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आयुर्वेवेदिक की बिक्री को लगा ‘बूस्टर डोज’, 12 महीनों में 600 करोड़ का कारोबार
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आयुर्वेवेदिक की बिक्री को लगा ‘बूस्टर डोज’, 12 महीनों में 600 करोड़ का कारोबार
झांसी। कोरोना काल में आयुर्वेद की मांग तेजी से बढ़ी है। पिछले 12 महीनों में आयुर्वेदिक औषधियों, चूर्ण, च्यवनप्राश, रस आदि की बिक्री में डेढ़ गुना तक उछाल आया है। पिछले 12 महीनों में 600 करोड़ का कारोबार हो चुका है। कोरोना की दूसरी लहर में भी आयुर्वेदिक औषधियों की मांग तेजी से बढ़ी है। पहले ये बिक्री सालाना 400 करोड़ के आसपास रहती थी।
कोरोना वायरस के पहलेे गिने-चुने लोगों को छोड़ दें तो ज्यादातर इम्यून सिस्टम के बारे में सोचते तक नहीं थे। फास्ट फूड के सेवन के बढ़ते चलन की वजह से खासकर युवा पीढ़ी तो इस ओर बिल्कुल ध्यान नहीं देती थी। इस महामारी ने हर वर्ग, हर उम्र के लोगों को प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने के बारे में सोचने पर न सिर्फ मजबूर कर दिया है, बल्कि तमाम आयुर्वेदिक पदार्थों, दवाओं का सेवन भी लोग करने लगे। पिछले साल तो हाल ये रहा कि साल भर का च्यवनप्राश दो महीने में ही बिक गया। कच्चे माल की भी कमी हो गई। कोरोना काल में सबसे ज्यादा झांसी से असम, बंगाल, उड़ीसा, हैदराबाद, बंगलूरू, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में गिलोय, अणु तेल, च्यवनप्राश, आंवला, एलोवेरा जूस की सप्लाई हुई। शर्मायु के प्रबंध निदेशक अभिनव गौड़ ने बताया कि बुंदेलखंड में आयुर्वेद पदार्थ बनाने वाली तीन कंपनियां हैं। इनका सालाना कारोबार लगभग 400 करोड़ के आसपास रहता है। कोरोना काल में आयुर्वेदिक पदार्थों की खपत में डेढ़ गुना तक इजाफा हुआ है। पिछले 12 महीनों में लगभग 600 करोड़ के आसपास कारोबार हुआ है।
आयुर्वेद कॉलेज ने बांटा चार लाख का काढ़ा, 30 लाख की दवाएं
कोरोना काल में काढ़े का भी लोगों ने खूब सेवन किया। इस वजह से शासन की तरफ से बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज को काढ़ा के 7324 पैकेट दिए गए। आयुर्वेदिक कॉलेज के प्राचार्य डॉ. केदारनाथ यादव ने बताया कि आमजन को काढ़े के पैकेट नि:शुल्क बांटे गए। इसने लोगों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काफी मदद भी की। इन पैकेटों का बाजार मूल्य लगभग चार लाख के आसपास है, जो लोगों को कॉलेज से फ्री में ही मिल गए। इसके अलावा पिछले साल 25 लाख की दवाएं भी नि:शुल्क दी गईं। इस बार भी पांच लाख की दवाएं दी जा चुकी हैं।
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ये हैं दरें
..........
च्यवनप्राश 350 (एक किलो)
गिलोय 150 (60 टैबलेट)
आरोग्य वटी 60 (80 टैबलेट)
तुलसी रस 200 (20 एमएल)
आयुष क्वाथ 150
एलोवेरा 210
हरिद्रा 165
आंवला जूस 215
(नोट: अलग-अलग कंपनियों के दाम कुछ कम-ज्यादा हो सकते हैं।)
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झांसी। कोरोना काल में आयुर्वेद की मांग तेजी से बढ़ी है। पिछले 12 महीनों में आयुर्वेदिक औषधियों, चूर्ण, च्यवनप्राश, रस आदि की बिक्री में डेढ़ गुना तक उछाल आया है। पिछले 12 महीनों में 600 करोड़ का कारोबार हो चुका है। कोरोना की दूसरी लहर में भी आयुर्वेदिक औषधियों की मांग तेजी से बढ़ी है। पहले ये बिक्री सालाना 400 करोड़ के आसपास रहती थी।
कोरोना वायरस के पहलेे गिने-चुने लोगों को छोड़ दें तो ज्यादातर इम्यून सिस्टम के बारे में सोचते तक नहीं थे। फास्ट फूड के सेवन के बढ़ते चलन की वजह से खासकर युवा पीढ़ी तो इस ओर बिल्कुल ध्यान नहीं देती थी। इस महामारी ने हर वर्ग, हर उम्र के लोगों को प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने के बारे में सोचने पर न सिर्फ मजबूर कर दिया है, बल्कि तमाम आयुर्वेदिक पदार्थों, दवाओं का सेवन भी लोग करने लगे। पिछले साल तो हाल ये रहा कि साल भर का च्यवनप्राश दो महीने में ही बिक गया। कच्चे माल की भी कमी हो गई। कोरोना काल में सबसे ज्यादा झांसी से असम, बंगाल, उड़ीसा, हैदराबाद, बंगलूरू, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में गिलोय, अणु तेल, च्यवनप्राश, आंवला, एलोवेरा जूस की सप्लाई हुई। शर्मायु के प्रबंध निदेशक अभिनव गौड़ ने बताया कि बुंदेलखंड में आयुर्वेद पदार्थ बनाने वाली तीन कंपनियां हैं। इनका सालाना कारोबार लगभग 400 करोड़ के आसपास रहता है। कोरोना काल में आयुर्वेदिक पदार्थों की खपत में डेढ़ गुना तक इजाफा हुआ है। पिछले 12 महीनों में लगभग 600 करोड़ के आसपास कारोबार हुआ है।
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आयुर्वेद कॉलेज ने बांटा चार लाख का काढ़ा, 30 लाख की दवाएं
कोरोना काल में काढ़े का भी लोगों ने खूब सेवन किया। इस वजह से शासन की तरफ से बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज को काढ़ा के 7324 पैकेट दिए गए। आयुर्वेदिक कॉलेज के प्राचार्य डॉ. केदारनाथ यादव ने बताया कि आमजन को काढ़े के पैकेट नि:शुल्क बांटे गए। इसने लोगों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काफी मदद भी की। इन पैकेटों का बाजार मूल्य लगभग चार लाख के आसपास है, जो लोगों को कॉलेज से फ्री में ही मिल गए। इसके अलावा पिछले साल 25 लाख की दवाएं भी नि:शुल्क दी गईं। इस बार भी पांच लाख की दवाएं दी जा चुकी हैं।
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ये हैं दरें
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च्यवनप्राश 350 (एक किलो)
गिलोय 150 (60 टैबलेट)
आरोग्य वटी 60 (80 टैबलेट)
तुलसी रस 200 (20 एमएल)
आयुष क्वाथ 150
एलोवेरा 210
हरिद्रा 165
आंवला जूस 215
(नोट: अलग-अलग कंपनियों के दाम कुछ कम-ज्यादा हो सकते हैं।)