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अतिक्रमण और अराजक तत्वों की चपेट में मेमोरियल सिमेट्री

Sat, 14 Mar 2020 12:57 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 14 Mar 2020 12:57 AM IST
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archaeology
झोकन बाग स्मारक की कई वर्षो से दुर्दशा का शिकार है।
झांसी। जिले में पुरातत्व धरोहरें बदहाली की शिकार होती जा रही हैं। झोकनबाग में बनी मेमोरियल सिमेट्री में अतिक्रमण और अराजक तत्वों का राज है। अनदेखी के चलते पुरातत्व स्मारक में नशेड़ियों का कब्जा रहता है। वहीं, स्मारक के आसपास बदहाली के चलते पर्यटक पहुंच नहीं रहे हैं।
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महानगर में न्यू रोड पर गोविंद चौराहे के पास स्थित झोकन बाग मेमोरियल सिमेट्री इतिहास को समेटे हुए है। यहां 1857 के संग्राम में अंग्रेजों को मारा गया था। इसके बाद ब्रिटिश नागरिकों की याद में ब्रिटिश सरकार ने इसका निर्माण कराया था। सिमेट्री के गुंबद पर यूरोपीय शैली में सलीब बना हुआ है। चारों दिशा में स्मारक के एक-एक द्वार हैं। चारों कोनों पर एक-एक स्तंभ बना हुआ है, जिसके शीर्ष पर फू लदान बने हैं। लेकिन अनदेखी के चलते यह स्मारक अतिक्रमण की चपेट में है।
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अतिक्रमण की वजह से स्थिति यह है कि यह सड़क से नजर भी नहीं आता है। जबकि परिसर के अंदर गंदगी पसरी रहती है। वहीं, परिसर के अंदर शराब और बीयर की बोतलें पड़ी रहती हैं। स्मारक के अंदर भी गंदगी का आलम है। बीते सालों में पुरातत्व विभाग ने यहां निर्माण कराने की पहल की। स्मारक के अंदर निर्माण कार्य के लिए सामान रखा हुआ है, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हो सका है। अतिक्रमण और अनदेखी के चलते पर्यटक भी स्मारक से दूर हैं।
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लोग कहते हैं
झोकन बाग स्मारक की दुर्दशा को दूर किया जाए। महानगर में ऐतिहासिक धरोहरों की उपेक्षा की जा रही है। जबकि यह हमारी पुरातत्व विरासतें हैं।- मनोज राठौर
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ऐतिहासिक इमारत बदहाली की शिकार है। अतिक्रमण और अराजक तत्वों का जमावड़ा रहता है। इसलिए यहां पर्यटक तक नहीं पहुंचते हैं।- पुनीत अग्रवाल
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झांसी में पुरातत्व इमारतों को सहेजने के लिए विभाग को पहल करने की जरूरत है। झोकनबाग के अस्तित्व को बचाने की पहल की जाए।- पुनीत साहू
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स्मारकों के पास कब्जे नहीं होने चाहिए। कब्जों के चलते स्मारक में बदहाली रहती है। इसे दूर करने के लिए प्रशासन को प्रबंध करना चाहिए।- आरपी झा
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