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मास्क को हथियार बनाकर कोरोना से जंग लड़ रहीं अदिति
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झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण के खिलाफ जारी जंग में अदिति राकेश श्रीवास्तव ने अपनी अलग पहचान बना रखी है। कोरोना काल की शुुरुआत के साथ ही वे मैदान में उतर गईं थीं और अब तक लगातार डटी हुईं हैं। इस महामारी के खिलाफ जारी लड़ाई में उन्होंने सबसे बड़ा हथियार मास्क को बनाया है। अब तक वे दस हजार से अधिक मास्क बांट चुकी हैं। इतना ही नहीं, वे महिलाओं को सैनिटरी पैड भी नि:शुल्क उपलब्ध कराती हैं। खासतौर पर उनका फोकस वंचित वर्ग की महिलाओं पर रहता है।
वैसे तो अदिती पेशे से एक सैनिटरी पैड बनाने वाली कंपनी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं और वे अमर उजाला के बेस ग्रुप से जुड़ी हुईं हैं। अपनी कंपनी के सैनिटरी पैड वे शुरुआत से ही वंचित वर्ग की महिलाओं को निशुल्क उपलब्ध कराती आ रही हैं। लेकिन, कोरोना काल की शुरुआत होते ही उन्होंने मास्क बांटना शुरू कर दिया गया है। अप्रैल से लेकर अब तक वे दस हजार से अधिक मास्क बांट चुकी हैं। उनका ये काम लगातार जारी है। झुग्गी - झोपड़ियों में रहने वाले हों या घरों में काम करने वाली महिलाएं। इसके अलावा सब्जी, फल के ठेले लगाने वाले व अन्य छोटे-मोटे काम करने वालों को मास्क देती आ रही हैं। अब तो स्थिति ये है कि लोग मास्क लेने के बेधड़क खुद उनके पास पहुंच जाते हैं।
अमर उजाला से हुई बातचीत में अदिति ने कहा कि देश सेवा का मतलब केवल सीमा पर जाकर दुश्मन सेनाओं से लड़ना नहीं है, कोरोना महामारी जैसी आपदाओं के खिलाफ खड़े होना भी देश सेवा ही है। आप यदि खुद को भी इस बीमारी से बचा रहे हैं, तो भी आप देश की सेवा कर रहे हैं।
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वैसे तो अदिती पेशे से एक सैनिटरी पैड बनाने वाली कंपनी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं और वे अमर उजाला के बेस ग्रुप से जुड़ी हुईं हैं। अपनी कंपनी के सैनिटरी पैड वे शुरुआत से ही वंचित वर्ग की महिलाओं को निशुल्क उपलब्ध कराती आ रही हैं। लेकिन, कोरोना काल की शुरुआत होते ही उन्होंने मास्क बांटना शुरू कर दिया गया है। अप्रैल से लेकर अब तक वे दस हजार से अधिक मास्क बांट चुकी हैं। उनका ये काम लगातार जारी है। झुग्गी - झोपड़ियों में रहने वाले हों या घरों में काम करने वाली महिलाएं। इसके अलावा सब्जी, फल के ठेले लगाने वाले व अन्य छोटे-मोटे काम करने वालों को मास्क देती आ रही हैं। अब तो स्थिति ये है कि लोग मास्क लेने के बेधड़क खुद उनके पास पहुंच जाते हैं।
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अमर उजाला से हुई बातचीत में अदिति ने कहा कि देश सेवा का मतलब केवल सीमा पर जाकर दुश्मन सेनाओं से लड़ना नहीं है, कोरोना महामारी जैसी आपदाओं के खिलाफ खड़े होना भी देश सेवा ही है। आप यदि खुद को भी इस बीमारी से बचा रहे हैं, तो भी आप देश की सेवा कर रहे हैं।
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