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अमन ने छू लिया गगन
amarujala
Updated Sun, 29 Apr 2018 01:33 AM IST
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aman, jhansi news
- फोटो : demo
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नगरा के रहने वाले अमन वैष्णव ने 10वीं कक्षा में जो सपना बुना था, वह संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की पहली बार दी गई परीक्षा में ही पूरा हो गया। यूपीएससी परीक्षा में अमन ने 155वीं रैंक हासिल कर परिवार और झांसी का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने एकाग्रता, लगन और कठिन परिश्रम को सफलता की कुंजी बताया है। उनकी इस कामयाबी पर दिनभर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।
अमन ने अपनी कामयाबी को अमर उजाला के साथ साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2011 में कैथेड्रिल कॉलेज में 10वीं की परीक्षा 92.8 प्रतिशत अंकों से पास की। भूगोल की शिक्षक ने उनके हुनर को परखा और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का सुझाव दिया। फिर अमन ने परीक्षा देने की ठान ली और सिविल सेवा परीक्षा की जानकारियां एकत्र करने लगे।
वर्ष 2013 में इंटरमीडिएट में 96 प्रतिशत अंक पाकर झांसी के दूसरे टॉपर बने। इसके बाद अमन ने दिल्ली के हिंदू कॉलेज से राजनीतिक विज्ञान से बीए ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की। साथ ही सिविल सेवा की परीक्षा के लिए पाठ्य सामग्री जुटाकर तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि स्नातक के दौरान ही यूपीएससी परीक्षा की लगभग 70 प्रतिशत तैयारी कर ली थी। इसके बाद दिल्ली में एक साल की कोचिंग की। वर्ष 2017 में प्री और मेंस परीक्षा दी। बीते चार अप्रैल में हुए साक्षात्कार में वह पास हो गए। उन्हें 155वीं रैंक मिली है।
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माता-पिता के सहयोग से मिली कामयाबी
अमन के पिता रामसेवक झांसी में मुख्य लोको निरीक्षक के पद पर तैनात हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें विश्वास था कि उनका बेटा लक्ष्य हासिल कर लेगा। इसलिए हर कदम पर अमन का साथ दिया। अमन ने बताया कि पिता के साथ उनकी मां का सफलता में अहम रोल है। कई बार जब वह डिप्रेशन में आए या फिर लक्ष्य से भटकने लगे, तब मां ने बेहतर गाइड बनकर आत्मविश्वास बढ़ाया। अमन के अनुसार वह रोजाना 10 घंटे पढ़ते थे। इसके अलावा खेलकूद भी करते थे।
एक हाथ से दी थी परीक्षा
2017 में यूपीएससी की परीक्षा देने के 20 दिन पहले अमन का एक्सीडेंट होने से कॉलर में फ्रैक्चर हो गया था। ऐसे समय में वह थोड़ा घबराए लेकिन परिवार और डॉक्टरों के हौसले व मदद के बाद वह एक हाथ से परीक्षा देने पहुंचे।
कुछ अलग कर दिखाना है
अमन ने बताया कि सरकारी योजनाओं से आमजन, गरीबों को लाभ पहुंचाना उनका लक्ष्य रहेगा। यह लाभ तभी मिल सकेगा, जब लोग शिक्षित होंगे। इसलिए वह लगातार लोगों से शिक्षित होने और स्वस्थ रहने की अपील करते रहेंगे।
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अमन ने अपनी कामयाबी को अमर उजाला के साथ साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2011 में कैथेड्रिल कॉलेज में 10वीं की परीक्षा 92.8 प्रतिशत अंकों से पास की। भूगोल की शिक्षक ने उनके हुनर को परखा और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का सुझाव दिया। फिर अमन ने परीक्षा देने की ठान ली और सिविल सेवा परीक्षा की जानकारियां एकत्र करने लगे।
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वर्ष 2013 में इंटरमीडिएट में 96 प्रतिशत अंक पाकर झांसी के दूसरे टॉपर बने। इसके बाद अमन ने दिल्ली के हिंदू कॉलेज से राजनीतिक विज्ञान से बीए ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की। साथ ही सिविल सेवा की परीक्षा के लिए पाठ्य सामग्री जुटाकर तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि स्नातक के दौरान ही यूपीएससी परीक्षा की लगभग 70 प्रतिशत तैयारी कर ली थी। इसके बाद दिल्ली में एक साल की कोचिंग की। वर्ष 2017 में प्री और मेंस परीक्षा दी। बीते चार अप्रैल में हुए साक्षात्कार में वह पास हो गए। उन्हें 155वीं रैंक मिली है।
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माता-पिता के सहयोग से मिली कामयाबी
अमन के पिता रामसेवक झांसी में मुख्य लोको निरीक्षक के पद पर तैनात हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें विश्वास था कि उनका बेटा लक्ष्य हासिल कर लेगा। इसलिए हर कदम पर अमन का साथ दिया। अमन ने बताया कि पिता के साथ उनकी मां का सफलता में अहम रोल है। कई बार जब वह डिप्रेशन में आए या फिर लक्ष्य से भटकने लगे, तब मां ने बेहतर गाइड बनकर आत्मविश्वास बढ़ाया। अमन के अनुसार वह रोजाना 10 घंटे पढ़ते थे। इसके अलावा खेलकूद भी करते थे।
एक हाथ से दी थी परीक्षा
2017 में यूपीएससी की परीक्षा देने के 20 दिन पहले अमन का एक्सीडेंट होने से कॉलर में फ्रैक्चर हो गया था। ऐसे समय में वह थोड़ा घबराए लेकिन परिवार और डॉक्टरों के हौसले व मदद के बाद वह एक हाथ से परीक्षा देने पहुंचे।
कुछ अलग कर दिखाना है
अमन ने बताया कि सरकारी योजनाओं से आमजन, गरीबों को लाभ पहुंचाना उनका लक्ष्य रहेगा। यह लाभ तभी मिल सकेगा, जब लोग शिक्षित होंगे। इसलिए वह लगातार लोगों से शिक्षित होने और स्वस्थ रहने की अपील करते रहेंगे।