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वेस्ट टू एनर्जी प्रोजेक्ट पर पार्षद, महापौर आमने-सामने
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झांसी। कूड़े से बिजली बनाए जाने का प्रोजेक्ट सदन से पास हुआ अथवा नहीं, इसको लेकर रार छिड़ गई है। असंतुष्ट पार्षदों का खेमा जहां इससे इंकार कर रहा है वहीं, दूसरा धड़ा इसे पारित बता रहा है। इसको लेकर विवाद छिड़ जाने से निगम प्रशासन भी असमंजस में फंस गया। इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए अब तक शासन को नहीं भेजा जा सका जबकि 30 दिसंबर तक इसे मंजूरी के लिए भेजा जाना था।
कूड़े से बिजली बनाए जाने के लिए नगर निगम मुंबई की कंपनी के संग करार की तैयारी में है। पार्षदों की सहमति के लिए सदन की बैठक बुलाई गई लेकिन वहां विरोध शुरू हो गया। करीब डेढ़ दर्जन पार्षद करार से पहले प्लांट का दौरा कराने की मांग करने लगे। इस बात को लेकर विवाद शुरू हो गया। हंगामे के बीच प्रस्ताव पारित होने की घोषणा कर दी गई लेकिन अंसतुष्ट खेमे से विकास खत्री, महेश गौतम, सुलेमान मंसूरी, कन्हैया कपूर आदि पार्षद इसे मानने को राजी नहीं।
सदन की कार्रवाई के जारी मिनट्स ने विवाद और बढ़ा दिया। असंतुष्ट पार्षदों का दावा है कि मिनट्स में प्रस्ताव को मनमाने तरीके से पास दिखाया गया जबकि महापौर रामतीर्थ सिंघल का दो टूक कहना है कि करार से पहले पार्षदोें का दौरा प्लांट में कराने की शर्त पर सदन में प्रस्ताव मंजूर हुआ था। महापौर ने असंतुष्ट खेमे के पार्षदों के विरोध को गैर जरूरी बताया। उधर, असंतुष्ट खेमा इस मामले में चुप बैठने को राजी नहीं। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप देखते हुए निगम प्रशासन ने फिलहाल अपने पांव पीछे खींच लिए हैं। प्रस्ताव अभी तक शासन को नहीं भेजा जा सका है।
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कूड़े से बिजली बनाए जाने के लिए नगर निगम मुंबई की कंपनी के संग करार की तैयारी में है। पार्षदों की सहमति के लिए सदन की बैठक बुलाई गई लेकिन वहां विरोध शुरू हो गया। करीब डेढ़ दर्जन पार्षद करार से पहले प्लांट का दौरा कराने की मांग करने लगे। इस बात को लेकर विवाद शुरू हो गया। हंगामे के बीच प्रस्ताव पारित होने की घोषणा कर दी गई लेकिन अंसतुष्ट खेमे से विकास खत्री, महेश गौतम, सुलेमान मंसूरी, कन्हैया कपूर आदि पार्षद इसे मानने को राजी नहीं।
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सदन की कार्रवाई के जारी मिनट्स ने विवाद और बढ़ा दिया। असंतुष्ट पार्षदों का दावा है कि मिनट्स में प्रस्ताव को मनमाने तरीके से पास दिखाया गया जबकि महापौर रामतीर्थ सिंघल का दो टूक कहना है कि करार से पहले पार्षदोें का दौरा प्लांट में कराने की शर्त पर सदन में प्रस्ताव मंजूर हुआ था। महापौर ने असंतुष्ट खेमे के पार्षदों के विरोध को गैर जरूरी बताया। उधर, असंतुष्ट खेमा इस मामले में चुप बैठने को राजी नहीं। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप देखते हुए निगम प्रशासन ने फिलहाल अपने पांव पीछे खींच लिए हैं। प्रस्ताव अभी तक शासन को नहीं भेजा जा सका है।
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