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वित्तीय अनियमितता पर बीयू ने जेई को किया निलंबित
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झांसी। बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी ने कार्य में लापरवाही, नियम विरुद्ध तरीके से काम करने, गलत पैमाइश और वित्तीय अनियमितता के मामले सामने आने पर अवर अभियंता को निलंबित कर दिया है। साथ ही शैक्षणिक परिसर में प्रवेश पर भी रोक लगा दी है। साथ ही सभी चार्ज सहायक कुलसचिव संपत्ति को सौंपने के आदेश दिए हैं।
कुलसचिव नारायण प्रसाद ने कार्यालय आदेश में नौ बिंदुओं का आरोप पत्र अवर अभियंता अंबरीश गौतम को थमाया है। कुलसचिव ने कहा है कि विश्वविद्यालय के आवासीय परिसर में सात छतों की मरम्मत की जांच के लिए कुलपति ने समिति गठित की थी। जेई की तरफ से समिति को अभिलेख नहीं दिए गए। समिति ने भौतिक रूप से स्थलीय परीक्षण में पाया कि कार्यादेश में अंकित चार कार्यों में दो ही कराए गए। जबकि, चार कार्यों को सत्यापित कर भुगतान करा लिया गया। स्थल और सत्यापित मांपों में अंतर मिला। इससे लगता है कि सात छतों की मरम्मत कार्यों में गंभीर वित्तीय अनियमितता की गई। पत्र में कहा गया कि कुलपति के आदेशों की अवहेलना करते हुए खुद के मौखिक आदेश से 59.60 लाख के कार्य करवाए। कार्यादेश जारी कराकर 47.43 लाख के कार्यों की पत्रावलियां उपलब्ध न होने के कारण ठेकेदारों का समय से भुगतान नहीं हो सका। स्पष्टीकरण के साथ अभिलेख मांगे तो कुलसचिव पर अनर्गल आरोप लगाते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग किया। कुलसचिव ने जेई को निलंबित करते हुए जांच के लिए कमेटी गठित करने की बात कही है।
ये भी हैं आरोप
- रसायन विज्ञान विभाग की प्रयोगशाला में पेंटिंग, एल्युमिनियम सेल्फ और प्लंबिंग के कार्य की माप पुस्तिका में सात से 11 नंबर पेज खाली मिले।
- कुछ महीने पहले बीयू के उच्च अधिकारियों को सार्वजनिक स्थानों पर दी गई गाली गलौज के ऑडियो वायरल हुए। जिसे अनुशासनहीनता माना गया।
- झलकारी बाई महिला छात्रावास और आईटीएचएम में टॉयलेट तुड़वा दिए गए। जब आदेश मांगा गया तो कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके।
...निलंबन से पहले जेई ने दिया धरना
एक तरफ बीयू में जेई के निलंबन का कार्यालय आदेश तैयार हो रहा था तो दूसरी तरफ अवर अभियंता ने प्रशासनिक भवन में धरना शुरू कर दिया। जेई के साथ कांग्रेसी भी धरने पर बैठ गए। इससे पहले जेई की तरफ से कुलपति को दिए गए प्रार्थनापत्र में कुलसचिव पर तमाम आरोप जड़ दिए गए। कहा कि उन्होंने मेरठ स्थित आवास पर कराए गए कार्यों का भुगतान नहीं किया है। इससे वह अपने बच्चों की स्कूल की फीस नहीं भर पा रहा है।
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कुलसचिव नारायण प्रसाद ने कार्यालय आदेश में नौ बिंदुओं का आरोप पत्र अवर अभियंता अंबरीश गौतम को थमाया है। कुलसचिव ने कहा है कि विश्वविद्यालय के आवासीय परिसर में सात छतों की मरम्मत की जांच के लिए कुलपति ने समिति गठित की थी। जेई की तरफ से समिति को अभिलेख नहीं दिए गए। समिति ने भौतिक रूप से स्थलीय परीक्षण में पाया कि कार्यादेश में अंकित चार कार्यों में दो ही कराए गए। जबकि, चार कार्यों को सत्यापित कर भुगतान करा लिया गया। स्थल और सत्यापित मांपों में अंतर मिला। इससे लगता है कि सात छतों की मरम्मत कार्यों में गंभीर वित्तीय अनियमितता की गई। पत्र में कहा गया कि कुलपति के आदेशों की अवहेलना करते हुए खुद के मौखिक आदेश से 59.60 लाख के कार्य करवाए। कार्यादेश जारी कराकर 47.43 लाख के कार्यों की पत्रावलियां उपलब्ध न होने के कारण ठेकेदारों का समय से भुगतान नहीं हो सका। स्पष्टीकरण के साथ अभिलेख मांगे तो कुलसचिव पर अनर्गल आरोप लगाते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग किया। कुलसचिव ने जेई को निलंबित करते हुए जांच के लिए कमेटी गठित करने की बात कही है।
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ये भी हैं आरोप
- रसायन विज्ञान विभाग की प्रयोगशाला में पेंटिंग, एल्युमिनियम सेल्फ और प्लंबिंग के कार्य की माप पुस्तिका में सात से 11 नंबर पेज खाली मिले।
- कुछ महीने पहले बीयू के उच्च अधिकारियों को सार्वजनिक स्थानों पर दी गई गाली गलौज के ऑडियो वायरल हुए। जिसे अनुशासनहीनता माना गया।
- झलकारी बाई महिला छात्रावास और आईटीएचएम में टॉयलेट तुड़वा दिए गए। जब आदेश मांगा गया तो कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके।
...निलंबन से पहले जेई ने दिया धरना
एक तरफ बीयू में जेई के निलंबन का कार्यालय आदेश तैयार हो रहा था तो दूसरी तरफ अवर अभियंता ने प्रशासनिक भवन में धरना शुरू कर दिया। जेई के साथ कांग्रेसी भी धरने पर बैठ गए। इससे पहले जेई की तरफ से कुलपति को दिए गए प्रार्थनापत्र में कुलसचिव पर तमाम आरोप जड़ दिए गए। कहा कि उन्होंने मेरठ स्थित आवास पर कराए गए कार्यों का भुगतान नहीं किया है। इससे वह अपने बच्चों की स्कूल की फीस नहीं भर पा रहा है।
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