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ऑनलाइन सट्टा: गिरफ्तार भाजपा नेता आशीष सरकारी गनर के सहारे गांठता था रौब, पूछताछ में उगले कई राज
Mon, 04 May 2026 02:02 AM IST
झांसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 04 May 2026 02:02 AM IST
सार
आशीष गनर के लिए हर माह 1.14 लाख रुपये चुकाता था। इस गनर की हनक की बदौलत सरकारी एवं निजी कार्यक्रम में तरजीह मिलती थी। पुलिस उसके मोबाइल के व्हाट्स एप कॉल का रिकॉर्ड खंगालने में जुटी है।
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गनर के साथ भाजपा नेता आशीष।
- फोटो : फेसबुक
विस्तार
सट्टा गिरोह के सदस्य के तौर पर गिरफ्तार हुआ भाजपा किसान मोर्चा का कोषाध्यक्ष आशीष उपाध्याय पिछले करीब चार साल से सरकारी गनर के सहारे रौब गांठता फिर रहा था। हालांकि गनर के लिए हर माह 1.14 लाख रुपये चुकाता था। इस गनर की हनक की बदौलत सरकारी एवं निजी कार्यक्रम में तरजीह मिलती थी। पुलिस उसके पास मिले मोबाइल को भी खंगाल रही है। पुलिस की निगाह खास तौर से उसके साथ वित्तीय लेनदेन करने वालों पर है। पुलिस उसके मोबाइल के व्हाट्स एप कॉल का रिकॉर्ड खंगालने में जुटी है।
पूछताछ में उगले कई राज
बजरिया निवासी शुभम उपाध्याय की गिरफ्तारी के बाद ही आशीष सरकारी गनर छोड़कर दिल्ली भाग निकला था। नई दिल्ली स्थित एक प्रदेश के राजकीय भवन में उसने पनाह ले रखी थी। पनाह दिलाने में एक वरिष्ठ अफसर की भी भूमिका सामने आई। शुक्रवार को गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आशीष से काफी देर पूछताछ की। इस दौरान उसने कई राज उगले। पैसों का लेनदेन जानने में भी पुलिस कामयाब रही।
चैट के लिए इस एप का इस्तेमाल
सबसे अहम सुराग पुलिस को उसके मोबाइल से मिले। कई डिजिटल साक्ष्य मिले। आशीष के मोबाइल में व्हाट्स एप के अलावा सिग्नल एप मिला है। सिग्नल एप में कई सारी चैट डिलीट है। पुलिस इसे रिस्टोर कर रही है। आशीष फेस टाइम का इस्तेमाल बात करने के लिए करता था।
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पूछताछ में उगले कई राज
बजरिया निवासी शुभम उपाध्याय की गिरफ्तारी के बाद ही आशीष सरकारी गनर छोड़कर दिल्ली भाग निकला था। नई दिल्ली स्थित एक प्रदेश के राजकीय भवन में उसने पनाह ले रखी थी। पनाह दिलाने में एक वरिष्ठ अफसर की भी भूमिका सामने आई। शुक्रवार को गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आशीष से काफी देर पूछताछ की। इस दौरान उसने कई राज उगले। पैसों का लेनदेन जानने में भी पुलिस कामयाब रही।
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चैट के लिए इस एप का इस्तेमाल
सबसे अहम सुराग पुलिस को उसके मोबाइल से मिले। कई डिजिटल साक्ष्य मिले। आशीष के मोबाइल में व्हाट्स एप के अलावा सिग्नल एप मिला है। सिग्नल एप में कई सारी चैट डिलीट है। पुलिस इसे रिस्टोर कर रही है। आशीष फेस टाइम का इस्तेमाल बात करने के लिए करता था।
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