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रसातल में पानी, बदतर हुई जिंदगानी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 11 Apr 2016 01:00 AM IST
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dry bundelkhand, jhansi news
- फोटो : amarujala
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पाली (ललितपुर)। सूखे की समस्या से बचने के लिए कोई किसान पलायन कर रहा है और जो संकट झेल नहीं पाते वह आत्महत्या का रास्ता चुन रहे हैं। सूखा की विभीषिका झेल रहे मवेशी भी पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। अभी अप्रैल में ही हालात इतने बिगड़ गए हैं कि लोगों को प्यास बुझाने के लिए काफी पसीना बहाना पड़ रहा है। रसातल में पहुंचे इस पानी के लिए लोग परेशान हैं। पानी के लिए परेशान लोगों का कहना है कि अब तक जनप्रतिनिधियों के वायदों के घूंट पीते रहे हैं, लेकिन पेयजल व्यवस्था है कि सुधरने का नाम नहीं ले रही।
जिला मुख्यालय से 25 किमी दूरी पर स्थित तहसील पाली और इसके ग्रामीण क्षेत्रों में उम्मीदों को ठेंगा दिखने वाली बारिश हुई, जिसका नतीजा किसानों की सैकड़ों एकड़ भूमि खाली पड़ी रही। लोग रोजगार की तलाश में पलायन करने को मजबूर हो गए। जिन किसानों ने अपनी जमा पूंजी खर्च कर उम्मीद के साथ खेतों में बीज डाल दिया था, उनको भी निराशा ही हाथ लगी। पाली में बड़े पैमाने पर पान की खेती होती है। लगभग 450 पान किसान इसी खेती पर आश्रित हैं। सूखे की मार और पानी की कमी के कारण पान की खेती को बचाए रखना बड़ा मुश्किल हो गया है। गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए है। चारों तरफ पानी की भारी किल्लत मची हुई है। यहां तक कि जंगलों में विचरण कर रहे जानवरों के समक्ष भी पानी के लाले पड़े हैं।
पठारी क्षेत्रों में पानी के लिए बहाना पड़ता है पसीना
पाली। कस्बा पाली से कनपुरा घाटी की दूरी तीन किमी है। घाटी के ऊपर से पठारी क्षेत्र शुरू हो जाता है, जो मध्य प्रदेश से सटे ग्राम पंचायत बालाबेहट तक फैला है। यहां का क्षेत्र पत्थर की खदान के रूप में बड़ी मंडी माना जाता है। जहां देखो बेशकीमती पत्थर धरती के सीने में मिल जाता है। पत्थर को चीर कर धरती से पानी का निकलना कम ही होता है। ऐसे में लोग प्राकृतिक जल स्रोतों के भरोसे अकाम चला रहे हैं। कनपुरा घाटी पर बसे गांव के लोग घाटी के नीचे जाकर झरने व जलकुंड से पानी लाते है। पानी लाते समय इन्हें लंबे सफर के साथ 500 फुट की चढ़ाई करनी पड़ती है। गर्मियों में हैंडपंप साथ छोड़ देते हैं। ऐसे में पानी भरने की जिम्मेदारी घर के युवा लोगों के कंधों पर होती है।
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इन गांवों में भी किल्लत
पाली। ग्राम रमपुरा, करमरा, पड़ना, दूधई, डुंगरिया, राधापुर और बम्हौरी पिपरिया में भी पानी की किल्लत है। जो हैंडपंप लगे हैं, उनमें कुछ ठीक हैं तो कुछ दम तोड़ने की कगार पर आ चुके हैं।
जंगल में अमंगल की दस्तक
पाली। पाली के आसपास का क्षेत्र विध्यांचल पर्वत की घनी वादियों से घिरा है। इन वादियों में हिरन, मोर, खरगोश, चीतल आदि जानवरों रहते हैं। जंगलों से सूखी लकड़ी व जड़ी-बूटी बीनकर लाने वाले लोगों का कहना है कि जंगलों में दूर-दूर तक पानी नहीं दिखाई दे रहा है। पशु-पक्षी पानी की तलाश में लंबा रास्ता नापने लगे हैं। पक्षियों ने भी ठिकाना बदलना शुरू कर दिया है। यदि पानी की कमी नहीं होती तो गर्मियों के मौसम में कई प्रवासी पक्षी अब तक विध्यांचल के जंगल में आ जाते हैं। जंगलों पर आश्रित लोगों का कहना है कि सूखा के कारण महुए के वृक्षों में महुआ फूल व फल कम ही देखने को मिल रहे है। घंटों बीनने के बाद भी झोली पूरी नहीं भर पाती है।
प्राकृतिक जल स्रोत भी हारे
पाली। नदियों की धार गुम हो गई है। नदियों में लंबा सफर करने के बाद कुछ जल कुंड जरूर बचे हैं। पानी के लिए लोग यह सफर भी तय कर रहे है। चुवन आश्रम का झरना, जो कभी पहाड़ों से गिरकर बंट तालाब से होता हुआ गोविंद सागर बांध ललितपुर तक पहुंचता है। बरसात के मौसम में यह झरना लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता था, लेकिन सूखे के कारण पहाड़ो से गिरने वाला झरना बंद हो गया है। पर्यटन स्थल श्री नीलकंठेश्वर धाम के पास से निकलने वाला झरने के स्वर भी शांत पड़ गए हैं।
आगे क्या होगा राम जाने?
