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सिंचाई विभाग में एक और घपला, बिना टेंडर बांट दिए 22 लाख के काम 

Sat, 24 Oct 2020 03:00 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 24 Oct 2020 03:00 AM IST
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Another scam in Irrigation department of jhansi
सांकेतिक तस्वीर

योगी सरकार पारदर्शिता के लिए जहां ई-टेंडरिंग पर लगातार जोर दे रही वहीं, सिंचाई विभाग, सपरार प्रखंड ने बिना टेंडर कराए ही 22 लाख का काम गुपचुप तरीके से चहेतों में बांट दिया। अब नहर शुरू होने से पहले मामला सामने आ गया। टेंडर कराए बिना काम कराने की शिकायत शासन तक पहुंच गई है। यह नहर 25 अक्तबूर से शुरू होनी है। इसी तरह एक मामले में बेतवा प्रखंड के तत्कालीन एक्सईएन समेत तीन कर्मचारी बृहस्पविर को ही निलंबित किए गए हैं। 

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हर साल रबी सीजन से पहले एक बार सिल्ट सफाई कराई जाती है। इसके लिए अमूमन सितंबर-अक्तूबर के बीच का समय तय होता है लेकिन, प्रखंडों में सिल्ट सफाई के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे हो जाते हैं। पहले से समय तय होने के बावजूद यह काम कभी तयशुदा समय पर शुरू नहीं होता। अंत में कम समय का हवाला देकर अभियंता बिना टेंडर कराए ही यह काम चहेतों में बांट देते हैं। 
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इस वर्ष भी सिंचाई विभाग के सपरार प्रखंड ने इसी तर्ज पर आखिरी तिथि का हवाला देते हुए 22 लाख रुपये से रानीपुर नहर प्रणाली की सिल्ट सफाई के लिए कोई टेंडर नहीं कराया। बता दें, इस रकम से 56 किलोमीटर लंबी रानीपुर नहर समेत निमोनी, स्यावनी, दुर्गापुर, रूपाधमना, तिलैरा, लिंधौरा, पसौरा, गुढ़ा, बिरौना, टोला, स्यावरी, सुहागपुरा, गढ़वा, बरौरी, अक्सेव माइनर, मगरपुर मुख्य नहर की सफाई करानी होती है। इसके जरिए रानीपुर, मऊरानीपुर के कुल 11000 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई इस वर्ष प्रस्तावित है। सपरार नहर में सफाई न होने की बात कहते हुए क्षेत्रीय किसान काफी दिनों से हंगामा कर रहे हैं।
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सिल्ट सफाई के कार्य कराए जाने आवश्यक थे लेकिन, समय नहीं था। इसलिए टेंडर नहीं कराया जा सका। सफाई कार्यों की निगरानी की जा रही है।
रामशंकर राजपूत, एक्सईएन, सपरार प्रखंड

मुख्य अभियंता एवं एक्सईएन के बीच विरोधाभास
बिना टेंडर के ही 22 लाख के काम कराने को लेकर मुख्य अभियंता एवं एक्सईएन के बीच विरोधाभास नजर आया। इस बारे में पूछने पर मुख्य अभियंता महेश्वरी प्रसाद ने कहाकि टेंडर अवश्य कराए गए हैं जबकि एक्सईएन रामशंकर राजपूत ने साफ तौर पर स्वीकारा कि बिना टेंडर ही काम कराया जा रहा है।

ई-टेंडर की अनिवार्यता मानने को राजी नहीं अभियंता
सरकार लगातार पारदर्शिता एवं राजस्व बचाने के लिए ई-टेंडरिंग पर जोर दे रही है लेकिन, सिंचाई अभियंता ई-टेंडर तो दूर की बात टेंडर तक कराने को राजी नहीं दिखते। सपरार प्रखंड की मुख्य नहर की सफाई 14 लाख से जबकि शेष काम 8 लाख से कराया गया लेकिन, दोनों ही काम के लिए टेंडर नहीं कराए गए। 

 
निलंबित हो चुके एक्सईएन 
एक ऐसे ही बिना टेंडर कराए मनमाने तरीके से पैसे बांटने के मामले में शासन ने बेतवा प्रखंड के तत्कलीन एक्सईएन संजय कुमार समेत तीन कर्मियों को निलंबित कर दिया लेकिन, इसके बावजूद सिंचाई विभाग अपनी कार्यशैली में सुधार लाने को राजी नहीं दिखता।

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