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हंगामे के बीच साढ़े तीन अरब के बजट पर लगी सदन की मुहर
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झांसी। बुधवार को नगर निगम सभागार में सदन की बैठक आयोजित हुई। बैठक में पार्षदों ने शहर की सफाई व्यवस्था के साथ ही नाला सफाई को लेकर नाराजगी जाहिर की। बैठक शुरू होते ही हंगामा शुरू हो गया। हंगामे का आलम यह था कि आधा घंटे के लिए बैठक को स्थगित किया गया। देर शाम तक बजट पर चर्चा करते हुए सदन की मुहर लगाई गई।
बैठक को लेकर पार्षदों ने पहले ही रणनीति को तय कर लिया था। शुरूआत में ही पार्षदों ने नाला सफाई के टेंडर को कटघरे में खड़ा करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि जब नाला सफाई का टेंडर 57 फीसदी बिलो पर दिया गया है तो नालों की सफाई की उम्मीद किससे की जा सकती है। नाला सफाई के लिए नगर निगम के अधिकारियों ने कार्यालय में बैठकर ही रिपोर्ट को तैयार किया है। किसी भी अधिकारी ने मौके पर जाने तक की जहमत नहीं उठाई है। शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठे। हंगामा की स्थिति को देखते हुए महापौर ने आधे घंटे के लिए बैठक को स्थगित कर दिया। लेकिन दोबारा भी पार्षदों ने जमकर हंगामा करते हुए नगर निगम के अधिकारियों के साथ ही ठेकेदारों पर आरोप लगाए। हालांकि देर शाम तक बजट पर मुहर लगाई गई।
पार्षदों ने यह मुद्दे उठाए गए
- अंशु राय ने कहा कि लक्ष्मीगेट से लक्ष्मीताल तक जाने वाले रास्ते पर कई जगहों से पानी की पाइपलाइन कई सालों से क्षतिग्रस्त है। जिससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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- उमेश जोशी ने कहा कि इलाके में पानी की सप्लाई रात को दो बजे होती है। जिससे क्षेत्र को लोगों को रतजगा करना पड़ता है। कई शिकायतों के बाद भी समस्या का निस्तारण नहीं हुआ है।
- आशीष रायकवार ने कहा कि क्षेत्र में समस्याओं का अंबार लगा है। नगर निगम के अधिकारी मौके पर जाने की जगह एसी में बैठना अधिक पसंद करते है। जिससे समस्या का निदान होना मुश्किल हो रहा है।
- वीर सिंह ने कहा कि तेज धूप में शहर वासियों को रेड लाइट पर रुककर इंतजार करना पड़ता है। सिग्नल पर शेड लगाने से वाहन चालकों को काफी राहत मिलेगी।
- प्रदीप नगरिया ने कहा कि विद्युत शवदाह गृह को चार घंटे पहले चालू करने के बाद ही अंतिम संस्कार होता है। जबकि अन्य शहरों में सिर्फ आधा घंटे में ही अंतिम संस्कार किया जाता है।
- कन्हैया कपूर ने कहा कि डोर टू डोर कचरा संग्रह में कई इलाकों में लोगों की रसीदें काटकर वसूली की जा रही है। निगम के अधिकारियों से कहा कि यह किस नियम के तहत है।
- नरेंद्र नामदेव ने कहा कि पूरा प्रेमनगर क्षेत्र अतिक्रमण की चपेट में है। वहीं प्रेमनगर क्षेत्र से दो इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की मांग की है।
- उमा शंकर राय ने कहा कि बिजौली में नगर निगम द्वारा कई सालों पहले दुकानों का निर्माण कराया था। लेकिन आज तक उनका आवंटन नहीं किया गया है।
- कांति छत्रपाल ने कहा कि प्रस्ताव को बनाकर कई बार पेश किया गया है। लेकिन शिलान्यास पर मनोनीत पार्षदों का नाम दर्ज होता है।
- गोविंद शर्मा ने कहा कि उनके वार्ड में नाले के सामने ही दीवार का निर्माण करा लिया गया है। जिससे छह फुट नाले का पानी सिर्फ छह इंच की नाली से निकल रहा है।
- अजीदा मकरानी ने अलीगोल स्थित गुलाम गौस खां पार्क के बंद पड़े काम को शुरू करने की मांग की।
क्या मुंह लेकर जाएंगे जनता के बीच
पार्षदों ने कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। विकास के कार्य भी पूरे नहीं हो सके हैं। शहर की कई मुख्य सड़कें ही जर्जर हैं। छह माह बाद ही निकाय चुनाव होंगे। ऐसे में जनता के बीच क्या मुंह लेकर जाएंगे। जनता ने नकारा तो किसकी जिम्मेंदारी होगी।
कई बार महापौर के मंच तक आ गए पार्षद
हंगामे का आलम यह था की बजट की चर्चा के बीच कई पार्षद महापौर के मंच तक आ गए। हालांकि अन्य पार्षदों के समझाने पर पार्षद वापस अपने स्थान पर बैठ गए। लेकिन पार्षदों का गुस्सा सातवें आसमान पर था।
सवालों में ही उलझे रहे नगर निगम के अधिकारी