पाली। बुंदेलखंड का कोई भी क्षेत्र क्यों न हो, समस्या आने पर यहां के लोग आस्था का बड़ा सहारा लेते हैं। ऐसा ही अब हो रहा है। पानी की समस्या से जूझ रहे लोग नवरात्र पर्व पर माता रानी के दरबार में बढ़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। उनके समक्ष अर्जी लगा रहे हैं कि बिगड़ी मेरी बना दे मां शेरों वाली मईया... आस्था से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि पानी की कमी से मुक्ति पाने के लिए विशेष पूजा अर्चना की जा रही है। इसके बाद आगे क्या होगा राम जाने?
ग्राम पंचायत करमरा के साथ चारों तरफ पानी की बड़ी किल्लत देखी जा रही है। पानी को बचाने व लोगों तक पानी पहुंचाने के लिए सभी ग्राम प्रधानों को एकजुट होकर अपने क्षेत्र की समस्याओं से निपटना होगा।
- जितेंद्र सिंह जीतू राजा
अध्यक्ष प्रधान संघ
ग्राम बंशा बम्होरी और पठारी क्षेत्रों में पानी की समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। ऐसे में उच्चाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को आगे आकर समस्या की मदद को आगे आना चाहिए।
- प्रतिपाल यादव
ग्राम प्रधान
ग्राम पंचायत पड़ना में नए हैंडपंप लगवाए जाएंगे। साथ में रीबोर के लिए पत्र लिख दिया गया है। जल्द से जल्द हैंडपंप रीबोर कराए जाएंगे।
- नत्थू सिंह
पाली (ललितपुर)। सूखे की समस्या से बचने के लिए कोई किसान पलायन कर रहा है और जो संकट झेल नहीं पाते वह आत्महत्या का रास्ता चुन रहे हैं। सूखा की विभीषिका झेल रहे मवेशी भी पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। अभी अप्रैल में ही हालात इतने बिगड़ गए हैं कि लोगों को प्यास बुझाने के लिए काफी पसीना बहाना पड़ रहा है। रसातल में पहुंचे इस पानी के लिए लोग परेशान हैं। पानी के लिए परेशान लोगों का कहना है कि अब तक जनप्रतिनिधियों के वायदों के घूंट पीते रहे हैं, लेकिन पेयजल व्यवस्था है कि सुधरने का नाम नहीं ले रही।
जिला मुख्यालय से 25 किमी दूरी पर स्थित तहसील पाली और इसके ग्रामीण क्षेत्रों में उम्मीदों को ठेंगा दिखने वाली बारिश हुई, जिसका नतीजा किसानों की सैकड़ों एकड़ भूमि खाली पड़ी रही। लोग रोजगार की तलाश में पलायन करने को मजबूर हो गए। जिन किसानों ने अपनी जमा पूंजी खर्च कर उम्मीद के साथ खेतों में बीज डाल दिया था, उनको भी निराशा ही हाथ लगी। पाली में बड़े पैमाने पर पान की खेती होती है। लगभग 450 पान किसान इसी खेती पर आश्रित हैं। सूखे की मार और पानी की कमी के कारण पान की खेती को बचाए रखना बड़ा मुश्किल हो गया है। गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए है। चारों तरफ पानी की भारी किल्लत मची हुई है। यहां तक कि जंगलों में विचरण कर रहे जानवरों के समक्ष भी पानी के लाले पड़े हैं।
पठारी क्षेत्रों में पानी के लिए बहाना पड़ता है पसीना
