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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अवसर भी और चुनौती भी: हरिवंश
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राज्यसभा के उपसभापति बोले- वेद, उपनिषद, पुराण में छुपा जीवन की सारी शंकाओं का हल
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में बुंदेलखंड लिटरेचर फेस्टिवल में रविवार को राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अवसर भी है और दुनिया के लिए बड़ी चुनौती भी। एआई से रचनात्मक बनने और विकास करने के अवसर हैं। दूसरी तरफ, स्वनाश भी हो सकता है। इसलिए जरूरी है, इसके सदुपयोग का।
उप सभापति ने कहा कि आज सबसे बड़ी चुनौती सोशल मीडिया बन चुका है। सोशल मीडिया पर खुलकर बहस करने से सरकारें भी हिचकती हैं। मगर सख्ती होनी चाहिए कि लोग सोशल मीडिया के गुण ही अपनाएं, अवगुण नहीं। अध्ययन का हवाला देते हुए बोले कि बच्चे जितना अधिक समय स्क्रीन पर बिताएंगे उनकी मानसिक हालत पर बुरा असर पड़ेगा। सत्र के दौरान भोपाल के एसपी राजेश मिश्रा सवालों का जवाब देते हुए बोले कि आजादी के बाद देश में महात्मा गांधी की बजाए पश्चिम के विचारों को आगे बढ़ाया गया। जबकि, हमारे यहां वेद, उपनिषद, पुराण हैं। इनमें जीवन की सारी शंकाओं का समाधान छुपा है। दुनिया के कई देशों के लोग इन्हें पढ़ रहे हैं। हम भी इनका महत्व समझें। 10-15 दिन पहले की एक बड़ी खबर है कि यूएस, ब्रिटेन में किताबों की खूब बिक्री हो रही है। वहीं, एक देश में कानून पास हुआ कि कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया पर नहीं रह सकते। दूसरे सत्र में अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा ने युवाओं को अभिनय की बारीकियां बताते हुए कहा कि ये 100, 200 मीटर की नहीं, बल्कि मैराथन रेस है। हर कोई दौड़ रहा है। जो धैर्य, लगन, अनुशासन से आगे बढ़ेगा, वो सफल होगा। ये एक आध्यात्मिक साधना है। कुछ भी अचानक नहीं होता। तीसरे सत्र में मिस वर्ल्ड डायवर्सिटी ब्यूटी पीजेंट का खिताब जीत चुकीं नाज जोशी ने कहा कि पुरुषों और महिलाओं ने इस प्रकृति से अपने हिसाब से रंग ले लिया। हमने सातों रंग अपने भीतर समेटे हैं। ट्रांसजेंडर समाज की स्थिति पर किए गए सवाल पर कहा कि आज भी देश में लगभग हर जगह ट्रांसजेंडर की स्थिति, उसकी पहचान को लेकर संशय बना हुआ है। चौथे सत्र में पत्रकार सईद अंसारी ने कहा कि अब डिजिटल का दौर है। हर कोई सूचनाओं के प्रवाह के लिए स्वतंत्र है। ऐसे में बहुत सी जगह मीडिया से पहले आम जनता बदलाव लाती है। उदाहरण के तौर पर आम जनता रेल मंत्रालय को एक्स पर शिकायत करती है तो त्वरित कार्रवाई होती है। पहले ये संभव नहीं था। लेकिन कभी-कभी यह स्वतंत्रता समाज पर भारी पड़ जाती है। मीडिया संस्थान हर तथ्य की जांच कर खबरें आगे बढ़ाते हैं। वहीं, लोग बिना जानकारियों के मैसेज आगे बढ़ा देते हैं। इससे झूठ और अफवाह का जन्म होता है। हम इससे बचने के उपाय ढूंढ़ने होंगे। बीएलएफ के समापन सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हुआ। सत्रों के दौरान कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय, प्रो. रंजन त्रिपाठी, चंद्र प्रताप सिंह, अनमोल दुबे मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में बुंदेलखंड लिटरेचर फेस्टिवल में रविवार को राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अवसर भी है और दुनिया के लिए बड़ी चुनौती भी। एआई से रचनात्मक बनने और विकास करने के अवसर हैं। दूसरी तरफ, स्वनाश भी हो सकता है। इसलिए जरूरी है, इसके सदुपयोग का।
उप सभापति ने कहा कि आज सबसे बड़ी चुनौती सोशल मीडिया बन चुका है। सोशल मीडिया पर खुलकर बहस करने से सरकारें भी हिचकती हैं। मगर सख्ती होनी चाहिए कि लोग सोशल मीडिया के गुण ही अपनाएं, अवगुण नहीं। अध्ययन का हवाला देते हुए बोले कि बच्चे जितना अधिक समय स्क्रीन पर बिताएंगे उनकी मानसिक हालत पर बुरा असर पड़ेगा। सत्र के दौरान भोपाल के एसपी राजेश मिश्रा सवालों का जवाब देते हुए बोले कि आजादी के बाद देश में महात्मा गांधी की बजाए पश्चिम के विचारों को आगे बढ़ाया गया। जबकि, हमारे यहां वेद, उपनिषद, पुराण हैं। इनमें जीवन की सारी शंकाओं का समाधान छुपा है। दुनिया के कई देशों के लोग इन्हें पढ़ रहे हैं। हम भी इनका महत्व समझें। 10-15 दिन पहले की एक बड़ी खबर है कि यूएस, ब्रिटेन में किताबों की खूब बिक्री हो रही है। वहीं, एक देश में कानून पास हुआ कि कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया पर नहीं रह सकते। दूसरे सत्र में अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा ने युवाओं को अभिनय की बारीकियां बताते हुए कहा कि ये 100, 200 मीटर की नहीं, बल्कि मैराथन रेस है। हर कोई दौड़ रहा है। जो धैर्य, लगन, अनुशासन से आगे बढ़ेगा, वो सफल होगा। ये एक आध्यात्मिक साधना है। कुछ भी अचानक नहीं होता। तीसरे सत्र में मिस वर्ल्ड डायवर्सिटी ब्यूटी पीजेंट का खिताब जीत चुकीं नाज जोशी ने कहा कि पुरुषों और महिलाओं ने इस प्रकृति से अपने हिसाब से रंग ले लिया। हमने सातों रंग अपने भीतर समेटे हैं। ट्रांसजेंडर समाज की स्थिति पर किए गए सवाल पर कहा कि आज भी देश में लगभग हर जगह ट्रांसजेंडर की स्थिति, उसकी पहचान को लेकर संशय बना हुआ है। चौथे सत्र में पत्रकार सईद अंसारी ने कहा कि अब डिजिटल का दौर है। हर कोई सूचनाओं के प्रवाह के लिए स्वतंत्र है। ऐसे में बहुत सी जगह मीडिया से पहले आम जनता बदलाव लाती है। उदाहरण के तौर पर आम जनता रेल मंत्रालय को एक्स पर शिकायत करती है तो त्वरित कार्रवाई होती है। पहले ये संभव नहीं था। लेकिन कभी-कभी यह स्वतंत्रता समाज पर भारी पड़ जाती है। मीडिया संस्थान हर तथ्य की जांच कर खबरें आगे बढ़ाते हैं। वहीं, लोग बिना जानकारियों के मैसेज आगे बढ़ा देते हैं। इससे झूठ और अफवाह का जन्म होता है। हम इससे बचने के उपाय ढूंढ़ने होंगे। बीएलएफ के समापन सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हुआ। सत्रों के दौरान कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय, प्रो. रंजन त्रिपाठी, चंद्र प्रताप सिंह, अनमोल दुबे मौजूद रहे।
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