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छुट्टा पशुओं से मुक्ति की एक और आस
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Aug 2016 01:13 AM IST
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avara animal, jhansi news
- फोटो : amar ujala, jhansi news
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झांसी। महानगर की सड़कों पर कब्जा जमाए बैठे आवारा जानवरों से मुक्ति की एक और आस जगी है। शासन के निर्देश पर पशुपालन विभाग और नगर निगम अफसरों की टीम गठित होगी, जो आवारा पशुओं व उन्हें छोड़ने वाले डेयरी संचालकों को चिन्हित करेगी। ऐसे डेयरी संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही दूध डेयरियों को भी शहर से बाहर संचालित किया जाएगा।
नगर विकास विभाग के सचिव श्रीप्रकाश सिंह ने पत्र भेजकर नगर निकायों व विकास प्राधिकरणों को नगर क्षेत्र से दूध डेयरियों को बाहर करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके लिए कमेटी बनाने को कहा है। इसके अलावा डेयरी संचालक के विरुद्ध कार्रवाई करने को भी कहा है। चिह्नीकरण के दौरान यह भी देखा जाएगा कि कौन सा डेयरी संचालक अपने जानवरों को दिन में छुट्टा छोड़ देता है। साथ ही जहां कांजी हाउस नहीं हैं, वहां पर कान्हा पशु आश्रय योजना के तहत कांजी हाउस बनाने को कहा है।
उनके निर्देश पर नगर निगम, जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में आवारा जानवरों को चिह्नित करने की सहमति बन गई है। दरअसल, बहुत सी गायें ऐसी हैं, जिनको पालने वाले दूध निकाल कर सड़कों पर खुला छोड़ देते हैं। इसके पीछे पशुपालकों के घरों में पशुओं को बांधने के लिए जगह की कमी, चारा-भूसा रखने की जगह की कमी और आर्थिक स्थिति अच्छी न होना है। सभी आवारा जानवरों को चिह्नित किया जाएगा, फिर इन्हें शहर से बाहर किया जाएगा।
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पंचवटी में जमीन चिह्नित
नगर निगम में कान्हा आश्रय स्थल बनाने के लिए भानी देवी गोयल इंटर कालेज के आगे पंचवटी क्षेत्र में नगर निगम की कार्यशाला के पास जमीन चिह्नित की गई है।
नस्ल बदलने को आएंगे तीस सांड
आवारा गायों और सांडों के कारण गाय की नस्ल पीढ़ी दर पीढ़ी कमजोर होती जा रही है। इस समस्या के समाधान के लिए शासन ने राजस्थान से थारपरकर नस्ल के तीस सांड मंगाए जाएंगे। यह सांड गायों को गाभिन बनाने के काम आएंगे, जिससे नस्ल में सुधार होगा।
पहले चरण में सात जिलों में बनेंगे कांजी हाउस
कांजी हाउस बनाने के लिए पहले चरण में शासन ने नेपाल बार्डर से सटे सात जिलों पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच, महाराजगंज तथा सिद्धार्थनगर में कांजी हाउस बनाने का निर्णय लिया है। इसके बाद अन्य जिलों में चरणबद्ध तरीके से कांजी हाउस बनाए जाएंगे।
यह अधिकारी होंगे जिम्मेदार
आवारा जानवरों के चिन्हीकरण होेने के बाद या तो पशु पालक को जानवर बांधने पड़ेंगें या फिर उन्हें पशु आश्रय स्थल में भेज दिया जाएगा। इसके अलावा दूध डेयरियां शहर से बाहर जाएंगी। इसके बाद यदि शहर में जानवर घूमते पाए जाते हैं तो नगर निगम के जोन अधिकारी, नगर पालिका और नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी और संबंधित थानाध्यक्ष जिम्मेदार होंगे। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि अधिकारी आपस में समन्वय बनाकर कार्य करें। जिलाधिकारी जल्द ही इस संबंध में बैठक करेंगे। इस बैठक में अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय कर दी जाएंगी।
कठिन है आवारा जानवरों को पकड़ना
नगर क्षेत्र में आवारा जानवर बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं। इन्हें पकड़ने पर हिंदूवादी संगठन विरोध करने लगते हैं। पिछले दिनों नगर निगम ने आवारा जानवरों के खिलाफ अभियान चलाया था, लेकिन विरोध के कारण अभियान ठप हो गया था। गोरक्षा की आड़ में काले कारनामे करने वालों को प्रधानमंत्री ने आड़े हाथ लिया है, इससे नगर निगम के हौसले बढ़े हैं।
बेकार खड़ा कैटल कैचर
