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दो साल बाद फिर ताजिये और अखाड़ों की अगुवाई करेगी ‘बल्देव बढ़ई’ की मस्जिद

Sun, 07 Aug 2022 01:00 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 07 Aug 2022 01:00 AM IST
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After two years, the mosque of 'Baldev Carpenter' will again lead the Tajiya and the akhadas
झांसी। परंपरा के अनुसार मोहर्रम के जुलूस में बल्देव बढ़ई की मस्जिद सभी ताजियों और बुर्राक की अगुवाई करते हुए जुलूस के आगे चलती है। यह प्रथा झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई ने शुरू की थी। लेकिन पिछले दो सालों से कोरोना संक्रमण के कारण जुलूस पर पाबंदी लगी हुई थी। जिससे बढ़ई की मस्जिद जुलूस में शामिल नहीं हो सकी थी। लेकिन संक्रमण का दायरा सिमटते ही जुलूस पर लगी पाबंदी को हटा लिया गया है। दो साल बाद एक बार फिर बढ़ई की मस्जिद जुलूस में सबसे आगे रहेगी। शनिवार को मस्जिद को गुसाईं पुरा स्थित अपने मुकाम पर स्थापित कर दिया गया है।
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हजरत इमाम हुसैन की शहादत पर प्रतिवर्ष ताजियों का जुलूस निकाला जाता है। नगर भ्रमण करते हुए शहर के ताजिये लक्ष्मीताल स्थित करबला में ठंडे किए जाते हैं। मोहर्रम के जुलूस में ताजिये, बुर्राकों और अखाड़ा करने वालों की लंबी-लंबी कतारें रहती हैं। लेकिन इन सबके बीच बल्देव बढ़ई की ताजियानुमा मस्जिद सालों से जुलूस के आगे चलती है। इस परंपरा को झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई ने सन 1955 में शुरू किया था। जिसके चलते यह परंपरा जारी है। लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते दो साल तक जुलूस नहीं निकाला जा सका था। दो साल के बाद मोहर्रम के जुलूस में एक बार फिर बल्देव बढ़ई की मस्जिद सबसे आगे होगी। मोहर्रम की सात तारीख को गुसाईंपुरा स्थित अपने मुकाम पर मस्जिद को स्थापित कर दिया गया है।
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बल्देव बढ़ई की मस्जिद हर बार की तरह इस बार भी सभी ताजियों और बुर्राकों के आगे रहेगी। इसके लिए मस्जिद को सजाने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
अब्दुल रशीद, अध्यक्ष, वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई ताजिया समिति
महारानी लक्ष्मीबाई की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए ताजिया समिति की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दो साल के बाद जुलूस निकलने पर ताजिएदारों में हर्ष है।
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शमीम खान, महामंत्री, वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई ताजिया समिति
सांप्रदायिक सौहार्द की इस परंपरा की नींव झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई ने रखी थी। सन 1855 के दौरान ताजियेदारों में अपने ताजिये को जुलूस में आगे रखने की होड़ इस कदर पहुंच गई थी कि मामला महारानी लक्ष्मीबाई के दरबार तक आया। रानी ने अपनी कुशल प्रशासनिक क्षमता का परिचय देते हुए बढ़ई की मस्जिद को सबसे आगे रहने का आदेश जारी किया था। तक से लेकर आज तक यह परंपरा बदस्तूर जारी है।

बल्देव बढ़ई ने बनाया था रानी के दत्तक पुत्र का पालना
रानी लक्ष्मीबाई के दत्तक पुत्र दामोंदर राव के लिए रानी के रियासत के कुशल बढ़ई बल्देव ने लकड़ी का पालना बनाया था। जिसकी नक्काशी देखकर सभी दंग रहे गए थे। इसी से प्रभावित होकर रानी ने बल्देव को ताजिया बनाने का हुक्म दिया था। उन्होंने मस्जिद के आकार का ताजिया बनाकर सभी को अचंभित कर दिया था। बल्देव के निधन के बाद उनके वंशज लल्ला उस्ताद, धर्मदास, दयाराम ने इस जिम्मेदारी का निर्वहन किया। उनकी पांचवीं पीढ़ी प्रदीप शर्मा इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहे हैं।
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