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बीयू ने अंकतालिका में बढ़ाया ‘सुरक्षा कवच’
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बीयू ने अंकतालिका में बढ़ाया ‘सुरक्षा कवच’
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने अंकतालिका में ‘सुरक्षा कवच’ बढ़ा दिया है। अब अंकतालिका में हिंदी फॉन्ट का उपयोग किया गया है। इसके अलावा फॉन्ट के आकार व डिजाइन भी बदलाव हुआ है। कुछ जगहों पर शब्दों में हेरफेर भी किया गया है। यदि अब फर्जी अंकतालिका बनाई जाती है तो वह तुरंत पकड़ में आ जाएगी।
लगातार फर्जी अंकतालिका बनाने के मामले सामने आने पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर अविनाश चंद्र पांडेय ने पहली बार इसमें सिक्योरिटी फीचर डलवाए थे। अंकतालिका में काफी छोटे फॉन्ट, क्यूआर कोड, बार कोड, क्यिर इंक (सफेद स्याही से लिखा हुआ, जो अंकतालिका तिरछा करने पर दिखता है), विद्यार्थी की फोटो, विश्वविद्यालय का वाटर मार्क लोगो, अल्ट्रा वॉयलेट पैच (बच्चे का छुपा हुआ डाटा, जो सामान्य के बजाए अल्ट्रा वॉयलेट लाइट पर दिखता है), को-रिलेशन पैच (इसे डिकोडर से पढ़ते हैं) आदि डाला गया था। इसके बाद से फर्जी अंकतालिका बनाने के मामले एकदम से बंद हो गए। ऐसी अंकतालिका छापने वाली देश में गिनी चुनी ही मशीनें हैं। इसलिए यदि कोई फर्जी अंकतालिका बनाता भी है, तो उसे तुरंत पकड़ लिया जाएगा।
इसी क्रम में अब बीयू प्रशासन ने अंकतालिका में कुछ और सिक्योरिटी फीचर (सुरक्षा कवच) डाले हैं। अब अंकतालिका में हिंदी फॉन्ट का उपयोग किया गया है। इसके अलावा डाटा छापने में भी फॉन्ट का आकार और डिजाइन बदला है। ये बीयू की तकनीकी टीम ने खुद तैयार किया है। इसके अलावा कुछ जगहों पर शब्दों में ऐसा हेरफेर किया गया है, जिसे पकड़ना बहुत मुश्किल है।
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चार गुना कम कीमत में छप रही
पिछले साल तक बीयू दिल्ली से अंकतालिका छपवाता था। इसलिए प्रति अंकतालिका का मूल्य 29 रुपये पढ़ता था। हालांकि, तक नॉन टियरेबल पेपर पर अंकतालिका छपती थी। पिछले साल बीयू ने डेढ़ करोड़ की छपाई मशीन खरीदी, इसके बाद इस साल से कैंपस में ही अंकतालिका छपने लगी हैं। अब एक अंकतालिका की कीमत चार गुना घटकर सात रुपये हो गई है। इसकी वजह पार्चमेंट पेपर पर प्रिंट होना भी है। बताया गया कि हर साल लगभग 70 हजार अंकतालिका और 50 हजार चार्ट छपते हैं, ऐसे में अब तक 1.25 करोड़ रुपये छपाई में खर्च होते थे। अब करीब 50 लाख रुपये में ये छप जाती हैं।
छात्रों को होगी सहूलियत
कैंपस में अंकतालिका छपने से विद्यार्थियों को काफी सहूलियत होगी। छात्र के नाम, अंक, फोटो आदि में किसी भी प्रकार का संशोधन होने पर एक सप्ताह में बदली हुई अंकतालिका छपकर मिलेगी। अभी तक दूसरी अंकतालिका छपने में तीन महीने से अधिक लग जाते थे। इससे विद्यार्थी परेशान होते थे। कभी प्लेसमेंट होने के बाद नौकरी संकट में पड़ जाती थी, तो कभी अगली कक्षा में प्रवेश लेने में समस्या आ जाती थी।
वर्जन..
