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झांसी : कर्ज में डूबे प्रवासी मजदूर ने फांसी लगाकर दी जान
Wed, 10 Jun 2020 07:24 PM IST
अवधेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
Published by: अवधेश कुमार
Updated Wed, 10 Jun 2020 07:24 PM IST
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मजदूर ने फांसी लगाकर जान दी जान
- फोटो : अमर उजाला
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झांसी में मऊरानीपुर तहसील के थाना लहचूरा इलाके के ग्राम धवाकर में कर्ज में डूबे एक प्रवासी मजदूर ने बुधवार को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मजदूर ने दो साल पहले बेटी की शादी के लिए चार लाख रुपये का कर्ज लिया था। इसके बाद से वह दिल्ली में मजदूरी करने लगा था, लेकिन लॉकडाउन में हाथ से काम छिन गया और वो वापस अपने गांव लौट आया था। लेकिन, यहां भी वह कर्ज चुकाने की चिंता में डूबा रहता था। इसी चिंता में उसने आत्मघाती कदम उठा लिया।
ग्राम धवाकर निवासी पूरन अहिरवार (46) ने दो साल पहले अपनी बेटी की शादी की थी। बेटी के हाथ पीले करने के लिए उसने चार लाख रुपये का कर्ज लिया था। शादी के बाद कर्ज में ली गई रकम जमा करने के लिए दिल्ली में जाकर मजदूरी करने लगा था। लेकिन, कोराना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण के लिए लागू किए गए लॉकडाउन की वजह से दिल्ली में उसके पास कोई काम नहीं रहा तो वह पंद्रह दिन पहले वापस अपने गांव लौट आया। लेकिन, यहां उसे हर समय कर्ज अदायगी की चिंता सताती रहती थी। समाधान कोई नजर नहीं आ रहा था। इसी चिंता में डूबे पूरन ने मंगलवार - बुधवार की रात घर के एक कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने सुबह उसका शव फंदे पर लटका देखा। इससे घर में कोहराम मच गया। आनन फानन में परिजन पूरन को स्वास्थ्य केंद्र लेकर भागे, लेकिन यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मृतक के भाई हरीराम ने बताया कि पूरन हर समय कर्ज अदायगी की चिंता में डूबा रहता था। उसके दो अविवाहित बेटे हैं। खेती महज तीन बीघा है। इतनी कम जमीन में घर के लिए अनाज भी नहीं हो पाता है।
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ग्राम धवाकर निवासी पूरन अहिरवार (46) ने दो साल पहले अपनी बेटी की शादी की थी। बेटी के हाथ पीले करने के लिए उसने चार लाख रुपये का कर्ज लिया था। शादी के बाद कर्ज में ली गई रकम जमा करने के लिए दिल्ली में जाकर मजदूरी करने लगा था। लेकिन, कोराना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण के लिए लागू किए गए लॉकडाउन की वजह से दिल्ली में उसके पास कोई काम नहीं रहा तो वह पंद्रह दिन पहले वापस अपने गांव लौट आया। लेकिन, यहां उसे हर समय कर्ज अदायगी की चिंता सताती रहती थी। समाधान कोई नजर नहीं आ रहा था। इसी चिंता में डूबे पूरन ने मंगलवार - बुधवार की रात घर के एक कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने सुबह उसका शव फंदे पर लटका देखा। इससे घर में कोहराम मच गया। आनन फानन में परिजन पूरन को स्वास्थ्य केंद्र लेकर भागे, लेकिन यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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मृतक के भाई हरीराम ने बताया कि पूरन हर समय कर्ज अदायगी की चिंता में डूबा रहता था। उसके दो अविवाहित बेटे हैं। खेती महज तीन बीघा है। इतनी कम जमीन में घर के लिए अनाज भी नहीं हो पाता है।
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