बैठक पर चर्चा के दौरान मनोनीत पार्षदों के साथ ही निर्वाचित पार्षदों ने अपने-अपने क्षेत्र की व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल उठाते हुए सदन में ही जवाब मांगा। नगर निगम के महापौर और अधिकारियों द्वारा पार्षदों को संतुष्ट करने के लिए तरह-तरह के जवाब देते नजर आए।
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बैठक को लेकर पार्षदों ने पहले ही रणनीति को तय कर लिया था। शुरूआत में ही पार्षदों ने नाला सफाई के टेंडर को कटघरे में खड़ा करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि जब नाला सफाई का टेंडर 57 फीसदी बिलो पर दिया गया है तो नालों की सफाई की उम्मीद किससे की जा सकती है। नाला सफाई के लिए नगर निगम के अधिकारियों ने कार्यालय में बैठकर ही रिपोर्ट को तैयार किया है। किसी भी अधिकारी ने मौके पर जाने तक की जहमत नहीं उठाई है। शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठे। हंगामा की स्थिति को देखते हुए महापौर ने आधे घंटे के लिए बैठक को स्थगित कर दिया। लेकिन दोबारा भी पार्षदों ने जमकर हंगामा करते हुए नगर निगम के अधिकारियों के साथ ही ठेकेदारों पर आरोप लगाए। हालांकि देर शाम तक बजट पर मुहर लगाई गई।
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पार्षदों ने यह मुद्दे उठाए गए
- अंशु राय ने कहा कि लक्ष्मीगेट से लक्ष्मीताल तक जाने वाले रास्ते पर कई जगहों से पानी की पाइपलाइन कई सालों से क्षतिग्रस्त है। जिससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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- उमेश जोशी ने कहा कि इलाके में पानी की सप्लाई रात को दो बजे होती है। जिससे क्षेत्र को लोगों को रतजगा करना पड़ता है। कई शिकायतों के बाद भी समस्या का निस्तारण नहीं हुआ है।
- आशीष रायकवार ने कहा कि क्षेत्र में समस्याओं का अंबार लगा है। नगर निगम के अधिकारी मौके पर जाने की जगह एसी में बैठना अधिक पसंद करते है। जिससे समस्या का निदान होना मुश्किल हो रहा है।
- वीर सिंह ने कहा कि तेज धूप में शहर वासियों को रेड लाइट पर रुककर इंतजार करना पड़ता है। सिग्नल पर शेड लगाने से वाहन चालकों को काफी राहत मिलेगी।
- प्रदीप नगरिया ने कहा कि विद्युत शवदाह गृह को चार घंटे पहले चालू करने के बाद ही अंतिम संस्कार होता है। जबकि अन्य शहरों में सिर्फ आधा घंटे में ही अंतिम संस्कार किया जाता है।
- कन्हैया कपूर ने कहा कि डोर टू डोर कचरा संग्रह में कई इलाकों में लोगों की रसीदें काटकर वसूली की जा रही है। निगम के अधिकारियों से कहा कि यह किस नियम के तहत है।
- नरेंद्र नामदेव ने कहा कि पूरा प्रेमनगर क्षेत्र अतिक्रमण की चपेट में है। वहीं प्रेमनगर क्षेत्र से दो इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की मांग की है।
- उमा शंकर राय ने कहा कि बिजौली में नगर निगम द्वारा कई सालों पहले दुकानों का निर्माण कराया था। लेकिन आज तक उनका आवंटन नहीं किया गया है।
- कांति छत्रपाल ने कहा कि प्रस्ताव को बनाकर कई बार पेश किया गया है। लेकिन शिलान्यास पर मनोनीत पार्षदों का नाम दर्ज होता है।
- गोविंद शर्मा ने कहा कि उनके वार्ड में नाले के सामने ही दीवार का निर्माण करा लिया गया है। जिससे छह फुट नाले का पानी सिर्फ छह इंच की नाली से निकल रहा है।
- अजीदा मकरानी ने अलीगोल स्थित गुलाम गौस खां पार्क के बंद पड़े काम को शुरू करने की मांग की।
क्या मुंह लेकर जाएंगे जनता के बीच
पार्षदों ने कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। विकास के कार्य भी पूरे नहीं हो सके हैं। शहर की कई मुख्य सड़कें ही जर्जर हैं। छह माह बाद ही निकाय चुनाव होंगे। ऐसे में जनता के बीच क्या मुंह लेकर जाएंगे। जनता ने नकारा तो किसकी जिम्मेंदारी होगी।
कई बार महापौर के मंच तक आ गए पार्षद
हंगामे का आलम यह था की बजट की चर्चा के बीच कई पार्षद महापौर के मंच तक आ गए। हालांकि अन्य पार्षदों के समझाने पर पार्षद वापस अपने स्थान पर बैठ गए। लेकिन पार्षदों का गुस्सा सातवें आसमान पर था।
सवालों में ही उलझे रहे नगर निगम के अधिकारी
बैठक पर चर्चा के दौरान मनोनीत पार्षदों के साथ ही निर्वाचित पार्षदों ने अपने-अपने क्षेत्र की व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल उठाते हुए सदन में ही जवाब मांगा। नगर निगम के महापौर और अधिकारियों द्वारा पार्षदों को संतुष्ट करने के लिए तरह-तरह के जवाब देते नजर आए।