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बहे विकास की गंगा, बढ़े झांसी का मान हम निभाएंगे साथ
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डॉ. राजीव सिन्हा।
- फोटो : REPORTERS
झांसी। आज अमर उजाला और आपके बीच झांसी में 23 साल पुराना और मजबूत रिश्ता बन गया है। पाठकों का लगाव ही तो है जो अरसे से आपके दिन की शुरुआत हमारे साथ होती है। समाचार पत्र के रूप में सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, आपराधिक घटनाओं के साथ आपकी समस्याओं को उठाना हमारा फर्ज है। स्थापना दिवस पर हमने पाठकों के मन की बात जानने की कोशिश की। समाजसेवी, वकील, चिकित्सक और साहित्यिक शख्सियतों ने तमाम नई, पुरानी बातें याद दिलाईं। लेकिन विकास का मुद्दा और मानवीय पक्ष की खबरों के लिए हमें विशेष स्नेह और सराहना मिली। शुरुआत से हमारे पाठक रहे इन बुद्धिजीवियों की राय कुछ इस तरह रही... ।
इस विकास पत्रकारिता का फायदा पीढ़ियों तक को मिलेगा
कई बार जिला अधिवक्ता संघ के सचिव और अध्यक्ष रहे उदय राजपूत ने बताया विकास के मुद्दे अमर उजाला की प्राथमिकता रहते हैं। फिर व शहर की सड़क या पुल से संबंधित हो या पिछड़े बुंदेलखंड को रफ्तार देने की क्षमता रखने वाला डिफेंस कॉरिडोर या बुंदेलखंड एक्सप्रेस। सबसे अच्छी बात यह है कि विकास का दावा और वादा करने वाली सरकारों और अधिकारियों को समय-समय पर तथ्यों के साथ यह समाचार पत्र याद दिलाता है। इससे अधिकारियों की नींद टूटती है और उन्हें काम करना पड़ता है। सीधा फायदा जनता को मिलता है। यह इसकी ऐसी विशेषता है। इस विकास पत्रकारिता का फायदा पीढ़ियों तक को मिलेगा। घटनाओं पर निष्पक्ष और पैनी नजर इसकी अलग विशेषता है।
समाज का जीवन स्तर बढ़ाने का प्रयास करती हैं खबरें
समाजसेवी अनुराधा शर्मा ने कहा कि अमर उजाला झांसी वालों के बेहतर जीवन की न सिर्फ कल्पना करता है उसे हकीकत में साकार करने के लगातार प्रयास करता है। बुंदेलखंड में बेहतर स्वास्थ्य के विकल्प क्या हो सकते हैं, पानी के लिए तरसते क्षेत्रवासियों का दर्द क्या है, कुपोषण, बेरोजगारी यानी लोगों की परवरिश, वजूद से लेकर सभी के लिए बेहतर जीवन स्तर का खाका तैयार करता है। सरकार के संबंधित विभाग अपनी भूमिका किस हद तक निभा रहे हैं, अगर नहीं निभा रहे हैं तो उन्हें बार-बार आगाह भी करता है। लावारिस पड़ी मिली नवजात ‘अपूर्वी’ को बचाने की मुहिम काबिले तारीफ और मिसाल है। यह इसे अलग पहचान और स्थान दिलाता है।
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आम आदमी को विकास में सहभागी बनाता है
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.राजीव सिन्हा ने कहा अमर उजाला विकास की खबरों को विशेष महत्व देता है। वर्तमान दौर में यह पत्रकारिता का सकारात्तमक रुख है। एक ओर जिम्मेदारों को उनके कर्तव्यों का अहसास कराता है, दूसरी ओर लोगों से भी विकास में सहयोगी होने की अपील करता है। ये समाज के हित में समाज को जोड़ने वाली बात है। सरकार या व्यवस्था सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर सकती है। लेकिन शहर के लोग जब तक अपने संसाधनों को बचाना, उनका सदुपयोग नहीं सीखेंगे तब तक विकास का सपना अधूरा रहेगा। बुंदेलखंड में कोरोना के प्रति जागरूकता हो, जल संरक्षण, स्वास्थ्य, खेती किसानी या फिटनेस खबरों और अमर उजाला फेसबुक लाइव कार्यक्रम के जरिए भी जागरूक करता है।
बुंदेली सभ्यता और संस्कृति को दिया है नवजीवन
साहित्यकार हरगोविंद कुशवाहा ने कहा अमर उजाला ने बुंदेली सभ्यता और संस्कृति को नवजीवन दिया है। इसके लिए बुंदेली साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोग विशेषकर आभारी हैं और रहेंगे। वर्ष 2002 में बुंदेली राई नृत्य के लिए प्रतिनिधिमंडल सप्ताह भर के लिए बंगलूरू गया था। वहां की प्रस्तुति का जो सजीव चित्रण कलाकारों के इंटरव्यू के बाद अमर उजाला ने प्रकाशित किया वह संग्रहणीय है। उसके बाद से राई को एक बार फिर पहचान मिलना शुरू हुई। केंद्र और राज्य सरकार ने विशेष अहमियत दी। लुप्त होती बुंदेली लोक कलाओं को बचाने के प्रति भी समाचार पत्र लगातार समर्पित है। मैं जब आगरा में ग्रेजुएशन कर रहा था, सपना था कि अमर उजाला कभी हमारे झांसी आए। जब से आया अपना बना गया।