पाली। कस्बा पाली से कनपुरा घाटी की दूरी तीन किमी है। घाटी के ऊपर से पठारी क्षेत्र शुरू हो जाता है, जो मध्य प्रदेश से सटे ग्राम पंचायत बालाबेहट तक फैला है। यहां का क्षेत्र पत्थर की खदान के रूप में बड़ी मंडी माना जाता है। जहां देखो बेशकीमती पत्थर धरती के सीने में मिल जाता है। पत्थर को चीर कर धरती से पानी का निकलना कम ही होता है। ऐसे में लोग प्राकृतिक जल स्रोतों के भरोसे अकाम चला रहे हैं। कनपुरा घाटी पर बसे गांव के लोग घाटी के नीचे जाकर झरने व जलकुंड से पानी लाते है। पानी लाते समय इन्हें लंबे सफर के साथ 500 फुट की चढ़ाई करनी पड़ती है। गर्मियों में हैंडपंप साथ छोड़ देते हैं। ऐसे में पानी भरने की जिम्मेदारी घर के युवा लोगों के कंधों पर होती है।
इन गांवों में भी किल्लत
पाली। ग्राम रमपुरा, करमरा, पड़ना, दूधई, डुंगरिया, राधापुर और बम्हौरी पिपरिया में भी पानी की किल्लत है। जो हैंडपंप लगे हैं, उनमें कुछ ठीक हैं तो कुछ दम तोड़ने की कगार पर आ चुके हैं।
जंगल में अमंगल की दस्तक
पाली। पाली के आसपास का क्षेत्र विध्यांचल पर्वत की घनी वादियों से घिरा है। इन वादियों में हिरन, मोर, खरगोश, चीतल आदि जानवरों रहते हैं। जंगलों से सूखी लकड़ी व जड़ी-बूटी बीनकर लाने वाले लोगों का कहना है कि जंगलों में दूर-दूर तक पानी नहीं दिखाई दे रहा है। पशु-पक्षी पानी की तलाश में लंबा रास्ता नापने लगे हैं। पक्षियों ने भी ठिकाना बदलना शुरू कर दिया है। यदि पानी की कमी नहीं होती तो गर्मियों के मौसम में कई प्रवासी पक्षी अब तक विध्यांचल के जंगल में आ जाते हैं। जंगलों पर आश्रित लोगों का कहना है कि सूखा के कारण महुए के वृक्षों में महुआ फूल व फल कम ही देखने को मिल रहे है। घंटों बीनने के बाद भी झोली पूरी नहीं भर पाती है।
प्राकृतिक जल स्रोत भी हारे
पाली। नदियों की धार गुम हो गई है। नदियों में लंबा सफर करने के बाद कुछ जल कुंड जरूर बचे हैं। पानी के लिए लोग यह सफर भी तय कर रहे है। चुवन आश्रम का झरना, जो कभी पहाड़ों से गिरकर बंट तालाब से होता हुआ गोविंद सागर बांध ललितपुर तक पहुंचता है। बरसात के मौसम में यह झरना लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता था, लेकिन सूखे के कारण पहाड़ो से गिरने वाला झरना बंद हो गया है। पर्यटन स्थल श्री नीलकंठेश्वर धाम के पास से निकलने वाला झरने के स्वर भी शांत पड़ गए हैं।
आगे क्या होगा राम जाने?
पाली। बुंदेलखंड का कोई भी क्षेत्र क्यों न हो, समस्या आने पर यहां के लोग आस्था का बड़ा सहारा लेते हैं। ऐसा ही अब हो रहा है। पानी की समस्या से जूझ रहे लोग नवरात्र पर्व पर माता रानी के दरबार में बढ़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। उनके समक्ष अर्जी लगा रहे हैं कि बिगड़ी मेरी बना दे मां शेरों वाली मईया... आस्था से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि पानी की कमी से मुक्ति पाने के लिए विशेष पूजा अर्चना की जा रही है। इसके बाद आगे क्या होगा राम जाने?
