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Jhansi News: बुंदेलखंड की सभी सीटें हार चुकी बसपा में अब बड़े बदलाव की तैयारी
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नगेश शर्मा
झांसी। लोकसभा चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद बुंदेलखंड के चारों जिलों में बसपा के संगठन में व्यापक फेरबदल की तैयारी चल रही है। इसका कारण प्रत्याशियों द्वारा बेहतर प्रदर्शन न करना बताया जा रहा है। चर्चा है कि बसपा सुप्रीमो को स्थानीय स्तर से दी गई जानकारी के बाद पिछले एक महीने में संगठन में कुछ फेरबदल भी किए गए। इसका अच्छा प्रभाव कार्यकर्ताओं पर नहीं पड़ा। बसपा का कैडर वोट इंडिया गठबंधन में चला गया, जिससे जहां बसपा को नुकसान हुआ, वहीं गठबंधन प्रत्याशी को फायदा हुआ। सबसे कम वोट झांसी सीट के प्रत्याशी को मिले। अब महत्वपूर्ण पदों पर कैडर के वरिष्ठ नेताओं को बैठाने की चर्चा चल रही है।
लोकसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद से ही प्रदेशभर में बसपा संगठन में उथल-पुथल मच गई थी। कई लोकसभा सीटों पर घोषित प्रत्याशी बदले गए। मंडल प्रभारी और जिलाध्यक्ष पदोें पर भी फेरबदल किए गए। बुंदेलखंड भी इससे अछूता नहीं रहा। झांसी-ललितपुर लोकसभा सीट की बात करें तो यहां जातिगत समीकरण के अनुसार राकेश कुशवाहा एडवोकेट को टिकट दिया गया, लेकिन आठ दिन बाद ही प्रत्याशी को पार्टी से बाहर कर दिया गया। इसी दौरान बुंदेलखंड प्रभारी लाला राम अहिरवार, मंडल प्रभारी कैलाशपाल, मंडल प्रभारी बीडी फुले को पदों से हटा दिया गया। झांसी जिलाध्यक्ष जयपाल अहिरवार, महोबा जिलाध्यक्ष राजेश वर्मा, हमीरपुर जिलाध्यक्ष शिवकरन वर्मा को पार्टी से बाहर कर दिया गया। बुंदेलखंड प्रभारी के पद पर मुकेश अहिरवार, मंडल प्रभारी के पदों पर ब्रजेश जाटव, जगजीवन अहिरवार, श्यामपाल को तैनात किया गया। बाद में कैलाशपाल को मंडल प्रभारी बना दिया। इस फेरबदल का कार्यकर्ताओं में अच्छा संदेश नहीं गया। इसका परिणाम लोकसभा चुनाव में देखने को मिला।
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झांसी के प्रत्याशी को मिले सबसे कम वोट
बुंदेलखंड की चारों सीटों पर बसपा प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे हैं। सबसे ज्यादा 245745 वोट बांदा सीट पर मयंक द्विवेदी को मिले हैं। इनसे कम 100248 वोट जालौन सीट पर सुरेश चंद्र गौतम को मिले हैं। इनसे कम 94698 वोट हमीरपुर सीट पर निर्दोष कुमार दीक्षित को मिले हैं। सबसे कम 63192 वोट झांसी सीट पर रवि प्रकाश कुशवाहा को मिले हैं।
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बुंदेलखंड में आकाश आनंद के प्रभाव को नहीं भुना सकी बसपा
बहुजन समाज पार्टी के कद्दावर नेता आकाश आनंद का बुंदेलखंड के युवाओं पर खासा प्रभाव है। इसी के चलते लोकसभा चुनाव में हमीरपुर क्षेत्र में एक मई को आकाश आनंद की जनसभा तय की गई थी, जिसमें बुंदेलखंड के सभी जिलों के कार्यकर्ताओं को शामिल होना था। लेकिन यह जनसभा निरस्त कर दी गई। पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं पर इसका अच्छा संदेश नहीं गया। इस तरह आकाश आनंद के बुंदेलखंड में प्रभाव को पार्टी भुना नहीं सकी।
बयान-- --
बसपा प्रत्याशियों की हार की समीक्षा चल रही है। पार्टी सुप्रीमो मायावती जल्द ही समीक्षा बैठक करेंगी, जिसमें महत्वपूर्ण निर्णय होने की उम्मीद है। संविधान बचाओ का मुद्दा उठाकर इंडिया गठबंधन ने लाभ लिया है। जबकि इंडिया गठबंधन में शामिल दल संविधान के हितैषी कभी नहीं रहे। यह बात जनता तक पहुंचाने में बसपा नेताओं को पर्याप्त समय नहीं मिला, जिसका खामियाजा लोकसभा चुनाव में उठाया है।
