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स्वास्थ्य मंत्री का आदेश हवा, नौ दिन बाद भी कार्रवाई नहीं
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झांसी। स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली का अंदाजा इसी बात ये लगाया जा सकता है कि वह अपने विभाग के मंत्री के आदेशों तक को गंभीरता से नहीं ले रहा है। कोरोना संक्रमित गर्भवती की निजी अस्पताल में दलालों द्वारा डिलीवरी कराने के प्रकरण में मंत्री के आदेश के नौ दिनों बाद तक कार्रवाई नहीं की गई है।
महिला अस्पताल में भर्ती होने के बाद जांच सैंपल देकर मेडिकल कॉलेज में डिलीवरी कराने के लिए चली गई महिला और उसके परिजन बीच में दलालों के संपर्क में आ गए थे। इसी बीच महिला की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। जबकि, नर्सिंगहोम में दलालों ने सांठगांठ कर महिला की सिजेरियन डिलीवरी भी करा दी। इसकी सूचना भी किसी को नहीं दी। कोरोना महामारी के लिए यह हालात कितने खतरनाक हो सकते हैं, इसको अमर उजाला ने अपनी खबर में उजागर किया। इसके बावजूद सीएमओ ने जांच तक करानी जरूरी नहीं समझी। छह जुलाई को गरौठा विधायक जवाहर लाल राजपूत ने खबर का संज्ञान लेते हुए लखनऊ में सीधे स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह के सामने यह मामला रख दिया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की लचर कार्यप्रणाली की शिकायत भी की। साथ ही, विभाग में जल्द बदलाव करने की मांग की। मंत्री ने भी मामले को गंभीर मानते हुए सीएमओ से जांच कर रिपोर्ट भेजने के लिए कहा। उनके आदेश के नौ दिनों बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस मामले में सीएमओ डॉ. जीके निगम से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका फोन नहीं उठा।
ये बात सामने आई
मंत्री के आदेश के बाद शुरू हुई जांच में डॉक्टर, नर्सिंगहोम प्रबंधक, गर्भवती के परिजनों के बयान दर्ज हो चुके हैं। इसमें मुख्य बात ये निकलकर सामने आई कि नर्सिंगहोम ने भी महिला का सैंपल लेकर कोरोना जांच के लिए भेजा था। बाद में रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो उसे मेडिकल कॉलेज जाने के लिए कह दिया गया। वहीं, महिला अपने घर चली गई।
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महिला अस्पताल में भर्ती होने के बाद जांच सैंपल देकर मेडिकल कॉलेज में डिलीवरी कराने के लिए चली गई महिला और उसके परिजन बीच में दलालों के संपर्क में आ गए थे। इसी बीच महिला की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। जबकि, नर्सिंगहोम में दलालों ने सांठगांठ कर महिला की सिजेरियन डिलीवरी भी करा दी। इसकी सूचना भी किसी को नहीं दी। कोरोना महामारी के लिए यह हालात कितने खतरनाक हो सकते हैं, इसको अमर उजाला ने अपनी खबर में उजागर किया। इसके बावजूद सीएमओ ने जांच तक करानी जरूरी नहीं समझी। छह जुलाई को गरौठा विधायक जवाहर लाल राजपूत ने खबर का संज्ञान लेते हुए लखनऊ में सीधे स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह के सामने यह मामला रख दिया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की लचर कार्यप्रणाली की शिकायत भी की। साथ ही, विभाग में जल्द बदलाव करने की मांग की। मंत्री ने भी मामले को गंभीर मानते हुए सीएमओ से जांच कर रिपोर्ट भेजने के लिए कहा। उनके आदेश के नौ दिनों बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस मामले में सीएमओ डॉ. जीके निगम से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका फोन नहीं उठा।
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ये बात सामने आई
मंत्री के आदेश के बाद शुरू हुई जांच में डॉक्टर, नर्सिंगहोम प्रबंधक, गर्भवती के परिजनों के बयान दर्ज हो चुके हैं। इसमें मुख्य बात ये निकलकर सामने आई कि नर्सिंगहोम ने भी महिला का सैंपल लेकर कोरोना जांच के लिए भेजा था। बाद में रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो उसे मेडिकल कॉलेज जाने के लिए कह दिया गया। वहीं, महिला अपने घर चली गई।
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