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आरी गांव की झाड़ू ऑनलाइन कर रही कमाल
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झांसी। मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है। कहते हैं कुछ करने का हौसला हो तो उम्र और कोई डिग्री मायने नहीं रखती। झांसी के आरी गांव की महिलाओं का हौसला भी कुछ ऐसा ही है। इस छोटे से पिछड़े गांव की महिलाओं द्वारा बनाई गई झाड़ू अमेजन और फ्लिपकार्ट पर ऑनलाइन और मॉल में भी बिक रही है। इससे हो रही कमाई से महिलाएं अपना परिवार चला रही हैं। गांव में यह काम पहले जहां कुछ ही महिलाएं कर रही थीं, अब दूसरों को देखकर तकरीबन 60 फीसदी महिलाएं इसके जरिए अपना बिजनेस कर रही हैं।
छोटे-छोटे गांवों के कुटीर उद्योगों के बढ़ रहे कदम आज अमेजन, फ्लिपकार्ट पर भी देखने मिल रहे हैं। जरूरत का हर सामान आज ऑनलाइन ई-कामर्स की साइटों पर उपलब्ध है। इसे पूरे देश में लाखोें लोग पसंद भी कर रहे हैं। झांसी के आरी गांव में महिलाओं की खजूर की बनी झाड़ू भी ऑनलाइन बेची जा रही है। साथ ही कई बड़े मॉल और दुकानों में भी बिक रही है।
स्वयं सहायता समूह की मदद से कुटीर उद्योगों के तहत इन महिलाओं के काम को लगातार बढ़ावा मिल रहा है। आरी गांव में मौजूदा समय में लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं खजूर की झाड़ू बनाकर आमदनी कर रही हैं। आरी की महिलाओं की बनाई झाड़ू न केवल अपने शहर में बल्कि देशभर में बेची जा रही हैं। आज आरी गांव का मुख्य उद्योग खजूर की झाड़ू हो गया है। ऐसे में महिलाओं के साथ-साथ पुरुष भी अब झाड़ू बनाने के कार्य में लग गए हैं। लगभग डेढ़ से दो लाख तक की सालाना कमाई एक परिवार की हो जाती है। हालांकि ठेकेदार बहुत कम पैसे में महिलाओं से झाड़ू खरीदकर ले जाते हैं, लेकिन बावजूद इसके महिलाएं जी-जान लगाकर इस कार्य को कर रही हैं।
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ठेकेदार खुद दे रहे आर्डर
झांसी। पहले जहां एक तरफ महिलाआें को झाड़ू के गट्ठे सिर पर रखकर बाजारों में खुद बेचने जाना पड़ता था। वहां अब ठेकेदार खुद से ही महिलाओं से संपर्क कर झाड़ू बनाने का आर्डर देने आने लगे हैं। महिलाएं तय समय में झाड़ू बनाकर तैयार कर रही हैं और ठेकेदार को समय पर दे रही हैं।
सुमन ने इस कार्य को नए मुकाम तक पहुंचाया
झांसी। आरी में सुमन देवी ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर गांवों की अन्य महिलाओं को अपने साथ जोड़ा। गांव की महिलाआें का समूह बनाकर झाड़ू को अन्य शहरों में पहुंचवाना शुरू कर दिया है। आज गांव की महिलाएं गांव के पुरुषों से अधिक कमाई कर रही हैं। गांव की महिलाएं बताती हैं कि दिन भर धूप में मजदूरी करने के बाद पैसे के लिए ठेकेदार के लिए इंतजार करना पड़ता था। लेकिन अब झाड़ू बनाकर ठेकेदार खरीदते समय नकद हिसाब कर देता है। गांव की महिलाएं महीने में लगभग 30,000 झाड़ू बनाकर बेच देती हैं
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छोटे-छोटे गांवों के कुटीर उद्योगों के बढ़ रहे कदम आज अमेजन, फ्लिपकार्ट पर भी देखने मिल रहे हैं। जरूरत का हर सामान आज ऑनलाइन ई-कामर्स की साइटों पर उपलब्ध है। इसे पूरे देश में लाखोें लोग पसंद भी कर रहे हैं। झांसी के आरी गांव में महिलाओं की खजूर की बनी झाड़ू भी ऑनलाइन बेची जा रही है। साथ ही कई बड़े मॉल और दुकानों में भी बिक रही है।
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स्वयं सहायता समूह की मदद से कुटीर उद्योगों के तहत इन महिलाओं के काम को लगातार बढ़ावा मिल रहा है। आरी गांव में मौजूदा समय में लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं खजूर की झाड़ू बनाकर आमदनी कर रही हैं। आरी की महिलाओं की बनाई झाड़ू न केवल अपने शहर में बल्कि देशभर में बेची जा रही हैं। आज आरी गांव का मुख्य उद्योग खजूर की झाड़ू हो गया है। ऐसे में महिलाओं के साथ-साथ पुरुष भी अब झाड़ू बनाने के कार्य में लग गए हैं। लगभग डेढ़ से दो लाख तक की सालाना कमाई एक परिवार की हो जाती है। हालांकि ठेकेदार बहुत कम पैसे में महिलाओं से झाड़ू खरीदकर ले जाते हैं, लेकिन बावजूद इसके महिलाएं जी-जान लगाकर इस कार्य को कर रही हैं।
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ठेकेदार खुद दे रहे आर्डर
झांसी। पहले जहां एक तरफ महिलाआें को झाड़ू के गट्ठे सिर पर रखकर बाजारों में खुद बेचने जाना पड़ता था। वहां अब ठेकेदार खुद से ही महिलाओं से संपर्क कर झाड़ू बनाने का आर्डर देने आने लगे हैं। महिलाएं तय समय में झाड़ू बनाकर तैयार कर रही हैं और ठेकेदार को समय पर दे रही हैं।
सुमन ने इस कार्य को नए मुकाम तक पहुंचाया
झांसी। आरी में सुमन देवी ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर गांवों की अन्य महिलाओं को अपने साथ जोड़ा। गांव की महिलाआें का समूह बनाकर झाड़ू को अन्य शहरों में पहुंचवाना शुरू कर दिया है। आज गांव की महिलाएं गांव के पुरुषों से अधिक कमाई कर रही हैं। गांव की महिलाएं बताती हैं कि दिन भर धूप में मजदूरी करने के बाद पैसे के लिए ठेकेदार के लिए इंतजार करना पड़ता था। लेकिन अब झाड़ू बनाकर ठेकेदार खरीदते समय नकद हिसाब कर देता है। गांव की महिलाएं महीने में लगभग 30,000 झाड़ू बनाकर बेच देती हैं