ग्राम पंचायत करमरा के साथ चारों तरफ पानी की बड़ी किल्लत देखी जा रही है। पानी को बचाने व लोगों तक पानी पहुंचाने के लिए सभी ग्राम प्रधानों को एकजुट होकर अपने क्षेत्र की समस्याओं से निपटना होगा।
- जितेंद्र सिंह जीतू राजा
अध्यक्ष प्रधान संघ
ग्राम बंशा बम्होरी और पठारी क्षेत्रों में पानी की समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। ऐसे में उच्चाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को आगे आकर समस्या की मदद को आगे आना चाहिए।
- प्रतिपाल यादव
ग्राम प्रधान
ग्राम पंचायत पड़ना में नए हैंडपंप लगवाए जाएंगे। साथ में रीबोर के लिए पत्र लिख दिया गया है। जल्द से जल्द हैंडपंप रीबोर कराए जाएंगे।
- नत्थू सिंह
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जिला मुख्यालय से 25 किमी दूरी पर स्थित तहसील पाली और इसके ग्रामीण क्षेत्रों में उम्मीदों को ठेंगा दिखने वाली बारिश हुई, जिसका नतीजा किसानों की सैकड़ों एकड़ भूमि खाली पड़ी रही। लोग रोजगार की तलाश में पलायन करने को मजबूर हो गए। जिन किसानों ने अपनी जमा पूंजी खर्च कर उम्मीद के साथ खेतों में बीज डाल दिया था, उनको भी निराशा ही हाथ लगी। पाली में बड़े पैमाने पर पान की खेती होती है। लगभग 450 पान किसान इसी खेती पर आश्रित हैं। सूखे की मार और पानी की कमी के कारण पान की खेती को बचाए रखना बड़ा मुश्किल हो गया है। गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए है। चारों तरफ पानी की भारी किल्लत मची हुई है। यहां तक कि जंगलों में विचरण कर रहे जानवरों के समक्ष भी पानी के लाले पड़े हैं।
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पठारी क्षेत्रों में पानी के लिए बहाना पड़ता है पसीना
पाली। कस्बा पाली से कनपुरा घाटी की दूरी तीन किमी है। घाटी के ऊपर से पठारी क्षेत्र शुरू हो जाता है, जो मध्य प्रदेश से सटे ग्राम पंचायत बालाबेहट तक फैला है। यहां का क्षेत्र पत्थर की खदान के रूप में बड़ी मंडी माना जाता है। जहां देखो बेशकीमती पत्थर धरती के सीने में मिल जाता है। पत्थर को चीर कर धरती से पानी का निकलना कम ही होता है। ऐसे में लोग प्राकृतिक जल स्रोतों के भरोसे अकाम चला रहे हैं। कनपुरा घाटी पर बसे गांव के लोग घाटी के नीचे जाकर झरने व जलकुंड से पानी लाते है। पानी लाते समय इन्हें लंबे सफर के साथ 500 फुट की चढ़ाई करनी पड़ती है। गर्मियों में हैंडपंप साथ छोड़ देते हैं। ऐसे में पानी भरने की जिम्मेदारी घर के युवा लोगों के कंधों पर होती है।
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इन गांवों में भी किल्लत
पाली। ग्राम रमपुरा, करमरा, पड़ना, दूधई, डुंगरिया, राधापुर और बम्हौरी पिपरिया में भी पानी की किल्लत है। जो हैंडपंप लगे हैं, उनमें कुछ ठीक हैं तो कुछ दम तोड़ने की कगार पर आ चुके हैं।
जंगल में अमंगल की दस्तक
पाली। पाली के आसपास का क्षेत्र विध्यांचल पर्वत की घनी वादियों से घिरा है। इन वादियों में हिरन, मोर, खरगोश, चीतल आदि जानवरों रहते हैं। जंगलों से सूखी लकड़ी व जड़ी-बूटी बीनकर लाने वाले लोगों का कहना है कि जंगलों में दूर-दूर तक पानी नहीं दिखाई दे रहा है। पशु-पक्षी पानी की तलाश में लंबा रास्ता नापने लगे हैं। पक्षियों ने भी ठिकाना बदलना शुरू कर दिया है। यदि पानी की कमी नहीं होती तो गर्मियों के मौसम में कई प्रवासी पक्षी अब तक विध्यांचल के जंगल में आ जाते हैं। जंगलों पर आश्रित लोगों का कहना है कि सूखा के कारण महुए के वृक्षों में महुआ फूल व फल कम ही देखने को मिल रहे है। घंटों बीनने के बाद भी झोली पूरी नहीं भर पाती है।
प्राकृतिक जल स्रोत भी हारे
पाली। नदियों की धार गुम हो गई है। नदियों में लंबा सफर करने के बाद कुछ जल कुंड जरूर बचे हैं। पानी के लिए लोग यह सफर भी तय कर रहे है। चुवन आश्रम का झरना, जो कभी पहाड़ों से गिरकर बंट तालाब से होता हुआ गोविंद सागर बांध ललितपुर तक पहुंचता है। बरसात के मौसम में यह झरना लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता था, लेकिन सूखे के कारण पहाड़ो से गिरने वाला झरना बंद हो गया है। पर्यटन स्थल श्री नीलकंठेश्वर धाम के पास से निकलने वाला झरने के स्वर भी शांत पड़ गए हैं।
आगे क्या होगा राम जाने?