नगर निगम ने आवारा जानवरों को पकड़ने के लिए कैटल कैचर वाहन खरीदा था, लेकिन दो-तीन बार सड़कों पर निकलने के बाद से वह ज्यों का त्यों खड़ा है। इससे, उसमें जंग लग रहा है।
पहले चरण में आवारा जानवरों व अवैध डेयरियों को चिह्नित करने का काम जल्द शुरू होगा, इसके लिए पशुपालन विभाग का इंतजार किया जा रहा है।
- डा. राकेश बाबू
नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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नगर विकास विभाग के सचिव श्रीप्रकाश सिंह ने पत्र भेजकर नगर निकायों व विकास प्राधिकरणों को नगर क्षेत्र से दूध डेयरियों को बाहर करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके लिए कमेटी बनाने को कहा है। इसके अलावा डेयरी संचालक के विरुद्ध कार्रवाई करने को भी कहा है। चिह्नीकरण के दौरान यह भी देखा जाएगा कि कौन सा डेयरी संचालक अपने जानवरों को दिन में छुट्टा छोड़ देता है। साथ ही जहां कांजी हाउस नहीं हैं, वहां पर कान्हा पशु आश्रय योजना के तहत कांजी हाउस बनाने को कहा है।
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उनके निर्देश पर नगर निगम, जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में आवारा जानवरों को चिह्नित करने की सहमति बन गई है। दरअसल, बहुत सी गायें ऐसी हैं, जिनको पालने वाले दूध निकाल कर सड़कों पर खुला छोड़ देते हैं। इसके पीछे पशुपालकों के घरों में पशुओं को बांधने के लिए जगह की कमी, चारा-भूसा रखने की जगह की कमी और आर्थिक स्थिति अच्छी न होना है। सभी आवारा जानवरों को चिह्नित किया जाएगा, फिर इन्हें शहर से बाहर किया जाएगा।
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पंचवटी में जमीन चिह्नित
नगर निगम में कान्हा आश्रय स्थल बनाने के लिए भानी देवी गोयल इंटर कालेज के आगे पंचवटी क्षेत्र में नगर निगम की कार्यशाला के पास जमीन चिह्नित की गई है।
नस्ल बदलने को आएंगे तीस सांड
आवारा गायों और सांडों के कारण गाय की नस्ल पीढ़ी दर पीढ़ी कमजोर होती जा रही है। इस समस्या के समाधान के लिए शासन ने राजस्थान से थारपरकर नस्ल के तीस सांड मंगाए जाएंगे। यह सांड गायों को गाभिन बनाने के काम आएंगे, जिससे नस्ल में सुधार होगा।
पहले चरण में सात जिलों में बनेंगे कांजी हाउस
कांजी हाउस बनाने के लिए पहले चरण में शासन ने नेपाल बार्डर से सटे सात जिलों पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच, महाराजगंज तथा सिद्धार्थनगर में कांजी हाउस बनाने का निर्णय लिया है। इसके बाद अन्य जिलों में चरणबद्ध तरीके से कांजी हाउस बनाए जाएंगे।
यह अधिकारी होंगे जिम्मेदार
आवारा जानवरों के चिन्हीकरण होेने के बाद या तो पशु पालक को जानवर बांधने पड़ेंगें या फिर उन्हें पशु आश्रय स्थल में भेज दिया जाएगा। इसके अलावा दूध डेयरियां शहर से बाहर जाएंगी। इसके बाद यदि शहर में जानवर घूमते पाए जाते हैं तो नगर निगम के जोन अधिकारी, नगर पालिका और नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी और संबंधित थानाध्यक्ष जिम्मेदार होंगे। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि अधिकारी आपस में समन्वय बनाकर कार्य करें। जिलाधिकारी जल्द ही इस संबंध में बैठक करेंगे। इस बैठक में अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय कर दी जाएंगी।
कठिन है आवारा जानवरों को पकड़ना
नगर क्षेत्र में आवारा जानवर बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं। इन्हें पकड़ने पर हिंदूवादी संगठन विरोध करने लगते हैं। पिछले दिनों नगर निगम ने आवारा जानवरों के खिलाफ अभियान चलाया था, लेकिन विरोध के कारण अभियान ठप हो गया था। गोरक्षा की आड़ में काले कारनामे करने वालों को प्रधानमंत्री ने आड़े हाथ लिया है, इससे नगर निगम के हौसले बढ़े हैं।
बेकार खड़ा कैटल कैचर
नगर निगम ने आवारा जानवरों को पकड़ने के लिए कैटल कैचर वाहन खरीदा था, लेकिन दो-तीन बार सड़कों पर निकलने के बाद से वह ज्यों का त्यों खड़ा है। इससे, उसमें जंग लग रहा है।
पहले चरण में आवारा जानवरों व अवैध डेयरियों को चिह्नित करने का काम जल्द शुरू होगा, इसके लिए पशुपालन विभाग का इंतजार किया जा रहा है।
- डा. राकेश बाबू
नगर स्वास्थ्य अधिकारी