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गजब फर्राटा: पापा के हाथ में स्टीयरिंग, बेटा काटता है टिकट
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झांसी। झांसी डिपो की रोडवेज की बस में पिछले सात साल से एक साथ पिता- पुत्र सेवाएं दे रहे हैं। पिता चालक और पुत्र परिचालक के पद पर कार्यरत हैं। खास बात यह है कि बाप-बेटे की इस दिलचस्प जोड़ी की मिसाल पूरे महकमे में दी जाती है। इन दोनों के व्यवहार के कारण अब तो रोज सफर करने वाले पैसेंजर भी इन्हें बड़े करीब से जानने लगे हैं। अफसरों का कहना है कि जिस बस पर यह दोनों रहते हैं उसे रखते भी दुरुस्त हैं।
झांसी जिले के ब्लॉक चिरगांव के ग्राम औपारा निवासी प्रहलाद यादव रोडवेज में चालक के पद पर 2007 में भर्ती हुए थे। इसके बाद 2016 में उनके इकलौते बेटे विशाल यादव का भी चयन रोडवेज में परिचालक के लिए हो गया। जब बाप-बेटे एक ही सेवा में आ गए अफसरों ने भी दोनों की ड्यूटी एक ही बस पर लगा दी। अब यह दोनों कानपुर जाने वाली झांसी डिपो की बस पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले सात साल से दोनों इस बस पर ड्यूटी कर रहे हैं। इन दोनों का व्यवहार भी यात्रियों के प्रति बेहद मधुर रहता है। अगर सफर के दौरान किसी यात्री को कोई दिक्कत आ जाती है तो पूरी मदद करते हैं। एआरएम प्रियम श्रीवास्तव ने भी बताया कि दोनों ही पिता पुत्र बेहद लगन और इमानदारी के साथ काम करते हैं। इस बस के बारे में कभी कोई शिकायत भी उन लोगों तक नहीं आती है।
कई कई दिनों तक घर नहीं आते
झांसी। चालक प्रहलाद सिंह ने बताया कि कभी - कभी ड्राइवर और कंडक्टर की कमी के कारण कई दिनों तक वह लोग घर नहीं जा पाते हैं। इस दौरान बाहर ही खाना- पीना आदि सभी बस के अंदर ही होता है। बताया कि कभी- कभी जब रोडवेज बस में सवारियां सीट या टिकट को लेकर झगड़ा करने लगते हैं। वह खुद ही विशाल की मदद करते हैं। बताया कि परिवहन निगम में काम करना बेहद संयम का काम है।
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पिता चाहते थे कि हर वक्त उनकी आंखों के सामने रहूं इसलिए वही हो गया
विशाल घर का इकलौता पुत्र है। सात साल से सबसे ज्यादा समय उसका पिता के साथ में ही गुजरा है। बताया कि उसने पिता से बहुत कुछ सीखा है। पिता से ही सफर के दौरान यात्रियों से किस प्रकार व्यवहार करना, और उनको संतुष्ट करना सीखा है। घर का इकलौता बेटा होने के कारण पहले तो माता - पिता भी बाहर नौकरी करने जाने से मना करते थे। बताया कि पापा भी चाहते थे कि मैं हर वक्त उनकी आंखों के सामने रहूं। शायद उनकी प्रार्थना का भी असर है कि आज 24 घंटे मैं अपने पापा के साथ रहता हूं।
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झांसी जिले के ब्लॉक चिरगांव के ग्राम औपारा निवासी प्रहलाद यादव रोडवेज में चालक के पद पर 2007 में भर्ती हुए थे। इसके बाद 2016 में उनके इकलौते बेटे विशाल यादव का भी चयन रोडवेज में परिचालक के लिए हो गया। जब बाप-बेटे एक ही सेवा में आ गए अफसरों ने भी दोनों की ड्यूटी एक ही बस पर लगा दी। अब यह दोनों कानपुर जाने वाली झांसी डिपो की बस पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले सात साल से दोनों इस बस पर ड्यूटी कर रहे हैं। इन दोनों का व्यवहार भी यात्रियों के प्रति बेहद मधुर रहता है। अगर सफर के दौरान किसी यात्री को कोई दिक्कत आ जाती है तो पूरी मदद करते हैं। एआरएम प्रियम श्रीवास्तव ने भी बताया कि दोनों ही पिता पुत्र बेहद लगन और इमानदारी के साथ काम करते हैं। इस बस के बारे में कभी कोई शिकायत भी उन लोगों तक नहीं आती है।
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कई कई दिनों तक घर नहीं आते
झांसी। चालक प्रहलाद सिंह ने बताया कि कभी - कभी ड्राइवर और कंडक्टर की कमी के कारण कई दिनों तक वह लोग घर नहीं जा पाते हैं। इस दौरान बाहर ही खाना- पीना आदि सभी बस के अंदर ही होता है। बताया कि कभी- कभी जब रोडवेज बस में सवारियां सीट या टिकट को लेकर झगड़ा करने लगते हैं। वह खुद ही विशाल की मदद करते हैं। बताया कि परिवहन निगम में काम करना बेहद संयम का काम है।
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पिता चाहते थे कि हर वक्त उनकी आंखों के सामने रहूं इसलिए वही हो गया
विशाल घर का इकलौता पुत्र है। सात साल से सबसे ज्यादा समय उसका पिता के साथ में ही गुजरा है। बताया कि उसने पिता से बहुत कुछ सीखा है। पिता से ही सफर के दौरान यात्रियों से किस प्रकार व्यवहार करना, और उनको संतुष्ट करना सीखा है। घर का इकलौता बेटा होने के कारण पहले तो माता - पिता भी बाहर नौकरी करने जाने से मना करते थे। बताया कि पापा भी चाहते थे कि मैं हर वक्त उनकी आंखों के सामने रहूं। शायद उनकी प्रार्थना का भी असर है कि आज 24 घंटे मैं अपने पापा के साथ रहता हूं।