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बड़ा सवाल: आखिर बयान के लिए थाने पर क्यों बुलाई गई 13 साल की दुष्कर्म पीड़िता

Thu, 05 May 2022 12:33 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 05 May 2022 12:33 AM IST
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Big question: Why was the 13-year-old rape victim called to the police station for the statement?
झांसी। थाने में दुष्कर्म की घटना के बाद से एक सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर 13 साल की दुष्कर्म पीड़िता को थाने पर बुलाया ही क्यों गया। वैसे भी पहले मुकदमा दर्ज किया जाता है और उसके बाद बयान होते हैं। किशोरी के बयान या तो उसके घर पर जाकर लिए जाते या फिर वन स्टाप सेंटर पर। डीआईजी जोगेंद्र कुमार ने बताया कि पूरे मामले की विवेचना की जा रही है। हर प्वाइंट पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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अगर हम पूरे घटनाक्रम की बात करें तो थाना पाली क्षेत्र के एक मुहल्ला निवासी 13 वर्षीय किशोरी को 22 अप्रैल के दिन पाली के ही चंदन, राजभान, हरिशंकर और महेंद्र चौरसिया बहला फुसलाकर ले गए थे। किशोरी को भोपाल ले जाया गया था। वहीं किशोरी की मां 23 अप्रैल को पुलिस कप्तान के पास पहुंची और बेटी के गायब होने की बात बताई। साथ ही आरोपियों के नाम भी पुलिस को बताए गए। एसपी ने तत्काल थानाध्यक्ष पाली को निर्देश दिए कि किशोरी को बरामद करें। जब पुलिस ने हाथ पांव मारे तो आरोपी किशोरी को पुलिस के पास छोड़कर फरार हो गए। आरोपियों ने कहा कि वह किशोरी को लेकर नहीं गए थे बल्कि किशोरी भटक गई थी। वह उसको ढूंढकर लाए हैं। थानाध्यक्ष ने किशोरी की मौसी को बुलवाया और उसके सुपुर्द कर दिया। अगले दिन 27 अप्रैल को किशोरी को बयान दर्ज कराने के नाम पर फिर थाने में बुला लिया गया। थाने में किशोरी के साथ थानाध्यक्ष तिलकधारी सरोज ने दुष्कर्म किया। अब इस पूरे घटनाक्रम में एक सवाल यह उठ रहा है कि थानाध्यक्ष ने दुष्कर्म पीड़िता को थाने पर बुलाया क्यों। जब मुकदमा दर्ज ही नहीं हुआ था तो बयान किस बात के हो रहे थे। इस पर डीआईजी जोगेंद्र सिंह ने बताया कि पहले मुकदमा होना चाहिए था फिर बयान होते। बयान के लिए किशोरी को थाने पर बुलाया ही नहीं जा सकता। अगर बयान दर्ज करने थे तो उसके घर पर जाकर लिए जाते। इन सब मामलों में थानाध्यक्ष दोषी है।
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थानाध्यक्ष ने धमकाया....अगर किसी को बताया तो मुकदमे दर्ज कर जेल भेज दूंगा
झांसी। पाली के थानाध्यक्ष तिलकधारी सरोज ने किशोरी को धमकाया था कि अगर किसी को बताया तो झूठे मुकदमे लगाकर जेल भेज दूंगा। किशोरी बेहद डर गई थी। जब उसे चाइल्ड लाइन में भेजा गया था तो वहां भी वह कुछ बता नहीं रही थी। लेकिन जब काउंसलिंग के दौरान उसको सहारा दिया गया तो वह फूटृ-फूटकर रोने लगे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। किशोरी ने काउंसलिंग के दौरान बताया कि थानाध्यक्ष ने उसे धमकी दी थी कि अगर किसी को बताया तो जेल भेज दूंगा। बुधवार को जब उसे मेडिकल के लिए भेजा गया तो वहां भी बेहद डरी हुई थी। वह बार बार घर भेजने की बात कर रही थी।
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