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Jhansi News: ऑपरेशन से पहले बाहर से मंगवा रहे ग्लब्स, टांके तक

Wed, 05 Aug 2026 02:28 AM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Updated Wed, 05 Aug 2026 02:28 AM IST
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Before the operation, gloves and stitches are being ordered from outside.
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज का प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग सरकार की सुरक्षित मातृत्व योजनाओं को ठेंगा दिखा रहा है। आरोप है कि प्रसव के लिए भर्ती गर्भवतियों के परिजनों से सिजेरियन ऑपरेशन से पहले बाहर से दवाएं और मेडिकल सामग्री मंगवाई जा रही है। इतना ही नहीं, ग्लब्स, मास्क, सर्जिकल कैप, टांके का धागा और मेडिकल टेप जैसी बुनियादी सामग्री भी बाजार से खरीदने के लिए कहा जा रहा है।
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प्रदेश सरकार ''जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम'' के तहत सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को निशुल्क दवा, सिजेरियन ऑपरेशन, रक्त, जांच और घर से अस्पताल तक परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराने का दावा करती है। इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं के परिजनों को ऑपरेशन के लिए आवश्यक दवाएं और सामग्री बाहर से खरीदने को मजबूर किया जा रहा है।
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मऊरानीपुर के बखेरा निवासी माधवदास ने बताया कि वह 26 जुलाई को अपनी पत्नी को प्रसव के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर आए थे। जांच के बाद डॉक्टरों ने सिजेरियन की सलाह दी और तुरंत ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले सामान की सूची थमा दी। मजबूरी में उन्हें बाजार से ग्लब्स, मास्क, सर्जिकल कैप, टांके का धागा और टेप समेत अन्य सामग्री खरीदनी पड़ी। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो ऐसे कई मामले सामने आ सकते हैं।
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कमीशनखोरी के शक में जांच की मांग
जानकारों का कहना है कि बाहर से दवाएं और मेडिकल सामग्री मंगाने का यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। आरोप है कि इस व्यवस्था में कमीशनखोरी का खेल भी शामिल है। यही वजह है कि मेडिकल स्टोर के बिलों पर अस्पताल के किसी डॉक्टर या कर्मचारी का नाम अथवा मोबाइल नंबर दर्ज नहीं किया जाता, ताकि शिकायत होने पर जिम्मेदारी तय न हो सके।

दर्दनाक हकीकत : इलाज के अभाव में नवजात की मौत, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
प्रसूति विभाग से जुड़ा एक और मामला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर एक प्रसूता के पति ने बताया कि 25 जुलाई को प्रसव पीड़ा होने पर पत्नी को सीएचसी मऊरानीपुर ले जाया गया था। वहां से गंभीर हालत होने पर 26 जुलाई की सुबह मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। यहां सिजेरियन ऑपरेशन से पहले बाहर से दवाएं और अन्य सामग्री मंगवाई गई।
ऑपरेशन के बाद पुत्र का जन्म हुआ, लेकिन कुछ देर बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक की एसएनसीयू लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने नवजात को स्वस्थ बताकर छुट्टी दे दी। देर शाम हालत दोबारा बिगड़ने पर परिजन फिर एसएनसीयू पहुंचे, लेकिन आरोप है कि बेड खाली न होने का हवाला देकर भर्ती करने से मना कर दिया गया। इसके बाद निजी अस्पताल में इलाज के दौरान नवजात की मौत हो गई।

इस घटना ने बाल रोग विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर गंभीर हालत वाले नवजात को स्वस्थ बताकर डिस्चार्ज कैसे किया गया।

प्रदेश में संचालित प्रमुख मातृत्व योजनाएं
जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम
जननी सुरक्षा योजना
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना
मातृत्व

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गर्भवती महिलाओं के सिजेरियन ऑपरेशन के लिए बाहर से दवाएं और मेडिकल सामग्री मंगाने का मामला बेहद गंभीर है। पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. सुधीर कुमार, प्राचार्य, महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज, झांसी
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