- मुकेश अहिरवार, बुंदेलखंड प्रभारी, बसपा
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झांसी। लोकसभा चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद बुंदेलखंड के चारों जिलों में बसपा के संगठन में व्यापक फेरबदल की तैयारी चल रही है। इसका कारण प्रत्याशियों द्वारा बेहतर प्रदर्शन न करना बताया जा रहा है। चर्चा है कि बसपा सुप्रीमो को स्थानीय स्तर से दी गई जानकारी के बाद पिछले एक महीने में संगठन में कुछ फेरबदल भी किए गए। इसका अच्छा प्रभाव कार्यकर्ताओं पर नहीं पड़ा। बसपा का कैडर वोट इंडिया गठबंधन में चला गया, जिससे जहां बसपा को नुकसान हुआ, वहीं गठबंधन प्रत्याशी को फायदा हुआ। सबसे कम वोट झांसी सीट के प्रत्याशी को मिले। अब महत्वपूर्ण पदों पर कैडर के वरिष्ठ नेताओं को बैठाने की चर्चा चल रही है।
लोकसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद से ही प्रदेशभर में बसपा संगठन में उथल-पुथल मच गई थी। कई लोकसभा सीटों पर घोषित प्रत्याशी बदले गए। मंडल प्रभारी और जिलाध्यक्ष पदोें पर भी फेरबदल किए गए। बुंदेलखंड भी इससे अछूता नहीं रहा। झांसी-ललितपुर लोकसभा सीट की बात करें तो यहां जातिगत समीकरण के अनुसार राकेश कुशवाहा एडवोकेट को टिकट दिया गया, लेकिन आठ दिन बाद ही प्रत्याशी को पार्टी से बाहर कर दिया गया। इसी दौरान बुंदेलखंड प्रभारी लाला राम अहिरवार, मंडल प्रभारी कैलाशपाल, मंडल प्रभारी बीडी फुले को पदों से हटा दिया गया। झांसी जिलाध्यक्ष जयपाल अहिरवार, महोबा जिलाध्यक्ष राजेश वर्मा, हमीरपुर जिलाध्यक्ष शिवकरन वर्मा को पार्टी से बाहर कर दिया गया। बुंदेलखंड प्रभारी के पद पर मुकेश अहिरवार, मंडल प्रभारी के पदों पर ब्रजेश जाटव, जगजीवन अहिरवार, श्यामपाल को तैनात किया गया। बाद में कैलाशपाल को मंडल प्रभारी बना दिया। इस फेरबदल का कार्यकर्ताओं में अच्छा संदेश नहीं गया। इसका परिणाम लोकसभा चुनाव में देखने को मिला।
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झांसी के प्रत्याशी को मिले सबसे कम वोट
बुंदेलखंड की चारों सीटों पर बसपा प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे हैं। सबसे ज्यादा 245745 वोट बांदा सीट पर मयंक द्विवेदी को मिले हैं। इनसे कम 100248 वोट जालौन सीट पर सुरेश चंद्र गौतम को मिले हैं। इनसे कम 94698 वोट हमीरपुर सीट पर निर्दोष कुमार दीक्षित को मिले हैं। सबसे कम 63192 वोट झांसी सीट पर रवि प्रकाश कुशवाहा को मिले हैं।
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बुंदेलखंड में आकाश आनंद के प्रभाव को नहीं भुना सकी बसपा
बहुजन समाज पार्टी के कद्दावर नेता आकाश आनंद का बुंदेलखंड के युवाओं पर खासा प्रभाव है। इसी के चलते लोकसभा चुनाव में हमीरपुर क्षेत्र में एक मई को आकाश आनंद की जनसभा तय की गई थी, जिसमें बुंदेलखंड के सभी जिलों के कार्यकर्ताओं को शामिल होना था। लेकिन यह जनसभा निरस्त कर दी गई। पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं पर इसका अच्छा संदेश नहीं गया। इस तरह आकाश आनंद के बुंदेलखंड में प्रभाव को पार्टी भुना नहीं सकी।
बयान
बसपा प्रत्याशियों की हार की समीक्षा चल रही है। पार्टी सुप्रीमो मायावती जल्द ही समीक्षा बैठक करेंगी, जिसमें महत्वपूर्ण निर्णय होने की उम्मीद है। संविधान बचाओ का मुद्दा उठाकर इंडिया गठबंधन ने लाभ लिया है। जबकि इंडिया गठबंधन में शामिल दल संविधान के हितैषी कभी नहीं रहे। यह बात जनता तक पहुंचाने में बसपा नेताओं को पर्याप्त समय नहीं मिला, जिसका खामियाजा लोकसभा चुनाव में उठाया है।
- मुकेश अहिरवार, बुंदेलखंड प्रभारी, बसपा