{"_id":"601dabf48ebc3e26ca691816","slug":"bar-code-se-hogi-parcel-ki-pehchan-jhansi-news-jhs1878371166","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेलवे : अब बार कोड के स्टीकर से होगी पार्सल की पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेलवे : अब बार कोड के स्टीकर से होगी पार्सल की पहचान
विज्ञापन
झांसी। झांसी और ग्वालियर पार्सल कार्यालय में पार्सल बुकिंग प्रक्रिया को डिजिटाइलेशन शुरू कर दिया है। अब पार्सल पैकेज को पारंपरिक (हाथों से लिखे गए) मार्का के स्थान पर बार कोड स्टीकर का प्रयोग शुरू किया जा रहा है। दोनों स्टेशनों पर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
नए प्रकार के बार कोड स्टीकर में सभी आवश्यक जानकारी जैसे कहां से, कहां तक, बुकिंग की तिथि, माल का वजन आदि कोडेड रहती हैं, जो कि पार्सल कार्यालय में उपलब्ध हैंड हेल्ड टर्मिनल द्वारा त्वरित फैच/ डीकोड कर ली जाती है। पार्सल कार्यालय में हैंड हेल्ड टर्मिनल तथा बार कोड स्टीकर के इस्तेमाल से पार्सल की मिस हैंडलिंग (दूसरे के हाथों में जाना), अन कनेक्टेड होना तथा गुम होने की संभावना न के बराबर हो जाती है। इसी तरह यात्री गाड़ियों में चल रहे टिकट निरीक्षकों को हैंड हेल्ड टर्मिनल प्रदान किए गए हैं, जिसमें यात्री का यात्रा ब्योरा उपलब्ध होता है। यात्री की अनुपस्थिति में आगामी स्टेशन को इस डिजिटल माध्यम से खाली सीटों की सूचना प्राप्त हो जाती है, जो कि आगामी स्टेशन पर फिर से बुक की जा सकती है। इसके अलावा मंडल में उपलब्ध कैटरिंग इकाइयों पर भी पीओएस मशीन रखे जाने के निर्देश दिए जा रहे हैं, जिससे यात्री भी डिजिटल माध्यम का प्रयोग कर सकें।
ट्रेन में मिलने लगी कैंसर पीड़ित व दिव्यांगों को रियायत
झांसी। रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों में कैंसर पीड़ित व दिव्यांग यात्रियों को टिकट में रियायत देना शुरू कर दिया है। कोरोना काल में इस सुविधा को बंद कर दिया गया था।
विज्ञापन
कोरोना महामारी के चलते 23 मार्च से नियमित ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया। इन दिनों रेलवे स्पेशल ट्रेनों की संख्या भी बढ़ाता जा रहा है। इन ट्रेनों में सिर्फ कंफर्म टिकट वाले यात्रियों को ही सफर करने की अनुमति दी जा रही है। साथ ही रेलवे ने कैंसर, दिव्यांग, वरिष्ठ नागरिक, पत्रकार समेत 50 से अधिक पात्रों को टिकट मिलने वाली रियायतों को बंद कर रखा था। कैंसर व दिव्यांग यात्रियों को टिकट में रियायत दोबारा मिलना शुरू हो गई है।
विज्ञापन
नए प्रकार के बार कोड स्टीकर में सभी आवश्यक जानकारी जैसे कहां से, कहां तक, बुकिंग की तिथि, माल का वजन आदि कोडेड रहती हैं, जो कि पार्सल कार्यालय में उपलब्ध हैंड हेल्ड टर्मिनल द्वारा त्वरित फैच/ डीकोड कर ली जाती है। पार्सल कार्यालय में हैंड हेल्ड टर्मिनल तथा बार कोड स्टीकर के इस्तेमाल से पार्सल की मिस हैंडलिंग (दूसरे के हाथों में जाना), अन कनेक्टेड होना तथा गुम होने की संभावना न के बराबर हो जाती है। इसी तरह यात्री गाड़ियों में चल रहे टिकट निरीक्षकों को हैंड हेल्ड टर्मिनल प्रदान किए गए हैं, जिसमें यात्री का यात्रा ब्योरा उपलब्ध होता है। यात्री की अनुपस्थिति में आगामी स्टेशन को इस डिजिटल माध्यम से खाली सीटों की सूचना प्राप्त हो जाती है, जो कि आगामी स्टेशन पर फिर से बुक की जा सकती है। इसके अलावा मंडल में उपलब्ध कैटरिंग इकाइयों पर भी पीओएस मशीन रखे जाने के निर्देश दिए जा रहे हैं, जिससे यात्री भी डिजिटल माध्यम का प्रयोग कर सकें।
विज्ञापन
ट्रेन में मिलने लगी कैंसर पीड़ित व दिव्यांगों को रियायत
झांसी। रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों में कैंसर पीड़ित व दिव्यांग यात्रियों को टिकट में रियायत देना शुरू कर दिया है। कोरोना काल में इस सुविधा को बंद कर दिया गया था।
विज्ञापन
कोरोना महामारी के चलते 23 मार्च से नियमित ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया। इन दिनों रेलवे स्पेशल ट्रेनों की संख्या भी बढ़ाता जा रहा है। इन ट्रेनों में सिर्फ कंफर्म टिकट वाले यात्रियों को ही सफर करने की अनुमति दी जा रही है। साथ ही रेलवे ने कैंसर, दिव्यांग, वरिष्ठ नागरिक, पत्रकार समेत 50 से अधिक पात्रों को टिकट मिलने वाली रियायतों को बंद कर रखा था। कैंसर व दिव्यांग यात्रियों को टिकट में रियायत दोबारा मिलना शुरू हो गई है।