{"_id":"6127f6fa8ebc3e31e47f37f3","slug":"bu-will-do-research-on-the-poetry-of-lord-ram-and-shri-krishna-jhansi-news-jhs202828943","type":"story","status":"publish","title_hn":"भगवान राम और श्रीकृष्ण के काव्य पर शोध करेगा बीयू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भगवान राम और श्रीकृष्ण के काव्य पर शोध करेगा बीयू
विज्ञापन
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के काव्य पर शोध करेगा। इतिहास, साहित्य और पुराणों का गहराई से अध्ययन किया जाएगा। लोक साहित्य से भी अहम जानकारियां जुटाई जाएंगी। प्रदेश सरकार से बीयू को बुंदेलखंड साहित्य पर काम करने के निर्देश मिले हैं।
बुंदेलखंड साहित्य संगम के जरिए बीयू के हिंदी विभाग ने पौराणिक साहित्य में दर्ज कथाओं का वैज्ञानिक विश्लेषण पर काम शुरू कर दिया है। हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. मुन्ना तिवारी ने बताया कि बुंदेलखंड साहित्य में यहां की अस्मिता, जलजीवन, इतिहास, पौराणिक कथाएं व उनका महत्व क्या-क्या है, इस पर नए ढंग से शोध होगा। पूर्व विभागाध्यक्ष के मुताबिक इतिहास पढ़ने से पता चलता है कि भगवान श्रीराम वनवास के समय बुंदेलखंड से गुजरे। प्रभु किन-किन रास्तों से होकर निकले? इतिहास, साहित्य, पुराणों में से वास्तविकता क्या है? तीनों साक्ष्यों के आधार पर शोध किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का भी बुंदेलखंड से गहरा नाता रहा है। बुंदेलखंड के पन्ना के जंगल में पांडव फॉल है। जहां आज भी पानी रिसता है, वहां श्रीकृष्ण गोपनीय रूप से मिलने जाते थे। साहित्य में यात्राओं के चित्र कैसे वर्णित किए गए हैं आदि पर शोध होगा।
पांच साल की योजना, साहित्यकार, इतिहासकार भी जुड़ेंगे
श्रीराम और श्रीकृष्ण काव्य पर शोध के लिए बीयू ने पांच साल की योजना बनाई है। इसमें लगभग 100 छात्र-छात्राएं, 20 से अधिक शोधार्थी, चार-पांच शिक्षक शामिल हैं। इसके अलावा, साहित्यकार, इतिहासकार को भी जोड़ने की योजना है। साहित्यकारों की जयंती भी धूमधाम से मनाई जाएगी। लेख शिविरों का आयोजन होगा। ताकि, आज की पीढ़ी उनके बारे में जान सके। हिंदी और साहित्य से जुड़ाव और बढ़े।
विज्ञापन
कोर्स में भी हो रहा बदलाव
पूर्व विभागाध्यक्ष ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत 15 से 25 प्रतिशत कोर्स में क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़े विषयों को शामिल किया जाना है। ऐसे में बीयू हिंदी की पढ़ाई में बुंदेली को भी जोड़ेगा। साथ ही मैथिलीशरण गुप्त, सुभद्रा कुमारी चौहान, रामधारी सिंह दिनकर आदि राष्ट्रीय कवियों का संग्रह बनाकर पढ़ाया जाएगा। बीयू कैंपस ही नहीं लगभग 350 कॉलेजों के कोर्स में भी इन्हें जोड़ जाएगा।
विज्ञापन
बुंदेलखंड साहित्य संगम के जरिए बीयू के हिंदी विभाग ने पौराणिक साहित्य में दर्ज कथाओं का वैज्ञानिक विश्लेषण पर काम शुरू कर दिया है। हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. मुन्ना तिवारी ने बताया कि बुंदेलखंड साहित्य में यहां की अस्मिता, जलजीवन, इतिहास, पौराणिक कथाएं व उनका महत्व क्या-क्या है, इस पर नए ढंग से शोध होगा। पूर्व विभागाध्यक्ष के मुताबिक इतिहास पढ़ने से पता चलता है कि भगवान श्रीराम वनवास के समय बुंदेलखंड से गुजरे। प्रभु किन-किन रास्तों से होकर निकले? इतिहास, साहित्य, पुराणों में से वास्तविकता क्या है? तीनों साक्ष्यों के आधार पर शोध किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का भी बुंदेलखंड से गहरा नाता रहा है। बुंदेलखंड के पन्ना के जंगल में पांडव फॉल है। जहां आज भी पानी रिसता है, वहां श्रीकृष्ण गोपनीय रूप से मिलने जाते थे। साहित्य में यात्राओं के चित्र कैसे वर्णित किए गए हैं आदि पर शोध होगा।
विज्ञापन
पांच साल की योजना, साहित्यकार, इतिहासकार भी जुड़ेंगे
श्रीराम और श्रीकृष्ण काव्य पर शोध के लिए बीयू ने पांच साल की योजना बनाई है। इसमें लगभग 100 छात्र-छात्राएं, 20 से अधिक शोधार्थी, चार-पांच शिक्षक शामिल हैं। इसके अलावा, साहित्यकार, इतिहासकार को भी जोड़ने की योजना है। साहित्यकारों की जयंती भी धूमधाम से मनाई जाएगी। लेख शिविरों का आयोजन होगा। ताकि, आज की पीढ़ी उनके बारे में जान सके। हिंदी और साहित्य से जुड़ाव और बढ़े।
विज्ञापन
कोर्स में भी हो रहा बदलाव
पूर्व विभागाध्यक्ष ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत 15 से 25 प्रतिशत कोर्स में क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़े विषयों को शामिल किया जाना है। ऐसे में बीयू हिंदी की पढ़ाई में बुंदेली को भी जोड़ेगा। साथ ही मैथिलीशरण गुप्त, सुभद्रा कुमारी चौहान, रामधारी सिंह दिनकर आदि राष्ट्रीय कवियों का संग्रह बनाकर पढ़ाया जाएगा। बीयू कैंपस ही नहीं लगभग 350 कॉलेजों के कोर्स में भी इन्हें जोड़ जाएगा।