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Jhansi News: कर्मचारियों की कमी से बंद पड़े हैं ग्रामीण क्षेत्र के पशुसेवा केंद्र
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चिरगांव। शासन द्वारा शहरों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के विकास पर पूरा जोर दिया जा रहा है। इसके बाद भी ग्रामीण क्षेत्र में पशु सेवा केंद्रों की हालत खराब है। कर्मचारियों के अभाव में वह बंद पड़े हैं। जिससे ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालकों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।
चिरगांव ब्लाॅक में करीब तीस गोशालाएं हैं। जिनमें लगभग पांच हजार पशु संरक्षित किए गए हैं। जिनकी देखभाल के लिए चिरगांव ब्लाॅक में मात्र दो चिकित्सक हैं। जिनमें एक चिकित्सक ब्लाॅक मुख्यालय पर बने अस्पताल में बैठते हैं। जबकि दूसरे चिकित्सक बघैरा में तैनात हैं। ऐसी हालत में अगर किसी गोशाला में पशु बीमार हो जाए तो बड़ी दिक्कत होती है। कई बार समय पर उपचार न मिलने से इन पशुओं की मौत तक हो जाती है।
जानकारी के अनुसार चिरगांव क्षेत्र में ग्राम पंचायत नंदखास, बंगरा बंगरी, इटौरा में पशु सेवा केंद्र बने हुए हैं। जिनमें नंदखास में तो पशुधन प्रसार अधिकारी की तैनाती है, जबकि दो अन्य पशु सेवाकेंद्रों पर कोई कर्मचारी न होने से दोनों बंद पड़े हैं।
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पशु चिकित्साधिकारी डाॅ. आशीष कुमार गुप्ता ने बताया कि चिरगांव अस्पताल के अंतर्गत 42 गांव आते हैं। जबकि बघैरा में दस गांव लगते हैं। अगर वर्ष 2019 की पशुगणना की बात करें तो उस समय 58 हजार छोटे-बड़े पशु थे। अब इनकी संख्या काफी बढ़ गई है।
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चिरगांव ब्लाॅक में करीब तीस गोशालाएं हैं। जिनमें लगभग पांच हजार पशु संरक्षित किए गए हैं। जिनकी देखभाल के लिए चिरगांव ब्लाॅक में मात्र दो चिकित्सक हैं। जिनमें एक चिकित्सक ब्लाॅक मुख्यालय पर बने अस्पताल में बैठते हैं। जबकि दूसरे चिकित्सक बघैरा में तैनात हैं। ऐसी हालत में अगर किसी गोशाला में पशु बीमार हो जाए तो बड़ी दिक्कत होती है। कई बार समय पर उपचार न मिलने से इन पशुओं की मौत तक हो जाती है।
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जानकारी के अनुसार चिरगांव क्षेत्र में ग्राम पंचायत नंदखास, बंगरा बंगरी, इटौरा में पशु सेवा केंद्र बने हुए हैं। जिनमें नंदखास में तो पशुधन प्रसार अधिकारी की तैनाती है, जबकि दो अन्य पशु सेवाकेंद्रों पर कोई कर्मचारी न होने से दोनों बंद पड़े हैं।
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पशु चिकित्साधिकारी डाॅ. आशीष कुमार गुप्ता ने बताया कि चिरगांव अस्पताल के अंतर्गत 42 गांव आते हैं। जबकि बघैरा में दस गांव लगते हैं। अगर वर्ष 2019 की पशुगणना की बात करें तो उस समय 58 हजार छोटे-बड़े पशु थे। अब इनकी संख्या काफी बढ़ गई है।