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आर्थिक तंगी से परेशान होकर वृद्ध किसान ने फांसी लगाकर दी जान
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A farmer sucide from upset his condition is bad
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टहरौली /झांसी। टहरौली खास गांव में एक वृद्ध किसान ने खेत पर लगे पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इससे क्षेत्र में सनसनी मच गई। परिजनों का कहना है कि इस बार नहर का पानी ओवर फ्लो होकर उनके खेत में आने से फसल खराब हो गई थी। लॉकडाउन की वजह से भी भुखमरी की नौबत है। इसके अलावा मृतक का एक पैर भी खराब था। इन सभी परेशानियों की वजह से उन्होंने ये कदम उठाया।
टहरौली खास निवासी झलू (70) के दो बेटे और दो बेटियां शादी के लायक हैं। उनका बड़ा बेटा दिव्यांग बेटा कोमल कुछ नहीं करता है। छोटा बेटा गजराज मजदूरी करता है। इस बार दस बीघे खेत में गेहूं की फसल बोई थी। नहर ओवरफ्लो होने की वजह से खेत में पानी भर गया था। इससे फसल भी बहुत कम हुई है। इसकी वजह से वह काफी परेशान था। रात में खेत में वह गया था। वहीं पर रात को उसने खेत के पास ही लगे बबूल के पेड़ पर फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। उनके छोटे बेटे गजरात ने बताया कि पिता पैर खराब होने से भी परेशान थे। वह लाठी के सहारे ही चलते थे। इधर, फसल खराब होने और लॉकडाउन की वजह से मजदूरी भी बंद होने से घर में खाने के भी लाले पड़ गए थे। उनको दोनों बेटियों की शादी की भी चिंता थी। इन्हीं चिंताओं में उन्होंने फांसी लगाकर जान दे दी।
वहीं, एसडीएम शशिभूषण ने बताया कि जानकारी होने पर राजस्व विभाग की टीम मौके पर गई थी। वहां पता चला कि आधे खेत में ही फसल बोई गई थी, जो काट ली गई है। नहर का पानी यदि खेत में भरता तो ये समस्या हर साल ही होनी चाहिए, पहली बार ही क्यों हुई। मृतक किसी पारिवारिक वजह से दो-तीन दिन से घर नहीं जा रहा था। उसके दोनों बेटों से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आना बाकी है।
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टहरौली खास निवासी झलू (70) के दो बेटे और दो बेटियां शादी के लायक हैं। उनका बड़ा बेटा दिव्यांग बेटा कोमल कुछ नहीं करता है। छोटा बेटा गजराज मजदूरी करता है। इस बार दस बीघे खेत में गेहूं की फसल बोई थी। नहर ओवरफ्लो होने की वजह से खेत में पानी भर गया था। इससे फसल भी बहुत कम हुई है। इसकी वजह से वह काफी परेशान था। रात में खेत में वह गया था। वहीं पर रात को उसने खेत के पास ही लगे बबूल के पेड़ पर फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। उनके छोटे बेटे गजरात ने बताया कि पिता पैर खराब होने से भी परेशान थे। वह लाठी के सहारे ही चलते थे। इधर, फसल खराब होने और लॉकडाउन की वजह से मजदूरी भी बंद होने से घर में खाने के भी लाले पड़ गए थे। उनको दोनों बेटियों की शादी की भी चिंता थी। इन्हीं चिंताओं में उन्होंने फांसी लगाकर जान दे दी।
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वहीं, एसडीएम शशिभूषण ने बताया कि जानकारी होने पर राजस्व विभाग की टीम मौके पर गई थी। वहां पता चला कि आधे खेत में ही फसल बोई गई थी, जो काट ली गई है। नहर का पानी यदि खेत में भरता तो ये समस्या हर साल ही होनी चाहिए, पहली बार ही क्यों हुई। मृतक किसी पारिवारिक वजह से दो-तीन दिन से घर नहीं जा रहा था। उसके दोनों बेटों से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आना बाकी है।
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