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50 करोड़ से संवरेगा बिजौली तालाब, खूब लुभाएगा
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बिजौली का ताल जिसे नगर निगम पचास करोड़ की लागत से विकसित करेगा। अमर उजाला
50 करोड़ से संवरेगा बिजौली तालाब, खूब लुभाएगा
झांसी। महानगर के बिजौली स्थित तालाब को पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत इस पुराने तालाब को पचास करोड़ रुपये खर्च कर नया रूप दिया जाएगा। इसका खाका तैयार कर लिया गया है। अगले माह योजना को अमलीजामा पहनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
ललितपुर मार्ग पर स्थित बिजौली की पहचान औद्योगिक क्षेत्र के रूप में होती है। लेकिन, आने वाले दिनों में महानगर का ये हिस्सा सैलानियों के आकर्षण का केंद्र होगा। खासतौर पर ये उन लोगों को आकर्षित करेगा, जो कुदरती वातावरण में अपना समय बिताना चाहते हैं। इसके लिए नगर निगम ने योजना तैयार कर ली है, जिसके तहत बिजौली में छह एकड़ के क्षेत्रफल में स्थित तालाब को विकसित किया जाएगा। तालाब के चारों ओर बाउंड्रीवॉल का निर्माण किया जाएगा। गंदा पानी इसमें न जाए, इसके लिए ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा, जिसमें पानी को साफ कर तालाब में छोड़ा जाएगा। तालाब के चारों ओर पाथ वे बनाया जाएगा। रंगबिरंगी लाइटिंग होगी और जगह-जगह बैंच लगाई जाएंगी। तालाब के पानी में तैरता हुआ फाउंटेन होगा। इसके अलावा बोटिंग की सुविधा भी होगी।
पार्क और कैफेटेरिया बनेगा
तालाब के नजदीक की भूमि पर विशाल पार्क का निर्माण किया जाएगा। इसमें अन्य पार्कों की तरह बच्चों के झूले तो होंगे ही, साथ ही पार्क को हरा भरा बनाया जाएगा। इसमें वृहद स्तर पर विभिन्न प्रजाति के पौधे रोपे जाएंगे। म्यूजिकल गार्डन विकसित किया जाएगा। इसके अलावा कैफेटेरिया भी बनेगा।
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इसलिए हुआ चयन
स्मार्ट सिटी के तहत बिजौली के तालाब के चयन की प्रमुख वजह इसकी सुरम्य भौगोलिक स्थिति है। पार्क के पास ही पहाड़ है और उसके ऊपर एक प्राचीन गढ़ी बनी हुई है। हालांकि, वर्तमान में ये गढ़ी जर्जर हालत में है और अपना अस्तित्व बचाने को संघर्ष करती नजर आ रही है। तालाब के आसपास हरियाली भी है। शिवपुरी-ललितपुर बाईपास से यह दूर से ही नजर आता है।
सड़क का भी होगा विकास
बिजौली का तालाब झांसी - ललितपुर रोड से लगभग एक किलोमीटर अंदर है। हालांकि, तालाब तक पहुंचने के लिए वर्तमान में पक्की रोड है। लेकिन, तालाब के विकास के साथ-साथ इस सड़क का भी विकास किया जाएगा। सड़क के दोनों ओर स्ट्रीट लाइट लगाई जाएंगी। साथ ही जन सुविधा के साधन विकसित किए जाएंगे।
बिजौली तालाब के पर्यटन विकास की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है। पचास करोड़ रुपये की लागत से स्मार्ट सिटी के तहत तालाब का विकास किया जाएगा। अगस्त में मौके पर काम शुरू करने की योजना है।
- एके शर्मा, नोडल अधिकारी - स्मार्ट सिटी
तालाब के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने से क्षेत्र का भी विकास होगा। बाहर से लोग यहां आएंगे तो स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। तालाब के पास पहाड़ पर प्राचीन गढ़ी बनी हुई है। पुरातत्व विभाग से इसे संरक्षण में लेने की मांग की गई है। इससे ये इलाका और भी सुंदर हो जाएगा।
- गायत्री आदर्श गुप्ता, क्षेत्रीय पार्षद
पानी वाली धर्मशाला की भी ली सुध
झांसी। शहर की घनी आबादी के बीच वार्ड नंबर 56 में पानी वाली धर्मशाला (तालाब) स्थित है। लेकिन, अनदेखी के चलते ये बदहाल है। तालाब में नालों का गंदा पानी जमा है और ऊपरी सतह जलकुंभी से पटी हुई है। धर्मशाला का भी स्मार्ट सिटी योजना के तहत विकास करने की योजना बनाई गई है। नगर निगम में इसकी डीपीआर तैयार की जाने लगी है। उल्लेखनीय है कि दो साल पहले धर्मशाला के विकास का काम शुरू किया गया था। इसके तहत लगभग बीस लाख रुपये की लागत से इसकी सफाई की गई थी। लेकिन, काम पूरा होने से पहले ही योजना को पलीता लग गया, जिससे ये दुर्दशाग्रस्त बना हुआ है।
