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बडे़ संकट को तैयार रहिए, झांसी के लिए सप्लाई करने वाले माताटीला बांध में बचा महज 45 दिन का पानी
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बड़े संकट को तैयार रहिए, झांसी को सप्लाई करने वाले माताटीला बांध पर केवल 45 दिन का पानी
झांसी। महानगर में एक बार फिर से पानी का संकट गहरा सकता है। अगर 45 दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो पानी के लिए लोगों की परेशानी बढ़ जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि महानगर में पेयजल की आपूर्ति के प्रमुख स्रोत माताटीला बांध का जलस्तर महज छह मीटर रह गया। ऐसे में बारिश का समय पर होना बेहद जरूरी है।
झांसी में पेयजल की मांग का करीब 80 फीसद सरफेस वाटर से जबकि 20 फीसदी आपूर्ति भूजल के माध्यम से पूरी होती है। सरफेस वाटर में सबसे अधिक पानी माताटीला बांध के जरिए भेजा जाता है। कुछ इलाकों में पहुंज बांध से पानी मिलता है। बेतवा नदी से माताटीला बांध भरा जाता है। इस बांध की कुल क्षमता 308.46 मीटर है। पिछली मानसूनी सीजन में भोपाल समेत आसपास के इलाकों में अच्छी बारिश हुई। बांध 307.85 मीटर भर गया। इससे बांध में 537.57 मिलियन घनमीटर पानी भर गया। इस बार फरवरी-मार्च तक नहर चलने से पानी की काफी खपत हुई। मई माह में झांसी समेत आसपास के अन्य बड़े तालाब के लिए भी बांध खोल दिया गया। इसके लिए बांध से रोजाना करीब 7500 क्यूसिक लीटर प्रति घंटे के हिसाब से पानी छोड़ा जा रहा है। बांध से जिस रफ्तार से पानी कम हो रहा, उसे देखते हुए यह करीब डेढ़ माह तक ही चल पाएगा। ऐसे में अगर माताटीला बांध के कैचमेंट इलाकों में 15 जून से 1 जुलाई के बीच जोरदार बारिश नहीं हुई तब बांध में पेजयल के लिए पानी बहुत कम बचेगा। ऐसे में पेयजल के लिए भी संकट पैदा हो सकता है। इसके कैचमेंट इलाके में भोपाल समेत बुंदेलखंड के अन्य निकटवर्ती जनपद आते हैं।
पेयजल के लिए मिलता है दो मिलियन घन मीटर पानी
माताटीला बांध महानगर में पेयजल समेत अन्य कामों में पानी की बड़ी जरूरत को पूरा करता है। यहां से पेयजल के लिए रोजाना करीब 155 एमएलडी पानी की आपूर्ति होती है। जबकि साल भर में पेयजल पर करीब 2 टीएमसी (मिलियन घनमीटर) पानी खर्च होता है। मौजूदा समय में केवल 50 मिलियन घन मीटर पानी बचा हुआ है।
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वर्जन
पेयजल के लिए अलग से बफर स्टॉक सुरक्षित किया जाता है। कमी होने पर कृषि आदि कार्यों के लिए दिया जाने वाला पानी रोक दिया जाता है।
मोहम्मद फरीद, अधिशासी अभियंता, माताटीला बांध
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झांसी। महानगर में एक बार फिर से पानी का संकट गहरा सकता है। अगर 45 दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो पानी के लिए लोगों की परेशानी बढ़ जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि महानगर में पेयजल की आपूर्ति के प्रमुख स्रोत माताटीला बांध का जलस्तर महज छह मीटर रह गया। ऐसे में बारिश का समय पर होना बेहद जरूरी है।
झांसी में पेयजल की मांग का करीब 80 फीसद सरफेस वाटर से जबकि 20 फीसदी आपूर्ति भूजल के माध्यम से पूरी होती है। सरफेस वाटर में सबसे अधिक पानी माताटीला बांध के जरिए भेजा जाता है। कुछ इलाकों में पहुंज बांध से पानी मिलता है। बेतवा नदी से माताटीला बांध भरा जाता है। इस बांध की कुल क्षमता 308.46 मीटर है। पिछली मानसूनी सीजन में भोपाल समेत आसपास के इलाकों में अच्छी बारिश हुई। बांध 307.85 मीटर भर गया। इससे बांध में 537.57 मिलियन घनमीटर पानी भर गया। इस बार फरवरी-मार्च तक नहर चलने से पानी की काफी खपत हुई। मई माह में झांसी समेत आसपास के अन्य बड़े तालाब के लिए भी बांध खोल दिया गया। इसके लिए बांध से रोजाना करीब 7500 क्यूसिक लीटर प्रति घंटे के हिसाब से पानी छोड़ा जा रहा है। बांध से जिस रफ्तार से पानी कम हो रहा, उसे देखते हुए यह करीब डेढ़ माह तक ही चल पाएगा। ऐसे में अगर माताटीला बांध के कैचमेंट इलाकों में 15 जून से 1 जुलाई के बीच जोरदार बारिश नहीं हुई तब बांध में पेजयल के लिए पानी बहुत कम बचेगा। ऐसे में पेयजल के लिए भी संकट पैदा हो सकता है। इसके कैचमेंट इलाके में भोपाल समेत बुंदेलखंड के अन्य निकटवर्ती जनपद आते हैं।
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पेयजल के लिए मिलता है दो मिलियन घन मीटर पानी
माताटीला बांध महानगर में पेयजल समेत अन्य कामों में पानी की बड़ी जरूरत को पूरा करता है। यहां से पेयजल के लिए रोजाना करीब 155 एमएलडी पानी की आपूर्ति होती है। जबकि साल भर में पेयजल पर करीब 2 टीएमसी (मिलियन घनमीटर) पानी खर्च होता है। मौजूदा समय में केवल 50 मिलियन घन मीटर पानी बचा हुआ है।
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वर्जन
पेयजल के लिए अलग से बफर स्टॉक सुरक्षित किया जाता है। कमी होने पर कृषि आदि कार्यों के लिए दिया जाने वाला पानी रोक दिया जाता है।
मोहम्मद फरीद, अधिशासी अभियंता, माताटीला बांध