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खाद्य तेल से बनेगा बायो डीजल, करार करने को तैयार तीन कंपनियां
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झांसी। होटल, रेस्टोरेंट, नमकीन फैक्ट्रियों और अन्य प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेल से अब बायो डीजल बनेगा। इसके लिए प्रदेश की तीन कंपनियां खाद्य विभाग से करार करने के लिए आगे आई हैं। प्रतिष्ठानों से खाद्य तेल खरीदकर उन्हें 20 से 30 रुपये प्रति लीटर भुगतान भी किया जाएगा। ऐसे में बार-बार इस्तेमाल होने वाले तेल के खतरे से आम जन को बचाया जा सकेगा।
जला हुआ खाद्य तेल स्वास्थ्य के लिहाज से सही नहीं होता है। इसमें ट्रांस फैट होता है, जिसके इस्तेमाल से दिल की बीमारियों के साथ कैंसर का खतरा भी बढ़ता जाता है। युवाओं में हार्ट अटैक की समस्या के पीछे भी इसे बड़ा कारण माना जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से जले हुए तेल के दोबारा इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इसके बावजूद होटल, रेस्टोरेंट और प्रतिष्ठानों में खाद्य तेल का धड़ल्ले से बार-बार उपयोग किया जा रहा है। छोटी दुकानों, ठेलों पर बिकने वाले समोसे, पकौड़ी भी जले हुए तेल में पकाई जा रही हैं। ये लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। अब खाद्य तेल से बायो डीजल बनाने की योजना है। ताकि, दुकानदारों को इसका भुगतान कर तेल के बार-बार उपयोग न करने के लिए प्रेरित किया जा सके। साथ ही लोगों की सेहत से खिलवाड़ भी रुक सके। खास बात ये है कि आगरा, बरेली और गाजियाबाद की कंपनियों ने बायो डीजल बनाने के लिए अनुबंध करने को खाद्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया है। बताया गया कि कंपनियां 20 से 30 रुपये लीटर तक भुगतान करने को तैयार हैं।
अधिकतम तीन बार गर्म किया जा सकता है खाद्य तेल
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसी भी खाद्य तेल को अधिकतम तीन बार गर्म किया जा सकता है। इसके बाद इसका टोटल पोलर कंटेंट (टीपीसी) 25 से ऊपर चला जाता है। सामान्य तेल में टीपीसी पांच तक होता है। टीपीसी बढ़ने के बाद इसका इस्तेमाल मानव शरीर के लिए हानिकारक होता है।
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खाद्य तेल से बायो डीजल बनाने के लिए आगरा, बरेली और गाजियाबाद की तीन कंपनियों ने संपर्क किया है। कंपनियां 20 से 30 रुपये लीटर तक भुगतान करने को तैयार हैं। जल्द ही किसी कंपनी से अनुबंध कर लिया जाएगा। साथ ही दुकानदारों से भी अपील है कि वो तीन बार से अधिक खाद्य तेल का इस्तेमाल न करें। ये लोगों की सेहत के लिए खतरनाक है। - हरिमोहन श्रीवास्तव, सहायक आयुक्त खाद्य।
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जला हुआ खाद्य तेल स्वास्थ्य के लिहाज से सही नहीं होता है। इसमें ट्रांस फैट होता है, जिसके इस्तेमाल से दिल की बीमारियों के साथ कैंसर का खतरा भी बढ़ता जाता है। युवाओं में हार्ट अटैक की समस्या के पीछे भी इसे बड़ा कारण माना जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से जले हुए तेल के दोबारा इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इसके बावजूद होटल, रेस्टोरेंट और प्रतिष्ठानों में खाद्य तेल का धड़ल्ले से बार-बार उपयोग किया जा रहा है। छोटी दुकानों, ठेलों पर बिकने वाले समोसे, पकौड़ी भी जले हुए तेल में पकाई जा रही हैं। ये लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। अब खाद्य तेल से बायो डीजल बनाने की योजना है। ताकि, दुकानदारों को इसका भुगतान कर तेल के बार-बार उपयोग न करने के लिए प्रेरित किया जा सके। साथ ही लोगों की सेहत से खिलवाड़ भी रुक सके। खास बात ये है कि आगरा, बरेली और गाजियाबाद की कंपनियों ने बायो डीजल बनाने के लिए अनुबंध करने को खाद्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया है। बताया गया कि कंपनियां 20 से 30 रुपये लीटर तक भुगतान करने को तैयार हैं।
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अधिकतम तीन बार गर्म किया जा सकता है खाद्य तेल
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसी भी खाद्य तेल को अधिकतम तीन बार गर्म किया जा सकता है। इसके बाद इसका टोटल पोलर कंटेंट (टीपीसी) 25 से ऊपर चला जाता है। सामान्य तेल में टीपीसी पांच तक होता है। टीपीसी बढ़ने के बाद इसका इस्तेमाल मानव शरीर के लिए हानिकारक होता है।
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खाद्य तेल से बायो डीजल बनाने के लिए आगरा, बरेली और गाजियाबाद की तीन कंपनियों ने संपर्क किया है। कंपनियां 20 से 30 रुपये लीटर तक भुगतान करने को तैयार हैं। जल्द ही किसी कंपनी से अनुबंध कर लिया जाएगा। साथ ही दुकानदारों से भी अपील है कि वो तीन बार से अधिक खाद्य तेल का इस्तेमाल न करें। ये लोगों की सेहत के लिए खतरनाक है। - हरिमोहन श्रीवास्तव, सहायक आयुक्त खाद्य।