पाली। बुंदेलखंड का कोई भी क्षेत्र क्यों न हो, समस्या आने पर यहां के लोग आस्था का बड़ा सहारा लेते हैं। ऐसा ही अब हो रहा है। पानी की समस्या से जूझ रहे लोग नवरात्र पर्व पर माता रानी के दरबार में बढ़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। उनके समक्ष अर्जी लगा रहे हैं कि बिगड़ी मेरी बना दे मां शेरों वाली मईया... आस्था से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि पानी की कमी से मुक्ति पाने के लिए विशेष पूजा अर्चना की जा रही है। इसके बाद आगे क्या होगा राम जाने?
ग्राम पंचायत करमरा के साथ चारों तरफ पानी की बड़ी किल्लत देखी जा रही है। पानी को बचाने व लोगों तक पानी पहुंचाने के लिए सभी ग्राम प्रधानों को एकजुट होकर अपने क्षेत्र की समस्याओं से निपटना होगा।
- जितेंद्र सिंह जीतू राजा
अध्यक्ष प्रधान संघ
ग्राम बंशा बम्होरी और पठारी क्षेत्रों में पानी की समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। ऐसे में उच्चाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को आगे आकर समस्या की मदद को आगे आना चाहिए।
- प्रतिपाल यादव
ग्राम प्रधान
ग्राम पंचायत पड़ना में नए हैंडपंप लगवाए जाएंगे। साथ में रीबोर के लिए पत्र लिख दिया गया है। जल्द से जल्द हैंडपंप रीबोर कराए जाएंगे।
- नत्थू सिंह
पाली (ललितपुर)। सूखे की समस्या से बचने के लिए कोई किसान पलायन कर रहा है और जो संकट झेल नहीं पाते वह आत्महत्या का रास्ता चुन रहे हैं। सूखा की विभीषिका झेल रहे मवेशी भी पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। अभी अप्रैल में ही हालात इतने बिगड़ गए हैं कि लोगों को प्यास बुझाने के लिए काफी पसीना बहाना पड़ रहा है। रसातल में पहुंचे इस पानी के लिए लोग परेशान हैं। पानी के लिए परेशान लोगों का कहना है कि अब तक जनप्रतिनिधियों के वायदों के घूंट पीते रहे हैं, लेकिन पेयजल व्यवस्था है कि सुधरने का नाम नहीं ले रही।
जिला मुख्यालय से 25 किमी दूरी पर स्थित तहसील पाली और इसके ग्रामीण क्षेत्रों में उम्मीदों को ठेंगा दिखने वाली बारिश हुई, जिसका नतीजा किसानों की सैकड़ों एकड़ भूमि खाली पड़ी रही। लोग रोजगार की तलाश में पलायन करने को मजबूर हो गए। जिन किसानों ने अपनी जमा पूंजी खर्च कर उम्मीद के साथ खेतों में बीज डाल दिया था, उनको भी निराशा ही हाथ लगी। पाली में बड़े पैमाने पर पान की खेती होती है। लगभग 450 पान किसान इसी खेती पर आश्रित हैं। सूखे की मार और पानी की कमी के कारण पान की खेती को बचाए रखना बड़ा मुश्किल हो गया है। गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए है। चारों तरफ पानी की भारी किल्लत मची हुई है। यहां तक कि जंगलों में विचरण कर रहे जानवरों के समक्ष भी पानी के लाले पड़े हैं।
पठारी क्षेत्रों में पानी के लिए बहाना पड़ता है पसीना
पाली। कस्बा पाली से कनपुरा घाटी की दूरी तीन किमी है। घाटी के ऊपर से पठारी क्षेत्र शुरू हो जाता है, जो मध्य प्रदेश से सटे ग्राम पंचायत बालाबेहट तक फैला है। यहां का क्षेत्र पत्थर की खदान के रूप में बड़ी मंडी माना जाता है। जहां देखो बेशकीमती पत्थर धरती के सीने में मिल जाता है। पत्थर को चीर कर धरती से पानी का निकलना कम ही होता है। ऐसे में लोग प्राकृतिक जल स्रोतों के भरोसे अकाम चला रहे हैं। कनपुरा घाटी पर बसे गांव के लोग घाटी के नीचे जाकर झरने व जलकुंड से पानी लाते है। पानी लाते समय इन्हें लंबे सफर के साथ 500 फुट की चढ़ाई करनी पड़ती है। गर्मियों में हैंडपंप साथ छोड़ देते हैं। ऐसे में पानी भरने की जिम्मेदारी घर के युवा लोगों के कंधों पर होती है।
