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आखिर यह लोग कैसे मरे थे अब कोई जान नहीं पाएगा

Sun, 01 Dec 2019 01:15 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 01 Dec 2019 01:15 AM IST
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bisra jannch stopped
झांसी। इनमें किसी का शव सड़क किनारे मिला था तो किसी का घर में ही। शरीर पर कोई जाहिराना चोट का निशान भी नहीं था। यूं कहिए कि मौत की वजह साफ नहीं थी। पोस्टमार्टम में भी कुछ पता नहीं चला, लिहाजा मृत्यु का कारण जानने के लिए विसरा ( गुर्दे का कुछ हिस्सा, किडनी का पार्ट, आंत का टुकड़ा) सुरक्षित रख लिया गया था। जिसे प्रयोगशाला को भेजा जाना था लेकिन पोस्टमार्टम की कोठरी में रखे-रखे ही विसरे नष्ट हो गए। रिकार्ड समाप्त हो गया। ऐसे एक नहीं बल्कि 22000 विसरे हैं।
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महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज में स्थित पोस्टमार्टम हाउस में बनी एक कोठरी में 1994 से विसरा रखे हैं। विसरा की संख्या भी एक लाख से ऊपर होगी। विसरा को जार में रखा जाता है और हर जार पर चिट लगा दी जाती है जिससे पता चल सके कि किसका विसरा है। लेकिन बदहाल व्यवस्था के कारण विसरा का पूरा रिकार्ड ही नष्ट हो गया है। जो पुराने जार हैं उनके ऊपर लगाई गई चिट भी गायब हो चुकी है। पिछले सात साल के भीतर 990 विसरा जांच के लिए आगरा प्रयोगशाला को भेजे गए थे। इनमें केवल 292 की ही रिपोर्ट आई है। इन सभी में मौत की वजह जहर आई। अब बाकी लोग कैसे मरे यह अब तक साफ नहीं हो सका है। वहीं एक बड़ी संख्या ऐसे विसरा की भी जो इस कोठरी में रखे रखे ही नष्ट हो गया है।
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बोतलों से जानकारी ही गायब
यहां सालों से रखे विसरा की बोतलों पर यह जानकारी तक नहीं है कि ये किसका था? किस कारण से सुरक्षित किया गया था? किस चिकित्सक ने सुरक्षित किया था? लंबा समय बीत जाने के बाद भी इन बोतलों को इसलिए नहीं हटाया जा रहा है कि यह सरकारी संपत्ति है। लिहाजा पोस्टमार्टम हाउस के कमरों में ढेर लगता जा रहा है।
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केवल 2015 के बाद का ही रिकार्ड सुरक्षित है
वर्ष 2015 से बोतलों पर मृतक का नाम और मौत का प्रारंभिक कारण तो दर्ज है, लेकिन उसके पहले की विसरा वाली जो भी बोतल रखी हैं उन पर कोई भी जानकारी नहीं है। सालों बाद भी लैब नहीं भेजने के कारण शायद अब ये विसरा जांच के लायक भी नहीं बचे हैं।
292 लोगों की जहर खाने से मौैत
दस सालों के भीतर संदिग्ध कारणों के चलते 9,652 लोगों की मौत हुई। इनमें 990 लोगों का विसरा सुरक्षित कर जांच को भेजा गया। इनमें 292 लोगों की मौत का कारण जहर आया। इसके अलावा, अन्य लोगों की मौत की वजह दूसरी रही।
यह होता है विसरा
विसरा मेें मृतक के गुर्दे का कुछ हिस्सा, किडनी का कुछ हिस्सा, आंत का कुछ हिस्सा और पेट की थाली रखी जाती है। इन्हें नमक के संतृप्त घोल में शीशे के पॉट में सील करके रखा जाता है।
तीस दिन में भेजना चाहिए
पुलिस केस में पोस्टमार्टम की रिपोर्ट तो लगा देती है, साथ ही विसरा सुरक्षित की बात भी लिख देती है, लेकिन जांच रिपोर्ट सालों तक कोर्ट में पेश नहीं की जाती। कई बार पीड़ित और आरोपी पक्ष के बीच समझौता हो जाता है। नियमानुसार पुलिस को विसरा तीस दिन के अंदर फॉरेंसिक लैब में भेज देना चाहिए, लेकिन ऐसा होता नहीं है।
- कोर्ट के आदेश पर ही कोई विसरा जांच के लिए भेजा जाता है। कोर्ट आदेश करेगा, तभी विसरा नष्ट किया जा सकता है। इसकी पुष्टि करना मुश्किल है कि विसरा कितनों दिनों में खराब हो जाता है।

डॉ. ओपी सिंह, एसएसपी
- विसरा का नमूना लेने के बाद पुलिस को प्राप्त करा दिया जाता है। इसके बाद उसे सुरक्षित रखने व नष्ट करने की जिम्मेदारी पुलिस की है। इसमें स्वास्थ्य विभाग का र्कोई दखल नहीं है।
डॉ. जीके निगम, सीएमओ
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