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झांसी। महानगर के बिजौली स्थित तालाब को पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत इस पुराने तालाब को पचास करोड़ रुपये खर्च कर नया रूप दिया जाएगा। इसका खाका तैयार कर लिया गया है। अगले माह योजना को अमलीजामा पहनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
ललितपुर मार्ग पर स्थित बिजौली की पहचान औद्योगिक क्षेत्र के रूप में होती है। लेकिन, आने वाले दिनों में महानगर का ये हिस्सा सैलानियों के आकर्षण का केंद्र होगा। खासतौर पर ये उन लोगों को आकर्षित करेगा, जो कुदरती वातावरण में अपना समय बिताना चाहते हैं। इसके लिए नगर निगम ने योजना तैयार कर ली है, जिसके तहत बिजौली में छह एकड़ के क्षेत्रफल में स्थित तालाब को विकसित किया जाएगा। तालाब के चारों ओर बाउंड्रीवॉल का निर्माण किया जाएगा। गंदा पानी इसमें न जाए, इसके लिए ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा, जिसमें पानी को साफ कर तालाब में छोड़ा जाएगा। तालाब के चारों ओर पाथ वे बनाया जाएगा। रंगबिरंगी लाइटिंग होगी और जगह-जगह बैंच लगाई जाएंगी। तालाब के पानी में तैरता हुआ फाउंटेन होगा। इसके अलावा बोटिंग की सुविधा भी होगी।
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पार्क और कैफेटेरिया बनेगा
तालाब के नजदीक की भूमि पर विशाल पार्क का निर्माण किया जाएगा। इसमें अन्य पार्कों की तरह बच्चों के झूले तो होंगे ही, साथ ही पार्क को हरा भरा बनाया जाएगा। इसमें वृहद स्तर पर विभिन्न प्रजाति के पौधे रोपे जाएंगे। म्यूजिकल गार्डन विकसित किया जाएगा। इसके अलावा कैफेटेरिया भी बनेगा।
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इसलिए हुआ चयन
स्मार्ट सिटी के तहत बिजौली के तालाब के चयन की प्रमुख वजह इसकी सुरम्य भौगोलिक स्थिति है। पार्क के पास ही पहाड़ है और उसके ऊपर एक प्राचीन गढ़ी बनी हुई है। हालांकि, वर्तमान में ये गढ़ी जर्जर हालत में है और अपना अस्तित्व बचाने को संघर्ष करती नजर आ रही है। तालाब के आसपास हरियाली भी है। शिवपुरी-ललितपुर बाईपास से यह दूर से ही नजर आता है।
सड़क का भी होगा विकास
बिजौली का तालाब झांसी - ललितपुर रोड से लगभग एक किलोमीटर अंदर है। हालांकि, तालाब तक पहुंचने के लिए वर्तमान में पक्की रोड है। लेकिन, तालाब के विकास के साथ-साथ इस सड़क का भी विकास किया जाएगा। सड़क के दोनों ओर स्ट्रीट लाइट लगाई जाएंगी। साथ ही जन सुविधा के साधन विकसित किए जाएंगे।
बिजौली तालाब के पर्यटन विकास की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है। पचास करोड़ रुपये की लागत से स्मार्ट सिटी के तहत तालाब का विकास किया जाएगा। अगस्त में मौके पर काम शुरू करने की योजना है।
- एके शर्मा, नोडल अधिकारी - स्मार्ट सिटी
तालाब के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने से क्षेत्र का भी विकास होगा। बाहर से लोग यहां आएंगे तो स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। तालाब के पास पहाड़ पर प्राचीन गढ़ी बनी हुई है। पुरातत्व विभाग से इसे संरक्षण में लेने की मांग की गई है। इससे ये इलाका और भी सुंदर हो जाएगा।
- गायत्री आदर्श गुप्ता, क्षेत्रीय पार्षद
पानी वाली धर्मशाला की भी ली सुध
झांसी। शहर की घनी आबादी के बीच वार्ड नंबर 56 में पानी वाली धर्मशाला (तालाब) स्थित है। लेकिन, अनदेखी के चलते ये बदहाल है। तालाब में नालों का गंदा पानी जमा है और ऊपरी सतह जलकुंभी से पटी हुई है। धर्मशाला का भी स्मार्ट सिटी योजना के तहत विकास करने की योजना बनाई गई है। नगर निगम में इसकी डीपीआर तैयार की जाने लगी है। उल्लेखनीय है कि दो साल पहले धर्मशाला के विकास का काम शुरू किया गया था। इसके तहत लगभग बीस लाख रुपये की लागत से इसकी सफाई की गई थी। लेकिन, काम पूरा होने से पहले ही योजना को पलीता लग गया, जिससे ये दुर्दशाग्रस्त बना हुआ है।