अंकतालिका में सिक्योरिटी फीचर और बढ़ाए गए हैं। अब फॉन्ट में परिवर्तन के अलावा कुछ जगहों पर शब्दों में हेरफेर किया गया है। इससे कोई भी फर्जी अंकतालिका नहीं बना पाएगा। - प्रो. जेवी वैशंपायन, कुलपति, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय।
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने अंकतालिका में ‘सुरक्षा कवच’ बढ़ा दिया है। अब अंकतालिका में हिंदी फॉन्ट का उपयोग किया गया है। इसके अलावा फॉन्ट के आकार व डिजाइन भी बदलाव हुआ है। कुछ जगहों पर शब्दों में हेरफेर भी किया गया है। यदि अब फर्जी अंकतालिका बनाई जाती है तो वह तुरंत पकड़ में आ जाएगी।
लगातार फर्जी अंकतालिका बनाने के मामले सामने आने पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर अविनाश चंद्र पांडेय ने पहली बार इसमें सिक्योरिटी फीचर डलवाए थे। अंकतालिका में काफी छोटे फॉन्ट, क्यूआर कोड, बार कोड, क्यिर इंक (सफेद स्याही से लिखा हुआ, जो अंकतालिका तिरछा करने पर दिखता है), विद्यार्थी की फोटो, विश्वविद्यालय का वाटर मार्क लोगो, अल्ट्रा वॉयलेट पैच (बच्चे का छुपा हुआ डाटा, जो सामान्य के बजाए अल्ट्रा वॉयलेट लाइट पर दिखता है), को-रिलेशन पैच (इसे डिकोडर से पढ़ते हैं) आदि डाला गया था। इसके बाद से फर्जी अंकतालिका बनाने के मामले एकदम से बंद हो गए। ऐसी अंकतालिका छापने वाली देश में गिनी चुनी ही मशीनें हैं। इसलिए यदि कोई फर्जी अंकतालिका बनाता भी है, तो उसे तुरंत पकड़ लिया जाएगा।
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इसी क्रम में अब बीयू प्रशासन ने अंकतालिका में कुछ और सिक्योरिटी फीचर (सुरक्षा कवच) डाले हैं। अब अंकतालिका में हिंदी फॉन्ट का उपयोग किया गया है। इसके अलावा डाटा छापने में भी फॉन्ट का आकार और डिजाइन बदला है। ये बीयू की तकनीकी टीम ने खुद तैयार किया है। इसके अलावा कुछ जगहों पर शब्दों में ऐसा हेरफेर किया गया है, जिसे पकड़ना बहुत मुश्किल है।
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चार गुना कम कीमत में छप रही
पिछले साल तक बीयू दिल्ली से अंकतालिका छपवाता था। इसलिए प्रति अंकतालिका का मूल्य 29 रुपये पढ़ता था। हालांकि, तक नॉन टियरेबल पेपर पर अंकतालिका छपती थी। पिछले साल बीयू ने डेढ़ करोड़ की छपाई मशीन खरीदी, इसके बाद इस साल से कैंपस में ही अंकतालिका छपने लगी हैं। अब एक अंकतालिका की कीमत चार गुना घटकर सात रुपये हो गई है। इसकी वजह पार्चमेंट पेपर पर प्रिंट होना भी है। बताया गया कि हर साल लगभग 70 हजार अंकतालिका और 50 हजार चार्ट छपते हैं, ऐसे में अब तक 1.25 करोड़ रुपये छपाई में खर्च होते थे। अब करीब 50 लाख रुपये में ये छप जाती हैं।
छात्रों को होगी सहूलियत
कैंपस में अंकतालिका छपने से विद्यार्थियों को काफी सहूलियत होगी। छात्र के नाम, अंक, फोटो आदि में किसी भी प्रकार का संशोधन होने पर एक सप्ताह में बदली हुई अंकतालिका छपकर मिलेगी। अभी तक दूसरी अंकतालिका छपने में तीन महीने से अधिक लग जाते थे। इससे विद्यार्थी परेशान होते थे। कभी प्लेसमेंट होने के बाद नौकरी संकट में पड़ जाती थी, तो कभी अगली कक्षा में प्रवेश लेने में समस्या आ जाती थी।
वर्जन..
अंकतालिका में सिक्योरिटी फीचर और बढ़ाए गए हैं। अब फॉन्ट में परिवर्तन के अलावा कुछ जगहों पर शब्दों में हेरफेर किया गया है। इससे कोई भी फर्जी अंकतालिका नहीं बना पाएगा। - प्रो. जेवी वैशंपायन, कुलपति, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय।