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आयुर्वेदिक कॉलेज को मिली मान्यता, 50 सीटों पर होंगे प्रवेश
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झांसी। बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में 50 सीटों पर प्रवेश होंगे। नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन ने कॉलेज को इस सत्र की मान्यता दे दी है। नीट काउंसलिंग के दौरान बीएएमएस छात्रों को कॉलेज में सीटों का आवंटन किया जाएगा।
आयुर्वेदिक कॉलेज में मौलिक सिद्धांत, शरीर रचना, शरीर किया, द्रव्य गुण, रस शास्त्र एवं वैशज्य कल्पना विज्ञान, रोग निदान, अगद तंत्र और व्यवहार आयुर्वेद समेत 14 विभाग हैं। सभी में हायर फैकल्टी होना अनिवार्य है। मगर काय चिकित्सा विभाग में दो हायर फैकल्टी की जरुरत पड़ती है, जिसमें एक प्रोफेसर होना अनिवार्य है। कॉलेज में वैसे तो 40 सीटें हैं, मगर पिछले साल 10 अतिरिक्त सीटों पर प्रवेश की अनुमति मिली है। ऐसे में बीएएमएस की 50 सीटों पर प्रवेश पिछली बार हुए। हर बार मान्यता के लिए सीसीआईएम की टीम निरीक्षण के लिए आती है। लगभग दो महीने पहले टीम ने कॉलेज का निरीक्षण कर मानकों की जांच की थी। शिक्षक, संसाधन समेत सभी मानक पूरे मिलने पर सीसीआईएम ने सत्र 2020-21 में प्रवेश की मान्यता दे दी है।
सात साल में चार बार मिली मान्यता
आयुर्वेदिक कॉलेज में हर बार मान्यता का संकट बरकरार रहता है। पिछले सात सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो चार बार कॉलेज को मान्यता मिली, जबकि, तीन बार निरस्त हो गई। वर्ष 2014, 2015 में कॉलेज को मान्यता नहीं मिल सकी। 2016 में मान्यता प्राप्त हो गई। 2017 में फिर से सीसीआईएम ने मान्यता निरस्त कर दी गई। इसके बाद से 2018 और 2019 में हरी झंडी दिखा दी। पिछले साल भी सीसीआईएम की टीम निरीक्षण करने नहीं आ सकी और कॉलेज को मान्यता मिल गई।
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इतने शिक्षक हैं तैनात
प्रोफेसर: 3
एसोसिएट प्रोफेसर: 8
असिस्टेंट प्रोफेसर: 20
कॉलेज एक नजर में
कोर्स: बीएएमएस (स्नातक)
अवधि: चार साल
सीट: 50
फीस: 14500 (सामान्य)
11500 (एससी-एसटी)
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आयुर्वेदिक कॉलेज में मौलिक सिद्धांत, शरीर रचना, शरीर किया, द्रव्य गुण, रस शास्त्र एवं वैशज्य कल्पना विज्ञान, रोग निदान, अगद तंत्र और व्यवहार आयुर्वेद समेत 14 विभाग हैं। सभी में हायर फैकल्टी होना अनिवार्य है। मगर काय चिकित्सा विभाग में दो हायर फैकल्टी की जरुरत पड़ती है, जिसमें एक प्रोफेसर होना अनिवार्य है। कॉलेज में वैसे तो 40 सीटें हैं, मगर पिछले साल 10 अतिरिक्त सीटों पर प्रवेश की अनुमति मिली है। ऐसे में बीएएमएस की 50 सीटों पर प्रवेश पिछली बार हुए। हर बार मान्यता के लिए सीसीआईएम की टीम निरीक्षण के लिए आती है। लगभग दो महीने पहले टीम ने कॉलेज का निरीक्षण कर मानकों की जांच की थी। शिक्षक, संसाधन समेत सभी मानक पूरे मिलने पर सीसीआईएम ने सत्र 2020-21 में प्रवेश की मान्यता दे दी है।
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सात साल में चार बार मिली मान्यता
आयुर्वेदिक कॉलेज में हर बार मान्यता का संकट बरकरार रहता है। पिछले सात सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो चार बार कॉलेज को मान्यता मिली, जबकि, तीन बार निरस्त हो गई। वर्ष 2014, 2015 में कॉलेज को मान्यता नहीं मिल सकी। 2016 में मान्यता प्राप्त हो गई। 2017 में फिर से सीसीआईएम ने मान्यता निरस्त कर दी गई। इसके बाद से 2018 और 2019 में हरी झंडी दिखा दी। पिछले साल भी सीसीआईएम की टीम निरीक्षण करने नहीं आ सकी और कॉलेज को मान्यता मिल गई।
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इतने शिक्षक हैं तैनात
प्रोफेसर: 3
एसोसिएट प्रोफेसर: 8
असिस्टेंट प्रोफेसर: 20
कॉलेज एक नजर में
कोर्स: बीएएमएस (स्नातक)
अवधि: चार साल
सीट: 50
फीस: 14500 (सामान्य)
11500 (एससी-एसटी)