{"_id":"60e5ff728ebc3eec6f32042f","slug":"bundelkhand-get-find-two-minister-jhansi-news-jhs198989477","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुंदेलखंड को मिले दो मंत्री, चुनावी समीकरण साधने की कोशिश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुंदेलखंड को मिले दो मंत्री, चुनावी समीकरण साधने की कोशिश
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार में न केवल उत्तरप्रदेश बल्कि बुंदेलखंड में भी चुनावी समीकरण साधने की पूरी कोशिश की गई है। जालौन-गरौठा क्षेत्र के पांच बार के सांसद भानु प्रताप वर्मा को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह देकर जहां यूपी के बुंदेलखंड में अनुसूचित जनजाति के वोट बैंक को साधने की कोशिश की गई है, वहीं मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र की टीकमगढ़ सांसद डा. वीरेंद्र कुमार को फिर से मंत्रिमंडल में लेने के फैसले में सोशल इंजीनियरिंग का गणित दिखाई देता है। बुधवार को हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में बुंदेलखंड क्षेत्र के दो सांसदों को मौका दिया गया है। जालौन - गरौठा संसदीय क्षेत्र से पांचवीं बार सांसद बने भानु प्रताप वर्मा को पहली बार मंत्री बनाया गया है, जबकि, मप्र की टीकमगढ़ सीट से सातवीं बार लोकसभा में पहुंचे डा. वीरेंद्र कुमार को भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। डा. वीरेंद्र इससे पहले भी केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। पहली मोदी सरकार में उन्हें महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री बनाया गया था।
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। इससे ठीक पहले किए गए केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में बुंदेलखंड को खास तरजीह देना इस बात का साफ संकेत दे रहा है कि भाजपा बुंदेलखंड के अपने अजेय दुर्गा को हरहाल में कायम रखना चाहती है। इस समय उत्तरप्रदेश के हिस्से में आने वाले बुंदेलखंड की चारों संसदीय सीटों पर भाजपा ही काबिज है। यूपी की सरकार बनाने में बुंदेलखंड की हमेशा से ही अहम भूमिका रही है, फिर चाहे वह बसपा की सरकार रही हो या फिर सपा की। अब भाजपा भी हरहाल में बुंदेलखंड को अपना अभेद्य दुर्ग बनाए रखने की कवायद में जुट गई है। इस समय बुंदेलखंड की विधानसभा की 19 सीटों पर भाजपा की ही नुमाइंदगी है। हाल ही में हुए जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भी सातों जनपदों की सीटें भाजपा के खाते में ही गईं हैं। इसी तरह मध्यप्रदेश के हिस्से में आने वाले बुंदेलखंड के जिलों में भी भाजपा का वर्चस्व है। भाजपा क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए खाद-पानी देने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रही है। अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं। इस लिहाज से केंद्रीय मंत्रिमंडल में बुंदेलखंड को दिए गए प्रतिनिधित्व को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चूंकि, टीकमगढ़ उत्तर प्रदेश की सीमाओं से सटा हुआ संसदीय क्षेत्र है। ऐसे में वहां होने वाली हर राजनीतिक गतिविधि का यहां भी असर होता है। खासतौर पर उप्र के हिस्से में आने वाला बुंदेलखंड क्षेत्र प्रभावित होता है।
अनुसूचित जाति के वोटों पर निशाना
झांसी। सवर्ण मतदाता भारतीय जनता पार्टी का पारंपरिक वोट बैंक रहा है। पिछले कुछ सालों के दौरान पिछड़ा वर्ग में भी जगह बनाने में भाजपा कामयाब रही है। लेकिन, अनुसूचित जाति वर्ग अभी भी भाजपा की कमजोरी बना हुआ है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए गए बुंदेलखंड के दोनों सांसद भानुप्रताप वर्मा व डा. वीरेंद्र कुमार अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि अनुसूचित जाति के वोटों पर भाजपा की नजर है। इसी के तहत भाजपा ने दोनों सांसदों को मंत्री बनाने का फैसला लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। इससे ठीक पहले किए गए केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में बुंदेलखंड को खास तरजीह देना इस बात का साफ संकेत दे रहा है कि भाजपा बुंदेलखंड के अपने अजेय दुर्गा को हरहाल में कायम रखना चाहती है। इस समय उत्तरप्रदेश के हिस्से में आने वाले बुंदेलखंड की चारों संसदीय सीटों पर भाजपा ही काबिज है। यूपी की सरकार बनाने में बुंदेलखंड की हमेशा से ही अहम भूमिका रही है, फिर चाहे वह बसपा की सरकार रही हो या फिर सपा की। अब भाजपा भी हरहाल में बुंदेलखंड को अपना अभेद्य दुर्ग बनाए रखने की कवायद में जुट गई है। इस समय बुंदेलखंड की विधानसभा की 19 सीटों पर भाजपा की ही नुमाइंदगी है। हाल ही में हुए जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भी सातों जनपदों की सीटें भाजपा के खाते में ही गईं हैं। इसी तरह मध्यप्रदेश के हिस्से में आने वाले बुंदेलखंड के जिलों में भी भाजपा का वर्चस्व है। भाजपा क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए खाद-पानी देने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रही है। अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं। इस लिहाज से केंद्रीय मंत्रिमंडल में बुंदेलखंड को दिए गए प्रतिनिधित्व को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चूंकि, टीकमगढ़ उत्तर प्रदेश की सीमाओं से सटा हुआ संसदीय क्षेत्र है। ऐसे में वहां होने वाली हर राजनीतिक गतिविधि का यहां भी असर होता है। खासतौर पर उप्र के हिस्से में आने वाला बुंदेलखंड क्षेत्र प्रभावित होता है।
विज्ञापन
अनुसूचित जाति के वोटों पर निशाना
झांसी। सवर्ण मतदाता भारतीय जनता पार्टी का पारंपरिक वोट बैंक रहा है। पिछले कुछ सालों के दौरान पिछड़ा वर्ग में भी जगह बनाने में भाजपा कामयाब रही है। लेकिन, अनुसूचित जाति वर्ग अभी भी भाजपा की कमजोरी बना हुआ है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए गए बुंदेलखंड के दोनों सांसद भानुप्रताप वर्मा व डा. वीरेंद्र कुमार अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि अनुसूचित जाति के वोटों पर भाजपा की नजर है। इसी के तहत भाजपा ने दोनों सांसदों को मंत्री बनाने का फैसला लिया है।
विज्ञापन