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भाजपा के बुने चक्रव्यूह में फंसे सपाई

Sun, 27 Jun 2021 01:03 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 27 Jun 2021 01:03 AM IST
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BJP Chakraview catch SP
झांसी। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को लेकर भाजपाइयों द्वारा रचे गए सियासी चक्रव्यूह को तोड़ने में सपाई पूरी तरह से नाकाम रहे। हालात ये रहे कि आमने-सामने की टक्कर तो दूर दूसरे नंबर की लड़ाई में भी वह खड़े नहीं रह पाए। और तो और एक दिन पहले तक जीत का दावा करने वाले सपाई पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी का नामांकन पत्र तक दाखिल नहीं करा पाए। जबकि, भाजपा ने चुनाव की घोषणा होने के साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट हथियाने का तानाबाना बुनना शुरू कर दिया था और उसमें कामयाब रही।
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झांसी जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर पिछले पांच साल से समाजवादी पार्टी काबिज थी। यहां तक कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद बुंदेलखंड के सभी जिला पंचायतों में फेरबदल हो गया था, लेकिन झांसी इसमें अपवाद बनी हुई थी। यहां सपा की प्रतिमा यादव अपना कार्यकाल पूरा करने में सफल रहीं, लेकिन इस चुनाव में भाजपा कोई भी मौका हाथ से नहीं गंवाने देना चाहती थी। इसकी तैयारियां शुरूआत से ही कर दीं गईं थीं। जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट अनुसूचित जाति के खाते में जाने के साथ ही भाजपा ने पार्टी के पुराने नेता और पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. धन्नूलाल गौतम के बेटे पवन कुमार गौतम को भरोसा सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया था। जबकि, पवन का ग्रामीण राजनीति से पहले कोई गहरा जुड़ाव नहीं था। पवन के जिला पंचायत सदस्य बनते ही उन्हें अध्यक्ष पद का उम्मीदवार भी माना जाने लगा था। हालांकि, जिला पंचायत के 24 सदस्यों में से भाजपा के सिर्फ नौ ही चुनकर आए, लेकिन चुनाव परिणाम सामने आने के बाद भाजपा ने निर्दलियों और अन्य दलों के सदस्यों पर डोरे डालना शुरू कर दिए थे। इसी के बलबूते पर भाजपाई चौदह सदस्यों का समर्थन हासिल होने का दावा कर रहे थे।
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वहीं, सपा खेमा भाजपा की इस रणनीति को समझने में गच्चा खा गया और शुरू से ही लचर रवैया अपनाए रहा। दावेदार होने के बाद भी सपा सभी सीटों पर अपने अधिकृत प्रत्याशी नहीं उतार पाई। कई सीटों पर सपाई ही आमने-सामने की स्थिति में रहे। इसका नतीजा रहा कि जिला पंचायत के सदन में सपा के सिर्फ पांच अधिकृत प्रत्याशी ही चुनकर पहुंचे। हालांकि, बाद में तीन सदस्यों का समर्थन हासिल और कर लिया गया था, लेकिन ये संख्या भी बहुमत के आंकड़े से काफी दूर थी। अध्यक्ष पद के प्रत्याशी चयन में भी सपा में लंबे समय तक असमंजस की स्थिति में बनी रही। सपा पहले चुरारा सीट से जिला पंचायत सदस्य हेमंत सेठ पर दांव लगाने वाली थी, लेकिन उन्होंने अपने कदम वापस खींच लिए। बाद में बंगराधवा से सदस्य आशा गौतम को सपा ने मैदान में उतारा और उनका प्रस्तावक हेमंत सेठ को बनाया, जो नामांकन के दौरान अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा सके। इससे भाजपा अपने प्रत्याशी का निर्विरोध निर्वाचन कराने में आसानी से सफल हो गई।
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