने की वजह से कानपुर में कम आपूर्ति होना है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में मूंग की फसल लहलहा रही है। वहीं, कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एके सिंह ने कहा कि मक्का की पैदावार में झांसी ने रिकॉर्ड तोड़ा है। किसान मूंगफली की पैदावार में पुराने बीज का प्रयोग कर रहे हैं, जिससे पैदावार उम्मीद से कम हो रही है। इस दौरान प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. एसके सिंह, गोसेवा आयोग अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, विधायक गरौठा जवाहर राजपूत, सीडीओ जुनैद अहमद आदि मौजूद रहे। 

दो घंटे का इंतजार और कार्यक्रम चला सिर्फ 22 मिनट
कृषि विवि में आयोजित संवाद कार्यक्रम में सुबह 11.30 बजे से किसानों का आना शुरू हो गया। 12 बजे तक सभी बैठकर मंत्री के आने का इंतजार करते रहे। मंत्री दोपहर करीब दो बजे आए और 22 मिनट में कार्यक्रम संपन्न हो गया। 


मंत्री हुए खफा बोले, इधर-उधर होता रहूं
मंत्री अपना भाषण देकर अपनी सीट की तरफ जा रहे थे, तभी उन्हें बताया गया कि किसानों को किट देनी है। जब वह खड़े हुए तो मंच से नीचे आने के लिए कहा गया। इस पर वह खफा हो गए और बोले ‘क्या मैं इधर-उधर होता रहूं’। अनुरोध करने पर उन्होंने सिर्फ दो किसानों को किट दी और चले गए। वहींं, मंच से उतरने के बाद गुस्साए मंत्री ने कुलपति से नाराजगी जताते हुए कहा कि न तो व्यवस्थाएं सही हैं और न ही संचालन। आगे से व्यवस्था में सुधार होना चाहिए।
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