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इस विकास पत्रकारिता का फायदा पीढ़ियों तक को मिलेगा
कई बार जिला अधिवक्ता संघ के सचिव और अध्यक्ष रहे उदय राजपूत ने बताया विकास के मुद्दे अमर उजाला की प्राथमिकता रहते हैं। फिर व शहर की सड़क या पुल से संबंधित हो या पिछड़े बुंदेलखंड को रफ्तार देने की क्षमता रखने वाला डिफेंस कॉरिडोर या बुंदेलखंड एक्सप्रेस। सबसे अच्छी बात यह है कि विकास का दावा और वादा करने वाली सरकारों और अधिकारियों को समय-समय पर तथ्यों के साथ यह समाचार पत्र याद दिलाता है। इससे अधिकारियों की नींद टूटती है और उन्हें काम करना पड़ता है। सीधा फायदा जनता को मिलता है। यह इसकी ऐसी विशेषता है। इस विकास पत्रकारिता का फायदा पीढ़ियों तक को मिलेगा। घटनाओं पर निष्पक्ष और पैनी नजर इसकी अलग विशेषता है।
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समाज का जीवन स्तर बढ़ाने का प्रयास करती हैं खबरें
समाजसेवी अनुराधा शर्मा ने कहा कि अमर उजाला झांसी वालों के बेहतर जीवन की न सिर्फ कल्पना करता है उसे हकीकत में साकार करने के लगातार प्रयास करता है। बुंदेलखंड में बेहतर स्वास्थ्य के विकल्प क्या हो सकते हैं, पानी के लिए तरसते क्षेत्रवासियों का दर्द क्या है, कुपोषण, बेरोजगारी यानी लोगों की परवरिश, वजूद से लेकर सभी के लिए बेहतर जीवन स्तर का खाका तैयार करता है। सरकार के संबंधित विभाग अपनी भूमिका किस हद तक निभा रहे हैं, अगर नहीं निभा रहे हैं तो उन्हें बार-बार आगाह भी करता है। लावारिस पड़ी मिली नवजात ‘अपूर्वी’ को बचाने की मुहिम काबिले तारीफ और मिसाल है। यह इसे अलग पहचान और स्थान दिलाता है।
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आम आदमी को विकास में सहभागी बनाता है
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.राजीव सिन्हा ने कहा अमर उजाला विकास की खबरों को विशेष महत्व देता है। वर्तमान दौर में यह पत्रकारिता का सकारात्तमक रुख है। एक ओर जिम्मेदारों को उनके कर्तव्यों का अहसास कराता है, दूसरी ओर लोगों से भी विकास में सहयोगी होने की अपील करता है। ये समाज के हित में समाज को जोड़ने वाली बात है। सरकार या व्यवस्था सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर सकती है। लेकिन शहर के लोग जब तक अपने संसाधनों को बचाना, उनका सदुपयोग नहीं सीखेंगे तब तक विकास का सपना अधूरा रहेगा। बुंदेलखंड में कोरोना के प्रति जागरूकता हो, जल संरक्षण, स्वास्थ्य, खेती किसानी या फिटनेस खबरों और अमर उजाला फेसबुक लाइव कार्यक्रम के जरिए भी जागरूक करता है।
बुंदेली सभ्यता और संस्कृति को दिया है नवजीवन
साहित्यकार हरगोविंद कुशवाहा ने कहा अमर उजाला ने बुंदेली सभ्यता और संस्कृति को नवजीवन दिया है। इसके लिए बुंदेली साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोग विशेषकर आभारी हैं और रहेंगे। वर्ष 2002 में बुंदेली राई नृत्य के लिए प्रतिनिधिमंडल सप्ताह भर के लिए बंगलूरू गया था। वहां की प्रस्तुति का जो सजीव चित्रण कलाकारों के इंटरव्यू के बाद अमर उजाला ने प्रकाशित किया वह संग्रहणीय है। उसके बाद से राई को एक बार फिर पहचान मिलना शुरू हुई। केंद्र और राज्य सरकार ने विशेष अहमियत दी। लुप्त होती बुंदेली लोक कलाओं को बचाने के प्रति भी समाचार पत्र लगातार समर्पित है। मैं जब आगरा में ग्रेजुएशन कर रहा था, सपना था कि अमर उजाला कभी हमारे झांसी आए। जब से आया अपना बना गया।

अनुराधा शर्मा - फोटो : REPORTERS

- उदय राजपूत - फोटो : REPORTERS