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Jhansi News: बोनस का फेर... अब झांसी का गेहूं भी चला मध्यप्रदेश
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- झांसी के क्रय केंद्रों पर पसरा सन्नाटा, अफसर परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। पेट्रोल और डीजल के बाद अब झांसी का गेहूं का भी मध्यप्रदेश चल दिया है। मध्यप्रदेश में गेहूं बेचने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के साथ प्रति क्विंटल मिल रहे 125 रुपये के बोनस के चलते झांसी के किसानों ने यूपी के क्रय केंद्रों से दूरी बना ली है। मोंठ, मऊरानीपुर, चिरगांव समेत सीमावर्ती गांवों से रोज बड़ी संख्या में किसान डबरा, निवाड़ी, टीकमगढ़, हरपालपुर, जतारा मंडी पहुंचकर गेहूं बेच रहे हैं। उधर, मध्य प्रदेश में गेहूं जाने से यूपी के खाद्य विभाग के अफसरों की नींद उड़ गई है।
सरकारी गोदामों में गेहूं न के बराबर है। सरकार अधिक से अधिक गेहूं खरीदना चाहती है। झांसी मंडल के 71 क्रय केंद्रों पर 3.95 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य तय किया गया है। इसलिए एक अप्रैल से खरीद शुरू करने के बजाय सरकार ने मार्च से ही केंद्र खोल दिए, लेकिन केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। वहीं झांसी के समीपवर्ती इलाकों से गेहूं मध्य प्रदेश की मंडी में लेकर किसान पहुंच रहे हैं।
मध्य प्रदेश ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन अध्यक्ष मनसुख तेवतिया का कहना है यहां किसानों को 125 रुपये अतिरिक्त प्रति क्विंटल दिए जा रहे हैं। ऐसे में उनको समर्थन मूल्य 2275 रुपये प्रति क्विंटल मिलाकर कुल 2400 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान मिल रहा है। इसके चलते डबरा, हरपालपुर, भिंड समेत अन्य मंडियों में झांसी से किसान गेहूं बेच रहे हैं।
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मध्य प्रदेश की अनाज मंडियों का भी यही हाल है। डबरा, हरपालपुर में पुराना गेंहू 2450 रुपये जबकि नया गेंहू 2325 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। जबकि झांसी में किसानों को 2200 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक दाम नहीं मिल रहा है। इस वजह से भी किसान मध्य प्रदेश जा रहे हैं। किसानों के मध्य प्रदेश जाने की वजह से करीब एक माह से झांसी में खुले क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद जोर नहीं पकड़ पा रही है। खरीद तेज न होने से खाद्य विभाग के अफसर भी परेशान हैं। हालांकि आरएफसी चंद्रभान यादव का कहना है अभी नई फसल बाजार में आनी शुरू हुई है। समय के साथ गेहूं खरीद बढ़ेगी। किसानों से गांव में जाकर संपर्क किया जा रहा है।
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इनसेट
मंडल में गेहूं खरीद का लक्ष्य
झांसी- 1.32 लाख मीट्रिक टन
ललितपुर- 1.28 लाख मीट्रिक टन
उरई- 1.32 लाख मीट्रिक टन
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कारोबारियों के खरीद करने पर रोक
मंडी कारोबारी, फ्लोर मिल संचालक एवं एफपीओ को सरकारी गेहूं खरीद में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। कारोबारियों का कहना है मंडी की ओर से इस बार उनको सरकारी खरीद कराने में मदद करने के लिए कहा गया है। कारोबारियों पर अंकुश से इस बार गेहूं के दाम के एमएसपी से अधिक होने की गुंजाइश काफी कम हो गई। बता दें, पिछले वर्ष गेहूं की मांग काफी अधिक होने से एमएसपी से अधिक दाम पर गेहूं बाजार में बिका था। इसके चलते सरकारी खरीद पर्याप्त नहीं हो सकी थी।
इनसेट
केंद्र सरकार की टीम ने खरीद केंद्रों का लिया जायजा
