फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   सूखे नहीं आंसू, आंखों में बसी है तस्वीर

सूखे नहीं आंसू, आंखों में बसी है तस्वीर

Mon, 16 Jun 2014 05:32 AM IST
Jhansi
Jhansi Updated Mon, 16 Jun 2014 05:32 AM IST
विज्ञापन
झांसी। उत्तराखंड आपदा को एक वर्ष पूरे हो गए हैं। साल के यह 365 दिन उन पीड़ितों के कैसे गुजरे होंगे, जिन्होंने कुदरत के इस कहर में अपनों को खोया है, इसे केवल महसूस ही किया जा सकता है। शब्दों के जरिये इसे बया करना आसान नहीं है। परिवार की सुख - शांति की कामना के साथ चार धाम की यात्रा पर गये लोग देवलोक के होकर ही रह गए। विलाप करते रह गए परिजन। उनके आंसू अब भी सूखने का नाम नहीं ले रहे हैं। नम आंखों में खोए हुए परिवार की तस्वीर हर समय सामने बनी रहती है। जिंदगी का कोई भी रंग उन्हें अच्छा नहीं लगता। दरवाजे पर होने वाली हर आहट उन्हें उनके आने का अहसास कराती है, लेकिन हर बार दरवाजा खोलने पर निराशा से सामना होता है। अमर उजाला ऐसे पीड़ित परिवारों के दर्द लगातार बांटने की कोशिश करता चला आ रहा है।
विज्ञापन


...काश समय से चेत जाती सरकार
सिविल लाइन निवासी राजेश चंद्र त्रिपाठी (50) पत्नी वसुंधरा (48), पुत्री ऋतु (17) तथा बहन मिथलेश मिश्रा (55) के साथ पिछले साल अमरनाथ की यात्रा पर गए थे। उनकी पुत्री दामाद रिचा - अलंकार व पुत्र राहुल ने सभी को खुशी - खुशी विदा किया था। उन्हें इस बात का बिल्कुल भी भान नहीं था कि परिवार के यह सभी सदस्य एक अंतहीन यात्रा पर जा रहे हैं। 16 जून को राहुल का यात्रा पर गए परिवार के लोगों से फोन के जरिये अंतिम बार संपर्क हुआ। इसके बाद लाख कोशिशों के बाद भी वह उन तक नहीं पहुंच पाए। कुदरत के कहर ने यात्रा में गए परिवार के चारों लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। हंसते - खेलते परिवार पर एकाएक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बाकी रह गईं तो सिर्फ यादें और व्यवस्था के प्रति आक्रोश। अमर उजाला से हुई बातचीत में राहुल ने बताया कि उत्तराखंड आपदा के बाद समय रहते सरकार सक्रिय हो जाती, तो शायद तमाम लोगों की जान बच जाती। 16 जून को वहां बाढ़ आई, जबकि बचाव कार्य 19 जून को शुरू किया गया। और तो और इसके दो - तीन दिन बाद बचाव कार्य में आर्मी को लगाया गया। यदि यह काम तत्काल शुरू हो जाता, तो शायद उनका परिवार भी बच जाता। वह कहते हैं कि उन्हें नहीं लगता उक्त आपदा के बाद भी सरकार ने कोई सबक लिया है। देश में जान की कोई कीमत नहीं है। समय रहते सरकार चेत जाती तो तमाम जिंदगियां बच जातीं।
विज्ञापन


10 लापता लोगों की अब भी नहीं सुध
झांसी। उत्तराखंड आपदा में जनपद के 39 लोग लापता हुए थे। स्थानीय प्रशासन द्वारा सभी की रिपोर्ट उत्तराखंड सरकार को भेज दी गई थी। बावजूद, अब तक 29 के ही मृत्यु प्रमाण पत्र शासन ने भेजे हैं। दस की अब तक कोई सुध नहीं ली गई। इसके अलावा किसी भी पीड़ित परिवार को अब तक अनुग्रह धनराशि /मुआवजा उपलब्ध नहीं कराया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


देवलोक के होकर रह गए यह
संजीव सोनी (40), नीलम सोनी (35), यश उर्फ राधे (8), खुशी उर्फ प्रज्ञा (5), सजल (2), संध्या (38), मुस्कान (14), कल्लू उर्फ साहिल (12), बृजभूषण शर्मा (65), कस्तूरी शर्मा (62), अत्रमुनि व्यास (49), मीरा साहू (52), मूलचंद्र कुशवाहा (52), पूनम कुशवाहा (48), राजेश चंद्र त्रिपाठी (50), वसुंधरा त्रिपाठी (48), ऋतु त्रिपाठी (17), मिथलेश मिश्रा (55), मुन कुशवाहा (7), रामकली (60), अंगूरी देवी (54), लखनलाल पटेल (50), किशोरी देवी (45), कौशल्या देवी (60), जगदीश प्रसाद (55), रामश्री (52), राजकुमारी (60), उत्तम सिंह (35), श्यामा देवी (60), जगदीश सहाय (60), द्रोपती देवी (63), उत्तम सिंह (56), लीलावती (59), शशि देवी (48), धूराम (50), गब्बर सिंह घोष (30), प्रेमवती (65), अब्बू (70) तथा पुक्खन पाठक (76)।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed