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Jhansi News: बिहार गैंग के तीन सदस्यों की जमानत याचिका खारिज
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। फर्जी जमानतदारों के दम पर अदालत से जमानत पाने की कोशिश कर रहे बिहार के कुख्यात चोर गैंग के तीन सदस्यों की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी। मामले में जीआरपी की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए यह साबित किया गया कि प्रस्तुत किए गए जमानतदार फर्जी है।
जीआरपी ने झांसी स्टेशन व आने-जाने वाली ट्रेनों में ताबड़तोड़ चोरी की घटनाओं का खुलासा करते हुए बिहार के मुुंगेर में रहने वाले रविश पासवान व करम कुमार के अलावा बेगुसराय के प्रशांत कुमार को गिरफ्तार कर चोरी का तीन लाख रुपये का सामान बरामद किया था। जबकि कुख्यात गैंग के तीन साथी बेगुसराय निवासी अमित, अनिकेत व गौरव पाठक उर्फ लूला की जीआरपी तलाश कर रही है। जीआरपी प्रभारी रावेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि पूरा गैंग काफी शातिर है और लगातार विभिन्न प्रांतों में वारदातों को अंजाम दे रहा है। पिछले कुछ दिनों ने एक साथ दर्जनों चोरी की घटनाओं के बाद उक्त गिरोह के तीन सदस्यों को 10 जनवरी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया था, जहां से उन्हे जेल भेज दिया गया। पांच माह जेल में बंद तीनों शातिर अपराधियों ने अदालत में जमानत अर्जी दाखिल करते समय ऐसे लोगों को जमानतदार के रूप में पेश किया, जिनके दस्तावेज और पहचान संदिग्ध पाए गए। सुनवाई के दौरान जीआरपी ने रिकॉर्ड, दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर अदालत को बताया कि जमानतदारों की पहचान और पते वास्तविक नहीं हैं। जीआरपी की दलीलों और प्रस्तुत साक्ष्यों से संतुष्ट होकर अदालत ने तीनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने माना कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया है, जो गंभीर मामला है।
जीआरपी प्रभारी रावेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि फर्जी जमानतदारों का नेटवर्क सक्रिय होने की आशंका है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस अब उन लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है जिन्होंने आरोपियों के लिए फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए।
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झांसी। फर्जी जमानतदारों के दम पर अदालत से जमानत पाने की कोशिश कर रहे बिहार के कुख्यात चोर गैंग के तीन सदस्यों की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी। मामले में जीआरपी की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए यह साबित किया गया कि प्रस्तुत किए गए जमानतदार फर्जी है।
जीआरपी ने झांसी स्टेशन व आने-जाने वाली ट्रेनों में ताबड़तोड़ चोरी की घटनाओं का खुलासा करते हुए बिहार के मुुंगेर में रहने वाले रविश पासवान व करम कुमार के अलावा बेगुसराय के प्रशांत कुमार को गिरफ्तार कर चोरी का तीन लाख रुपये का सामान बरामद किया था। जबकि कुख्यात गैंग के तीन साथी बेगुसराय निवासी अमित, अनिकेत व गौरव पाठक उर्फ लूला की जीआरपी तलाश कर रही है। जीआरपी प्रभारी रावेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि पूरा गैंग काफी शातिर है और लगातार विभिन्न प्रांतों में वारदातों को अंजाम दे रहा है। पिछले कुछ दिनों ने एक साथ दर्जनों चोरी की घटनाओं के बाद उक्त गिरोह के तीन सदस्यों को 10 जनवरी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया था, जहां से उन्हे जेल भेज दिया गया। पांच माह जेल में बंद तीनों शातिर अपराधियों ने अदालत में जमानत अर्जी दाखिल करते समय ऐसे लोगों को जमानतदार के रूप में पेश किया, जिनके दस्तावेज और पहचान संदिग्ध पाए गए। सुनवाई के दौरान जीआरपी ने रिकॉर्ड, दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर अदालत को बताया कि जमानतदारों की पहचान और पते वास्तविक नहीं हैं। जीआरपी की दलीलों और प्रस्तुत साक्ष्यों से संतुष्ट होकर अदालत ने तीनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने माना कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया है, जो गंभीर मामला है।
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जीआरपी प्रभारी रावेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि फर्जी जमानतदारों का नेटवर्क सक्रिय होने की आशंका है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस अब उन लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है जिन्होंने आरोपियों के लिए फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए।
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