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बीयू : प्रशासनिक अधिकारी ने लगाए प्रताड़ित करने के आरोप
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अनुसूचित जाति की होने और मूलभूत समस्या उठाने पर बीयू प्रशासन प्रताड़ित कर रहा है। 70 बार कुलपति व कुलसचिव से मिलने गई मगर चार-पांच बार ही मौका मिला। शासन प्रमोशन की सूची मांग रहा है मगर नाम नहीं भेजा जा रहा है। यह आरोप बीयू की प्रशासनिक अधिकारी डॉ. पुष्पा गौतम ने लगाए हैं, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
वीडियो में प्रशासनिक अधिकारी बीयू परिसर स्थित डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़कर आरोप लगा रही हैं। वह कह रही हैं कि राज्यपाल, मुख्यमंत्री, कार्यपरिषद सदस्यों के नाम कई बार प्रार्थनापत्र कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय और कुलसचिव विनय कुमार सिंह दिए हैं, मगर कुछ नहीं हो रहा है। प्रो. डीके भट्ट बीयू के कई अहम पद (संपत्ति अधिकारी, मेंटेनेंस विभाग, इंजीनियरिंग विभाग के निदेशक, बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा में कोऑर्डिनेटर, आउटसोर्स भर्ती, फूड टेक विभागाध्यक्ष आदि) पर कार्यरत हैं।
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आरोप लगाया कि डॉ. भट्ट के नहीं चाहने की वजह से ही बीयू प्रशासन प्रमोशन नहीं कर रहा है। शासन की ओर से प्रमोशन के लिए मांगी जा रही सूची में मेरा नाम नहीं भेजा जा रहा है। जनप्रतिनिधियों से अपील करते हुए कहा मेरी कई और गंभीर समस्याएं हैं। मैंने मूलभूत समस्याओं को उठाया (जैसे वाटर कूलर का एक-दो माह में खराब होना) जिसकी वजह से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया है। अंत में तथागत बुद्ध और बाबा साहब से बीयू को जातिवाद से मुक्त होने की प्रार्थना की। कहा, मैं अनुसूचित जाति की हूं, इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है।
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वहीं, कुलसचिव विनय कुमार सिंह का कहना है कि शिक्षक से प्रशासनिक कार्य लेने का अधिकार कुलपति के पास है, जिसके तहत डॉ. भट्ट को काम दिया गया है। रही बात प्रमोशन के लिए नाम नहीं भेजने की तो स्थायी अधीक्षक पद होने के बाद ही नाम भेजा जाता है। बीयू में अधीक्षक पद पर छह-सात कर्मी कार्यरत हैं मगर अधीक्षक पद स्थायी नहीं होने की वजह से नाम नहीं भेज रहे।