केंद्र सरकार की टीम ने बृहस्पतिवार को झांसी पहुंचकर गेहूं खरीद का जायजा लिया। एफसीआई निदेशक डीके शुक्ला की अगुआई में पहुंची टीम ने मोंठ, गुरसराय एवं चिरगांव में पहुंचकर सरकारी क्रय केंद्रों का हाल जाना। इस दौरान टीम के सदस्यों ने यहां मौजूद किसानों एवं अन्य कर्मचारियों से गेहूं खरीद की प्रक्रिया के बारे में बात की। इस दौरान आरएफसी चंद्रभान यादव समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। पेट्रोल और डीजल के बाद अब झांसी का गेहूं का भी मध्यप्रदेश चल दिया है। मध्यप्रदेश में गेहूं बेचने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के साथ प्रति क्विंटल मिल रहे 125 रुपये के बोनस के चलते झांसी के किसानों ने यूपी के क्रय केंद्रों से दूरी बना ली है। मोंठ, मऊरानीपुर, चिरगांव समेत सीमावर्ती गांवों से रोज बड़ी संख्या में किसान डबरा, निवाड़ी, टीकमगढ़, हरपालपुर, जतारा मंडी पहुंचकर गेहूं बेच रहे हैं। उधर, मध्य प्रदेश में गेहूं जाने से यूपी के खाद्य विभाग के अफसरों की नींद उड़ गई है।
सरकारी गोदामों में गेहूं न के बराबर है। सरकार अधिक से अधिक गेहूं खरीदना चाहती है। झांसी मंडल के 71 क्रय केंद्रों पर 3.95 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य तय किया गया है। इसलिए एक अप्रैल से खरीद शुरू करने के बजाय सरकार ने मार्च से ही केंद्र खोल दिए, लेकिन केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। वहीं झांसी के समीपवर्ती इलाकों से गेहूं मध्य प्रदेश की मंडी में लेकर किसान पहुंच रहे हैं।
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मध्य प्रदेश ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन अध्यक्ष मनसुख तेवतिया का कहना है यहां किसानों को 125 रुपये अतिरिक्त प्रति क्विंटल दिए जा रहे हैं। ऐसे में उनको समर्थन मूल्य 2275 रुपये प्रति क्विंटल मिलाकर कुल 2400 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान मिल रहा है। इसके चलते डबरा, हरपालपुर, भिंड समेत अन्य मंडियों में झांसी से किसान गेहूं बेच रहे हैं।
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मध्य प्रदेश की अनाज मंडियों का भी यही हाल है। डबरा, हरपालपुर में पुराना गेंहू 2450 रुपये जबकि नया गेंहू 2325 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। जबकि झांसी में किसानों को 2200 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक दाम नहीं मिल रहा है। इस वजह से भी किसान मध्य प्रदेश जा रहे हैं। किसानों के मध्य प्रदेश जाने की वजह से करीब एक माह से झांसी में खुले क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद जोर नहीं पकड़ पा रही है। खरीद तेज न होने से खाद्य विभाग के अफसर भी परेशान हैं। हालांकि आरएफसी चंद्रभान यादव का कहना है अभी नई फसल बाजार में आनी शुरू हुई है। समय के साथ गेहूं खरीद बढ़ेगी। किसानों से गांव में जाकर संपर्क किया जा रहा है।
इनसेट
मंडल में गेहूं खरीद का लक्ष्य
झांसी- 1.32 लाख मीट्रिक टन
ललितपुर- 1.28 लाख मीट्रिक टन
उरई- 1.32 लाख मीट्रिक टन
कारोबारियों के खरीद करने पर रोक
मंडी कारोबारी, फ्लोर मिल संचालक एवं एफपीओ को सरकारी गेहूं खरीद में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। कारोबारियों का कहना है मंडी की ओर से इस बार उनको सरकारी खरीद कराने में मदद करने के लिए कहा गया है। कारोबारियों पर अंकुश से इस बार गेहूं के दाम के एमएसपी से अधिक होने की गुंजाइश काफी कम हो गई। बता दें, पिछले वर्ष गेहूं की मांग काफी अधिक होने से एमएसपी से अधिक दाम पर गेहूं बाजार में बिका था। इसके चलते सरकारी खरीद पर्याप्त नहीं हो सकी थी।
इनसेट
केंद्र सरकार की टीम ने खरीद केंद्रों का लिया जायजा
केंद्र सरकार की टीम ने बृहस्पतिवार को झांसी पहुंचकर गेहूं खरीद का जायजा लिया। एफसीआई निदेशक डीके शुक्ला की अगुआई में पहुंची टीम ने मोंठ, गुरसराय एवं चिरगांव में पहुंचकर सरकारी क्रय केंद्रों का हाल जाना। इस दौरान टीम के सदस्यों ने यहां मौजूद किसानों एवं अन्य कर्मचारियों से गेहूं खरीद की प्रक्रिया के बारे में बात की। इस दौरान आरएफसी चंद्रभान यादव समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।