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एजेंसी संचालकों की जेब में जा रही कृषि सब्सिडी
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झांसी। कृषि उपकरणों पर मिलने वाली लाखों रुपये की सब्सिडी का असली फायदा उपकरण बिक्री करने वाले एजेंसी संचालक उठा रहे हैं। किसानों को चंद रुपये देकर संचालक ही सब्सिडी की मोटी रकम गटक रहे हैं। ऐसे कई मामलों के सामने आने पर कृषि अफसरों के कान खड़े हो गए। अब पहले बांटी गई सब्सिडी की भी जांच कराई जा रही है।
केंद्र एवं राज्य सरकार किसानों को ट्रैक्टर, ड्रम सीडर, स्प्रेयर एवं इकोफ्रेज,लेजर लैंड, लेबलर, हैरो, कल्टीवेटर, मल्टीक्रॉप थ्रेशर, पावर चैप कटर, पावर स्प्रेयर, रोटावेटर जैसे तमाम आधुनिक उपकरण पचास से अस्सी फीसदी अनुदान पर मुहैया कराई है। मालूम चला है कि इस भारी-भरकम अनुदान राशि को हड़पने के लिए जमकर बंदरबाट हो रहा है। जानकारों के मुताबिक जैसे ही किसी उपकरण की अनुदान विंडो खुलती है, एजेंसी संचालक पहले से बेचे जा चुके उपकरणों के किसानों के नाम का टोकन ले लेते हैं। इसके बाद संबंधित किसान से संपर्क करके उसे चंद रुपयों का लालच देते हैं। किसान के राजी होते ही फर्जी कागज लगाकर उसी उपकरण को सब्सिडी में दिखा दिया जाता है और पूरा पैसा हड़प लिया जाता है। कुछ दिनों पहले रोटावेटर की सब्सिडी के नाम ऐसा ही एक मामला सामने आया था। इस खेल के चलते जरूरतमंद किसान सब्सिडी का फायदा नहीं उठा पाते और लाखों रुपया एजेंसी संचालक ही गटक जाते हैं।
पंद्रह मिनट में बुक हो गए थे सोलर पंप
सब्सिडी को लेकर किस तरह ऊंचे स्तर पर खेल हो रहा है इसकी बानगी कुछ दिनों पहले सोलर पंप के रजिस्ट्रेशन के दौरान भी नजर आई थी। झांसी में पीएम कुसुम योजना के तहत 15 सोलर पंप दिए जाने हैं। सोलर पंप की इस समय काफी मांग है लेकिन, रजिस्ट्रेशन विंडो खुलने के पंद्रह मिनट के भीतर ही सारे रजिस्ट्रेशन पूरे हो गए। कृषि अधिकारी भी प्रक्रिया में गड़बड़ी की बात दबी जुबान से स्वीकारते हैं।
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कई शिकायतें इस तरह की मिली हैं। इसे देखते हुए अब मोबाइल नंबर के मिलान को अनिवार्य किया गया है। संबंधित किसान के पास ओटीपी वाला मोबाइल नंबर का होना अनिवार्य होगा। ऐसा न होने पर उसका पंजीकरण निरस्त कर दिया जाएगा। ऐसे मामले में संलिप्त एजेंसी संचालकों की भी जांच कराई जा रही है। दोषियों को ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा।
कमल कटियार, उपनिदेशक, कृषि
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केंद्र एवं राज्य सरकार किसानों को ट्रैक्टर, ड्रम सीडर, स्प्रेयर एवं इकोफ्रेज,लेजर लैंड, लेबलर, हैरो, कल्टीवेटर, मल्टीक्रॉप थ्रेशर, पावर चैप कटर, पावर स्प्रेयर, रोटावेटर जैसे तमाम आधुनिक उपकरण पचास से अस्सी फीसदी अनुदान पर मुहैया कराई है। मालूम चला है कि इस भारी-भरकम अनुदान राशि को हड़पने के लिए जमकर बंदरबाट हो रहा है। जानकारों के मुताबिक जैसे ही किसी उपकरण की अनुदान विंडो खुलती है, एजेंसी संचालक पहले से बेचे जा चुके उपकरणों के किसानों के नाम का टोकन ले लेते हैं। इसके बाद संबंधित किसान से संपर्क करके उसे चंद रुपयों का लालच देते हैं। किसान के राजी होते ही फर्जी कागज लगाकर उसी उपकरण को सब्सिडी में दिखा दिया जाता है और पूरा पैसा हड़प लिया जाता है। कुछ दिनों पहले रोटावेटर की सब्सिडी के नाम ऐसा ही एक मामला सामने आया था। इस खेल के चलते जरूरतमंद किसान सब्सिडी का फायदा नहीं उठा पाते और लाखों रुपया एजेंसी संचालक ही गटक जाते हैं।
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पंद्रह मिनट में बुक हो गए थे सोलर पंप
सब्सिडी को लेकर किस तरह ऊंचे स्तर पर खेल हो रहा है इसकी बानगी कुछ दिनों पहले सोलर पंप के रजिस्ट्रेशन के दौरान भी नजर आई थी। झांसी में पीएम कुसुम योजना के तहत 15 सोलर पंप दिए जाने हैं। सोलर पंप की इस समय काफी मांग है लेकिन, रजिस्ट्रेशन विंडो खुलने के पंद्रह मिनट के भीतर ही सारे रजिस्ट्रेशन पूरे हो गए। कृषि अधिकारी भी प्रक्रिया में गड़बड़ी की बात दबी जुबान से स्वीकारते हैं।
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कई शिकायतें इस तरह की मिली हैं। इसे देखते हुए अब मोबाइल नंबर के मिलान को अनिवार्य किया गया है। संबंधित किसान के पास ओटीपी वाला मोबाइल नंबर का होना अनिवार्य होगा। ऐसा न होने पर उसका पंजीकरण निरस्त कर दिया जाएगा। ऐसे मामले में संलिप्त एजेंसी संचालकों की भी जांच कराई जा रही है। दोषियों को ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा।
कमल कटियार, उपनिदेशक, कृषि