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213 बोरियों से भरी पिकअप पलटने से किसान की मौत, पांच घायल
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झांसी। मूंगफली की 213 बोरियों से भरी पिकअप के पलटने से एक किसान की मौत हो गई, जबकि पांच घायल हो गए। सभी किसान बोरियों के ऊपर बैठे थे। वह अपनी उपज बेचने भोजला मंडी जा रहे थे। घटना के बाद चालक गाड़ी लेकर भाग गया।
ग्राम खिसनी निवासी गनपत (35) गांव के परमलाल, गयादीन, भैयालाल व राजू कुशवाहा समेत आठ किसानों के साथ मूंगफली बेचने भोजला मंडी जा रहा था। पिकअप गांव के रघुवर की थी। ज्यादा कमाई के चक्कर में रघुवर ने पिकअप को ओवरलोड कर लिया। उसने गाड़ी में 213 बोरी लाद लीं थीं। इसके अलावा बोरियों के ऊपर छह किसानों को बैठा लिया था, जबकि दो किसान गाड़ी में आगे बैठे थे। किसान परमलाल ने बताया कि ठसाठस भरी होने के कारण चलते ही गाड़ी अनियंत्रित होने लगी। इस पर छह किसान गाड़ी से उतर गए और ऑटो से रवाना हो गए। लेकिन, तकरीबन पांच किमी आगे चलने पर रघुवर ने ऑटो रुकवाकर किसानों को फिर से पिकअप में बैठा लिया।
गाड़ी में माल अधिक होने की वजह से कुछ दूर चलने पर बोरियों पर बंधी रस्सियां खुल गईं, जिससे बोरियां गिरने लगीं। यह देख रस्सियों को दोबारा बांधकर सभी लोग पिकअप में सवार होकर फिर आगे बढ़ने लगे। इसी दरम्यान बरुआसागर में गाड़ी अनियंत्रित होकर पलट गई, जिससे ऊपर बैठे किसान बोरियों के नीचे दबकर घायल हो गए। आनन-फानन उन्हें एक निजी अस्पताल ले जा गया, जहां गनपत की मौत हो गई।
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त्योहार से पहले तीन बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
झांसी। मृतक के परिवार में पत्नी गणेशी के अलावा तीन बच्चे करिश्मा (10), उमा (8) व सोनू (6) हैं। त्योहार के ठीक पहले हुए इस हादसे से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग कह रहे कि त्योहार से पहले बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। गांव का माहौल गमगीन है।
घायलों के कपड़ों में लगा खून साफ करवाने कुएं पर ले गया था चालक, घर पर भी लगा ताला
झांसी। किसान परमलाल ने बताया कि हादसे में उन्हें व भैयालाल को अंदरूनी चोटें आईं हैं। उन्होंने बताया कि अन्य घायलों का खून उनके कपड़ों पर लग गया था। इस पर ड्राइवर रघुवर उन्हें पास के एक कुएं पर ले गया, जहां उसने कपड़े धुलवाकर खून साफ करा दिया, ताकि, दुर्घटना का कोई सुबूत न रहे। इसके बाद वह गाड़ी लेकर भाग गया। उसके घर पर भी ताला पड़ा हुआ है। बाद में बोरियों को दूसरी पिकअप व ट्रैक्टर में लादकर मंडी भेजा गया।
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ग्राम खिसनी निवासी गनपत (35) गांव के परमलाल, गयादीन, भैयालाल व राजू कुशवाहा समेत आठ किसानों के साथ मूंगफली बेचने भोजला मंडी जा रहा था। पिकअप गांव के रघुवर की थी। ज्यादा कमाई के चक्कर में रघुवर ने पिकअप को ओवरलोड कर लिया। उसने गाड़ी में 213 बोरी लाद लीं थीं। इसके अलावा बोरियों के ऊपर छह किसानों को बैठा लिया था, जबकि दो किसान गाड़ी में आगे बैठे थे। किसान परमलाल ने बताया कि ठसाठस भरी होने के कारण चलते ही गाड़ी अनियंत्रित होने लगी। इस पर छह किसान गाड़ी से उतर गए और ऑटो से रवाना हो गए। लेकिन, तकरीबन पांच किमी आगे चलने पर रघुवर ने ऑटो रुकवाकर किसानों को फिर से पिकअप में बैठा लिया।
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गाड़ी में माल अधिक होने की वजह से कुछ दूर चलने पर बोरियों पर बंधी रस्सियां खुल गईं, जिससे बोरियां गिरने लगीं। यह देख रस्सियों को दोबारा बांधकर सभी लोग पिकअप में सवार होकर फिर आगे बढ़ने लगे। इसी दरम्यान बरुआसागर में गाड़ी अनियंत्रित होकर पलट गई, जिससे ऊपर बैठे किसान बोरियों के नीचे दबकर घायल हो गए। आनन-फानन उन्हें एक निजी अस्पताल ले जा गया, जहां गनपत की मौत हो गई।
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त्योहार से पहले तीन बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
झांसी। मृतक के परिवार में पत्नी गणेशी के अलावा तीन बच्चे करिश्मा (10), उमा (8) व सोनू (6) हैं। त्योहार के ठीक पहले हुए इस हादसे से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग कह रहे कि त्योहार से पहले बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। गांव का माहौल गमगीन है।
घायलों के कपड़ों में लगा खून साफ करवाने कुएं पर ले गया था चालक, घर पर भी लगा ताला
झांसी। किसान परमलाल ने बताया कि हादसे में उन्हें व भैयालाल को अंदरूनी चोटें आईं हैं। उन्होंने बताया कि अन्य घायलों का खून उनके कपड़ों पर लग गया था। इस पर ड्राइवर रघुवर उन्हें पास के एक कुएं पर ले गया, जहां उसने कपड़े धुलवाकर खून साफ करा दिया, ताकि, दुर्घटना का कोई सुबूत न रहे। इसके बाद वह गाड़ी लेकर भाग गया। उसके घर पर भी ताला पड़ा हुआ है। बाद में बोरियों को दूसरी पिकअप व ट्रैक्टर में लादकर मंडी भेजा गया।