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पलंग खाली, गैलरी में लेटे थे मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 22 Mar 2017 01:00 AM IST
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पलंग खाली, गैलरी में लेटे थे मरीज
- फोटो : demo
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महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज में चिकित्सकों की हाजिरी चेक की गई तो तीन चिकित्सक गायब मिले। अपर जिलाधिकारी विजय बहादुर सिंह और नगर मजिस्ट्रेट जीपी गुप्ता ने जनरल वार्ड में देखा कि पंलग खाली पड़े हैं व मरीज गैलरी में लेटे हैं। उन्होंने मरीजों को पलंग पर शिफ्ट कराया। तीमारदार ने एक चिकित्सक पर हेपेटाइटिस बी का इंजेक्शन लगाने के बदले 1,400 रुपये लेने की शिकायत की। एडीएम ने कहा कि इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेंगे, कार्रवाई के लिए वही निर्णय लेंगे।
जिलाधिकारी अजय कुमार शुक्ला के निर्देश पर सुबह 11.05 बजे एडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट आकस्मिक विभाग पहुंचे। डॉ. आलोक वर्मा, डॉ. कामद दीक्षित और डॉ. डीपी अग्रवाल अनुपस्थित थे। अन्य चिकित्सकों के ड्यूटी चार्ट का सत्यापन किया। इसके बाद उन्होंने ट्रामा सेंटर का भ्रमण किया, मरीजों और तीमारदारों से बात की। ज्यादातर तीमारदारों ने बताया कि जो दवाएं सस्ती हैं, केवल वही दी जाती हैं। अन्य महंगी दवाएं बाहर से लेनी पड़ती हैं। टोड़ी फतेहपुर निवासी शैलेंद्र सिंह ने बताया कि भाई भर्ती है। उसे बाहर से दवाएं लेनी पड़ रही हैं। जनरल वार्ड में भर्ती चिरगांव निवासी कुसुम ने भी बाहर से दवाएं मंगाने की बात कही। वार्ड के भ्रमण के दौरान पलंग पर बिछा चादर फटा था। मरीज गैलरी में लेटे थे। पंखे बंद थे। पूछने पर मरीजों ने बताया कि पलंग पर गर्मी लग रही है, इसलिए वह गैलरी में लेटे हैं। एडीएम ने मरीजों को पलंग पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए।
इसके बाद वह बाल रोग विभाग पहुंचे। बात करने पर तीमारदार अंश ने बताया कि चिकित्सक ने हैपेटाइटिस बी का इंजेक्शन लगाने का 1,400 रुपये लिए हैं और कोई रसीद नहीं दी गई। अन्य महिलाओं ने भी बच्चों का टीकाकरण कराने के बदले पैसे लेने और रसीद न देने की शिकायत की। उन्होंने चिकित्सक से पूछताछ की तो उसने बताया कि इंजेक्शन के रुपये स्वयंसेवी संस्था को भेजे जाते हैं। इस मौके पर आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. शमीम कुरैशी उपस्थित रहे।
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जिलाधिकारी अजय कुमार शुक्ला के निर्देश पर सुबह 11.05 बजे एडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट आकस्मिक विभाग पहुंचे। डॉ. आलोक वर्मा, डॉ. कामद दीक्षित और डॉ. डीपी अग्रवाल अनुपस्थित थे। अन्य चिकित्सकों के ड्यूटी चार्ट का सत्यापन किया। इसके बाद उन्होंने ट्रामा सेंटर का भ्रमण किया, मरीजों और तीमारदारों से बात की। ज्यादातर तीमारदारों ने बताया कि जो दवाएं सस्ती हैं, केवल वही दी जाती हैं। अन्य महंगी दवाएं बाहर से लेनी पड़ती हैं। टोड़ी फतेहपुर निवासी शैलेंद्र सिंह ने बताया कि भाई भर्ती है। उसे बाहर से दवाएं लेनी पड़ रही हैं। जनरल वार्ड में भर्ती चिरगांव निवासी कुसुम ने भी बाहर से दवाएं मंगाने की बात कही। वार्ड के भ्रमण के दौरान पलंग पर बिछा चादर फटा था। मरीज गैलरी में लेटे थे। पंखे बंद थे। पूछने पर मरीजों ने बताया कि पलंग पर गर्मी लग रही है, इसलिए वह गैलरी में लेटे हैं। एडीएम ने मरीजों को पलंग पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए।
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इसके बाद वह बाल रोग विभाग पहुंचे। बात करने पर तीमारदार अंश ने बताया कि चिकित्सक ने हैपेटाइटिस बी का इंजेक्शन लगाने का 1,400 रुपये लिए हैं और कोई रसीद नहीं दी गई। अन्य महिलाओं ने भी बच्चों का टीकाकरण कराने के बदले पैसे लेने और रसीद न देने की शिकायत की। उन्होंने चिकित्सक से पूछताछ की तो उसने बताया कि इंजेक्शन के रुपये स्वयंसेवी संस्था को भेजे जाते हैं। इस मौके पर आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. शमीम कुरैशी उपस्थित रहे।
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