इन गांवों में भी किल्लत
पाली। ग्राम रमपुरा, करमरा, पड़ना, दूधई, डुंगरिया, राधापुर और बम्हौरी पिपरिया में भी पानी की किल्लत है। जो हैंडपंप लगे हैं, उनमें कुछ ठीक हैं तो कुछ दम तोड़ने की कगार पर आ चुके हैं।
जंगल में अमंगल की दस्तक
पाली। पाली के आसपास का क्षेत्र विध्यांचल पर्वत की घनी वादियों से घिरा है। इन वादियों में हिरन, मोर, खरगोश, चीतल आदि जानवरों रहते हैं। जंगलों से सूखी लकड़ी व जड़ी-बूटी बीनकर लाने वाले लोगों का कहना है कि जंगलों में दूर-दूर तक पानी नहीं दिखाई दे रहा है। पशु-पक्षी पानी की तलाश में लंबा रास्ता नापने लगे हैं। पक्षियों ने भी ठिकाना बदलना शुरू कर दिया है। यदि पानी की कमी नहीं होती तो गर्मियों के मौसम में कई प्रवासी पक्षी अब तक विध्यांचल के जंगल में आ जाते हैं। जंगलों पर आश्रित लोगों का कहना है कि सूखा के कारण महुए के वृक्षों में महुआ फूल व फल कम ही देखने को मिल रहे है। घंटों बीनने के बाद भी झोली पूरी नहीं भर पाती है।
प्राकृतिक जल स्रोत भी हारे
पाली। नदियों की धार गुम हो गई है। नदियों में लंबा सफर करने के बाद कुछ जल कुंड जरूर बचे हैं। पानी के लिए लोग यह सफर भी तय कर रहे है। चुवन आश्रम का झरना, जो कभी पहाड़ों से गिरकर बंट तालाब से होता हुआ गोविंद सागर बांध ललितपुर तक पहुंचता है। बरसात के मौसम में यह झरना लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता था, लेकिन सूखे के कारण पहाड़ो से गिरने वाला झरना बंद हो गया है। पर्यटन स्थल श्री नीलकंठेश्वर धाम के पास से निकलने वाला झरने के स्वर भी शांत पड़ गए हैं।
आगे क्या होगा राम जाने?
पाली। बुंदेलखंड का कोई भी क्षेत्र क्यों न हो, समस्या आने पर यहां के लोग आस्था का बड़ा सहारा लेते हैं। ऐसा ही अब हो रहा है। पानी की समस्या से जूझ रहे लोग नवरात्र पर्व पर माता रानी के दरबार में बढ़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। उनके समक्ष अर्जी लगा रहे हैं कि बिगड़ी मेरी बना दे मां शेरों वाली मईया... आस्था से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि पानी की कमी से मुक्ति पाने के लिए विशेष पूजा अर्चना की जा रही है। इसके बाद आगे क्या होगा राम जाने?
ग्राम पंचायत करमरा के साथ चारों तरफ पानी की बड़ी किल्लत देखी जा रही है। पानी को बचाने व लोगों तक पानी पहुंचाने के लिए सभी ग्राम प्रधानों को एकजुट होकर अपने क्षेत्र की समस्याओं से निपटना होगा।
- जितेंद्र सिंह जीतू राजा
अध्यक्ष प्रधान संघ
ग्राम बंशा बम्होरी और पठारी क्षेत्रों में पानी की समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। ऐसे में उच्चाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को आगे आकर समस्या की मदद को आगे आना चाहिए।
- प्रतिपाल यादव
ग्राम प्रधान
ग्राम पंचायत पड़ना में नए हैंडपंप लगवाए जाएंगे। साथ में रीबोर के लिए पत्र लिख दिया गया है। जल्द से जल्द हैंडपंप रीबोर कराए जाएंगे।
- नत्थू सिंह