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Jhansi News: 60 साल बाद अशोक को भारत की नागरिकता मिलने की जगी आस

Fri, 22 Mar 2024 01:21 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 22 Mar 2024 01:21 AM IST
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Ashoka hopes to get Indian citizenship after 60 years
अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। दो वर्ष की आयु में अशोक कुमार बांग्लादेश छोड़कर झांसी आ गए थे। पिछले लगभग साठ सालों से बबीना में रह रहे हैं। बावजूद, भारतीय नागरिकता से वंचित हैं। लेकिन, अब उनके दामन से बांग्लादेशी होने का दाग हटने जा रहा है। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू होने के बाद उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही वे भारतीय नागरिक माने जाने लगेंगे। हालांकि, इसके लिए वह पिछले कई साल से आवेदन करते आ रहे हैं, लेकिन अब जल्द ही वे सीएए के प्रावधानों के तहत अपनी अर्जी लगाएंगे।
बबीना कस्बे में रहने वाले अशोक कुमार सरकार दो वर्ष की आयु में सन 1964 में अपने पिता नारायण चंद्र सरकार के साथ बांग्लादेश से भारत आ गए थे। शुरुआत में कुछ समय तक उनके पिता अपने परिवार के साथ पश्चिम बंगाल में रहे, लेकिन इसके बाद वे यहां बबीना कस्बे में आकर बस गए थे। अशोक कुमार ने लगभग साठ साल का जीवन भारत में गुजारा, परंतु वह अब तक भारतीय नागरिकता से वंचित रहे। सालों से वह इसके लिए प्रयास करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी यह तमन्ना पूरी नहीं हो पाई। इसी आस में साल 2007 में उनके पिता की भी मृत्यु हो गई थी।
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हाल ही में देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू होने के बाद अशोक कुमार सरकार को पूरी उम्मीद है कि सरकार उन्हें भारत की नागरिकता दे देगी। अशोक कुमार कहते हैं कि वह दिल से भारतीय हैं और भारत उनके दिल में बसता है, बस कागजों में उन्हें बांग्लादेशी ही माना जाता है। हालांकि, अब देश में सीएए लागू हो गया है। ऐसे में उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें जल्द ही भारतीय नागरिकता मिल जाएगी। इसके लिए वे नए सिरे से आवेदन करेंगे।
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अनिश्चितता का माहौल हुआ खत्म
अशोक कुमार ने बताया कि जब भी देश में विदेशी नागरिकों को लेकर बहस छिड़ती थी, उनकी रातों की नींद उड़ जाती थी। हर समय अनिश्चितता का माहौल बना रहता था। लेकिन, नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू होने के बाद से वे बेहद सुकून में हैं। बता दें कि भारत की नागरिकता न होने की वजह से अशोक सरकार को एक बार जेल भी जाना पड़ गया था। पुलिस ने सन 1992 में विदेशी अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत उन्हें जेल भेज दिया था। बाद में न्यायालय से उन्हें जमानत मिली थी।
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