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Jhansi News: केस दर्ज करने के बाद खंगाली जा रहीं पांच साल पुरानी फाइलें
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी, अधीक्षक अनिल तिवारी एवं अजय शर्मा समेत सात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करके विवेचना एंटी करप्शन ब्रांच के निरीक्षक को सौंप दी गई है। अब मामले की जांच के लिए पुरानी फाइलें भी खंगाली जा रही हैं। पांच साल से पुरानी फाइलें भी मांगी गई हैं। हालांकि जांच की दिशा के बारे में बात करने के लिए औपचारिक तौर पर सीबीआई टीम का कोई भी सदस्य राजी नहीं है।
सीबीआई ने इस संबंध में एसीबी ब्रांच में दर्ज कराई प्राथमिकी में बताया कि विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली कि कारोबारी 18 दिसंबर को जय अंबे प्लाईवुड एवं जय दुर्गा हार्डवेयर में तलाशी के दौरान अनिल तिवारी ने कारोबारियों से रिश्वत की मांग की थी। अनिल तिवारी ने अधिवक्ता नरेश कुमार गुप्ता को बताया कि कारोबारियों के यहां भारी मात्रा में अघोषित माल एवं आपराधिक प्रकृति के साक्ष्य प्राप्त हुए। मामले के निपटारे के साथ ही यह राशि घटाकर 50 लाख रुपये दिखाने के एवज में 1.50 करोड़ की रिश्वत मांगी गई। 23 दिसंबर को कारोबारी तेजपाल ने अपने भाई राजू को अधिवक्ता नरेश के घर 30 लाख रुपये देने को कहा। 25 दिसंबर को राजू ने जगदीश बजाज से 40 लाख रुपये उधार मांगे। सीबीआई की प्राथमिकी के मुताबिक कारोबारियों ने रियायत देने की मांग की लेकिन मैडम ने रिश्वत की रकम कम करने से मना कर दिया था। सीबीआई ने सीजीएसटी अफसरों समेत कारोबारी राजू मंगतानी, तेजपाल मंगतानी, लोकेश तोलानी एवं अधिवक्ता नरेश गुप्ता के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच लखनऊ शाखा के सीबीआई एंटी करप्शन ब्रांच के निरीक्षक आशीष कुमार सिंह को सौंप दी।
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झांसी। डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी, अधीक्षक अनिल तिवारी एवं अजय शर्मा समेत सात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करके विवेचना एंटी करप्शन ब्रांच के निरीक्षक को सौंप दी गई है। अब मामले की जांच के लिए पुरानी फाइलें भी खंगाली जा रही हैं। पांच साल से पुरानी फाइलें भी मांगी गई हैं। हालांकि जांच की दिशा के बारे में बात करने के लिए औपचारिक तौर पर सीबीआई टीम का कोई भी सदस्य राजी नहीं है।
सीबीआई ने इस संबंध में एसीबी ब्रांच में दर्ज कराई प्राथमिकी में बताया कि विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली कि कारोबारी 18 दिसंबर को जय अंबे प्लाईवुड एवं जय दुर्गा हार्डवेयर में तलाशी के दौरान अनिल तिवारी ने कारोबारियों से रिश्वत की मांग की थी। अनिल तिवारी ने अधिवक्ता नरेश कुमार गुप्ता को बताया कि कारोबारियों के यहां भारी मात्रा में अघोषित माल एवं आपराधिक प्रकृति के साक्ष्य प्राप्त हुए। मामले के निपटारे के साथ ही यह राशि घटाकर 50 लाख रुपये दिखाने के एवज में 1.50 करोड़ की रिश्वत मांगी गई। 23 दिसंबर को कारोबारी तेजपाल ने अपने भाई राजू को अधिवक्ता नरेश के घर 30 लाख रुपये देने को कहा। 25 दिसंबर को राजू ने जगदीश बजाज से 40 लाख रुपये उधार मांगे। सीबीआई की प्राथमिकी के मुताबिक कारोबारियों ने रियायत देने की मांग की लेकिन मैडम ने रिश्वत की रकम कम करने से मना कर दिया था। सीबीआई ने सीजीएसटी अफसरों समेत कारोबारी राजू मंगतानी, तेजपाल मंगतानी, लोकेश तोलानी एवं अधिवक्ता नरेश गुप्ता के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच लखनऊ शाखा के सीबीआई एंटी करप्शन ब्रांच के निरीक्षक आशीष कुमार सिंह को सौंप दी।
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