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कोरोना काल में कैसे बढ़ाएगा इम्युनिटी, मिलावटखोर दूध को बना रहे कमजोर
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adulteration in milk
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झांसी। यदि आप कोरोना काल में सेहतमंद बनने के लिए दूध पी रहे हैं तो सावधान हो जाएं। शहर में फैट निकालकर, पानी मिलाकर दूध बेचा जा रहा है। जिसे पीने से सेहत में सुधार तो नहीं होगा, उल्टे बच्चे बीमार पड़ सकते हैं। पिछले छह महीनों में दूध के 11 में से 7 नमूने जांच में फेल हो चुके हैं।
शहर में सड़कों के किनारे जगह-जगह दूध की दुकानें खुल गई हैं। पैकेट वाले दूध की तुलना में इन दुकानों का दूध सस्ता पड़ने की वजह से लोग खरीदते भी खूब हैं मगर ग्राहकों को यह पता नहीं होता कि सेहत सुधारने के लिए खरीदा जाने वाला दूध स्वास्थ्य बिगाड़ सकता है। शहर में धड़ल्ले से फैट निकालकर दूध बेचा जा रहा है। इससे दूध में मौजूद सेहत सुधारने से जुड़े आवश्यक तत्व जैसे कि कैल्शियम, मिनिरल, कैलोरी की मात्रा कम हो जाती है। वहीं, पानी साफ न होने से डायरिया, हैजा बीमारी होने की भी संभावना रहती है।
खाद्य विभाग की तरफ से पिछले छह महीने में दूध के 15 नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। इसमें से 11 की जांच रिपोर्ट आ चुकी है, जिसमें सात फेल हो चुके हैं। बताया गया कि निकाले गए फैट को घी बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। ऐसे में दूध विक्रेता लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर दो तरफा कमाई करते हैं।
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बिना बताए क्रीम निकाल दूध बेचना अपराध
क्रीम निकालकर ग्राहक को दूध बेचना पूरी तरह से गैर कानूनी है। यह अपराध है और ग्राहक का हक मारने जैसा है। हालांकि, कुछ कंपनियां भी टोंड दूध बेचती हैं, लेकिन वो इस संबंध में बाकायदा पैकिंग पर लिखती हैं, जिससे ग्राहक को पता होता है कि वह जो दूध खरीद रहा है, उसमें कितना फैट है।
ये हैं मानक
सामान्यत: दूध में फैट की मात्रा मानक के अनुरूप होनी चाहिए। भैंस के दूध में 6 प्रतिशत फैट ओर नौ प्रतिशत एसएनएफ और गाय के दूध में 4 तक फैट और साढ़े आठ प्रतिशत तक एसएनएफ होना चाहिए।
दूध के लगातार सैंपल लिए जा रहे हैं। पिछले छह महीने में ही 15 नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं, जिसमें से 11 की रिपोर्ट आ चुकी है। सात नमूनों में फैट की मात्रा कम मिली है। इनके खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। - नरेंद्र कुमार, प्रभारी अभिहीत अधिकारी।
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शहर में सड़कों के किनारे जगह-जगह दूध की दुकानें खुल गई हैं। पैकेट वाले दूध की तुलना में इन दुकानों का दूध सस्ता पड़ने की वजह से लोग खरीदते भी खूब हैं मगर ग्राहकों को यह पता नहीं होता कि सेहत सुधारने के लिए खरीदा जाने वाला दूध स्वास्थ्य बिगाड़ सकता है। शहर में धड़ल्ले से फैट निकालकर दूध बेचा जा रहा है। इससे दूध में मौजूद सेहत सुधारने से जुड़े आवश्यक तत्व जैसे कि कैल्शियम, मिनिरल, कैलोरी की मात्रा कम हो जाती है। वहीं, पानी साफ न होने से डायरिया, हैजा बीमारी होने की भी संभावना रहती है।
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खाद्य विभाग की तरफ से पिछले छह महीने में दूध के 15 नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। इसमें से 11 की जांच रिपोर्ट आ चुकी है, जिसमें सात फेल हो चुके हैं। बताया गया कि निकाले गए फैट को घी बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। ऐसे में दूध विक्रेता लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर दो तरफा कमाई करते हैं।
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बिना बताए क्रीम निकाल दूध बेचना अपराध
क्रीम निकालकर ग्राहक को दूध बेचना पूरी तरह से गैर कानूनी है। यह अपराध है और ग्राहक का हक मारने जैसा है। हालांकि, कुछ कंपनियां भी टोंड दूध बेचती हैं, लेकिन वो इस संबंध में बाकायदा पैकिंग पर लिखती हैं, जिससे ग्राहक को पता होता है कि वह जो दूध खरीद रहा है, उसमें कितना फैट है।
ये हैं मानक
सामान्यत: दूध में फैट की मात्रा मानक के अनुरूप होनी चाहिए। भैंस के दूध में 6 प्रतिशत फैट ओर नौ प्रतिशत एसएनएफ और गाय के दूध में 4 तक फैट और साढ़े आठ प्रतिशत तक एसएनएफ होना चाहिए।
दूध के लगातार सैंपल लिए जा रहे हैं। पिछले छह महीने में ही 15 नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं, जिसमें से 11 की रिपोर्ट आ चुकी है। सात नमूनों में फैट की मात्रा कम मिली है। इनके खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। - नरेंद्र कुमार, प्रभारी अभिहीत अधिकारी।